औघड़नाथ मंदिर में सफेद पत्थर पर होंगे 12 ज्योतिर्लिग के प्रतिरूप दर्शन

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मेरठ 12 फरवरी। उतरी भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शुमार स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठ भूमि से जुड़ें श्री औघड़नाथ कालीपल्टन मंदिर कमेटी अध्यक्ष डाॅ. महेश बंसल के अनुसार मंदिर को भव्य बनाने के लिए 12 ज्योतिलिंग प्रतिरूप सफेद पत्थर पर जयपुर से मंगाये जा रहे है तो मंदिर की मजबूती के लिए भूकम्प विरोधी पिलर भी खड़े किये जा रहे है। एक अन्य प्रश्न के उतर में डाॅ. बंसल ने बताया कि। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिग के दर्शन अब आपको औघड़नाथ मंदिर में ही हो जाएंगे। इसी महीने से मंदिर परिसर के चारों ओर खास तौर पर ज्योतिर्लिग के प्रतिरूप लगा दिए जाएंगे। जयपुर से आने वाले सफेद पत्थर पर बारह ज्योतिर्लिग के प्रतिरूप बनाने का आॅर्डर दस महीने पहले दिया गया था। इसके बाद से ही औघड़नाथ मंदिर में जीर्णोद्धार का कार्य कराया जा रहा है। पहले मंदिर परिसर के अंदर पोस्टर पर बारह ज्योतिर्लिग के दर्शन होते थे पर अब सफेद पत्थर पर ज्योतिर्लिग के दर्शन होने से इसकी भव्यता और बढ़ जाएगी। दस मई 2017 को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के औघड़नाथ मंदिर में भ्रमण के बाद मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया था। मंदिर के पिलर को खास तौर पर भूकंपरोधी बनाया गया है। वहीं इसके अलावा देवी मंदिर की तरह भी औघड़नाथ मंदिर को नक्काशी वाले पत्थरों से सुसज्जित किया जाएगा। इस कार्य को करने में करोड़ों रुपये का खर्च आ रहा है।

बारह ज्योतिर्लिग 1. सोमनाथ: यह गुजरात राज्य के सौराष्ट्र में स्थित है। इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। इस पर विदेशी आक्रमण ने 17 बार हमले किए। यह बनता रहा और बिगड़ता रहा।
2. मल्लिकाजरुन: यह आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इसके दर्शन करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
3. महाकालेश्वर: यह मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में स्थित है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिग है।
4. ओंकारेश्वर: यह मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है। यह ज्योतिर्लिग ओंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है।
5. केदारनाथ: यह उत्तराखंड में स्थित है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसका वर्णन शिव पुराण में भी किया गया है।
6. भीमाशंकर: यह महाराष्ट्र के पुणो जिले में सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। इसके दर्शन करने से सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।
7. काशी विश्वनाथ: यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित है। इसकी मान्यता है कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा।
8. त्रयंबकेश्वर: यह महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। खास बात यह है कि भगवान शिव का एक नाम त्रयंबकेश्वर भी है।
9. वैद्यनाथ: यह झारखंड राज्य के दुमका जिले में स्थित है। भगवान श्री वैद्यनाथ का मंदिर जिस स्थान पर है उसे वैद्यनाथ धाम कहा गया।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिग: यह गुजरात राज्य के द्वारिका में स्थित है। द्वारका पुरी से श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिग की दूरी 17 किलोमीटर है।
11. रामेश्वर ज्योतिर्लिग: यह तमिलनाडु राज्य के रामनाथ पुर में स्थित है। इसकी स्थापना स्वयं भगवान राम ने की थी।
12. घृष्णोश्वर मंदिर: यह महाराष्ट्र के संभाजीनगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। इसे घृसणोश्वर और घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। 12 ज्योतिलिंग के दर्शनों की व्यवस्था होने से अब मंदिर में दर्शनार्थी भक्तों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है ऐसे में व्यवस्था बनाने के लिए क्या किया जा रहा है। पूछने पर डाॅ. बंसल का कहना था की मंदिर समिति उनकी पवित्रता बनाये रखने के लिए रखरखाव सहित भक्तों को कोई असुविधा दर्शनों में ना हो इसके लिए सभी के सहयोग से पूर्ण इंतजाम किये जायेगे।

डाॅ. बंसल के अनुसार भगवान शिव के डमरू से निकले 14 शब्दों से महार्षि पाणिनी ने शब्दों की रचना की इसलिए भगवान भोले की महिमा अपार है।

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