आबूलेन की कोठी नम्बर 173 में सरकारी भूमि पर दो व्यापारी ,व भाजपा नेताओं द्वारा 4 दुकानों का किया अवैध निर्माण ,कैंट बोर्ड के अधिकारियों की मिली भगत से ?

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मेरठ 12 फरवरी। छावनी क्षेत्र के जागरूक नागरिको में आज एक चर्चा विशेष रूप से सुनाई दी कि आखिर कैंट बोर्ड के अधिकारी चाहतें क्या है? क्योकि एक तरफ तो कोठी नम्बर 210 बी में बने आरआर माॅल की दुकानों के प्रकरण में इनके द्वारा प्रशासन और पुलिस तथा जनता तीनों को परेशान करके रख दिया गया है। पहले फोर्स मांगतें है और फिर मौके से जब वो तो वो बहाने बाजी कर आ जाती है तो भाग जाते है। दूसरी तरफ पुराने निर्माणों को तोड़ने की बात कर जनता का जीना मुश्किल किये रहते है जबकि नये नये काॅमशियल निर्माणों की यहां बाड़ सी आयी हुई है और अब तो हौसले इतने बुलंद अवैध निर्माण कर्ताओं के हो गये है मौखिक चर्चा अनुसार वो सरकारी जमीन घेरकर भी अवैध निर्माण कैंट बोर्ड के सबंधित अधिकारियों की मिली भगत से करने में नही चूक रहे है। सूत्रों के द्वारा बताया गया है की आबुलेन पर कैंट बोर्ड द्वारा कोठी नम्बर 173 में बनाये गये कार स्टैंड को जाने वाले मार्ग पर सीधे हाथ पर जो सरकारी जमीन पड़ी बतायी जा रही है। उस पर दिन दहाड़े 4 दुकानों का काॅमशियल निर्माण कर लिया गया। सही तो नही पता चला की उक्त निर्माण किसके है लेकिन जो मौखिक चर्चा है उसके अनुसार आबुलेन के एक व्यापारी और एक कैंट बोर्ड के चुने गये पूर्व पदाधिकारी तथा एक किसी रेस्टारेंट संचालक और एक अन्य किसी कैंट अफसरों के चहेते की यह दुकानें है। इसमें कितनी सत्यता है लेकिन मौखिक चर्चा है की इस निर्माण में लेनदेन और निर्माण कर्ताओं व अवैध निर्माण रोकने से सबंध कैंट बोर्ड के अधिकारियों के बीच तालमेल बैठाने में एक वरिष्ठ पार्षद द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी गयी है। जिलाधिकारी जी कैंट बोर्ड के अधिकारियों की इस दोहरी नीति के चलते एक तरफ तो प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ मानहानी के मामले बनने की चर्चा है दूसरी और कैंट बोर्ड के अधिकारी अवैध निर्माण कराने के सारे रिकार्ड तोड़ रहे है। आखिर जनता प्रशासन और पुलिस कब तक रहेगी इनकी माॅल कमाउ नीति के चलते परेशान कुछ तो सोचियें।

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