डीएम साहब दामोदार कालोनी के प्रयाग बाग फार्म की 41 हजार गज भूमि की खरीद फरोख्त में करोड़ो रूपये के स्टाम्प शुल्क की चोरी होने की है चर्चा

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मेरठ 16 सितंबर। राजस्व की चोरी रोकने और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत व जनहित की जारी योजनाओं को पूरा कराने के लिये यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। लेकिन मौखिक सूत्रों से मिल रही जानकारियों के अनुसार हडडी के चक्कर में कटरा कटवाने की कहावत को चिरतार्थ करते हुए जिलों में तैनात राजस्व विभाग से संबंध कुछ अधिकारी जानकारी होने के बाद भी ऐसे मामलों में आंखे मूंदकर बैठे हुए है। इस संदर्भ में मौखिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गढ़ रोड पर दामोदार कालोनी में मेडिकल कालेज की मोचरी के पीछे स्थित प्रयाग कालोनी और अब  प्रयाग फार्म की 54 हजार गज भूमि के लेनदेन में स्टाम्प शुल्क की मोटी चोरी हुई बताई जा रही है।
बताते हैं कि किसी जमाने में विकास से संबंध सरकारी कार्यालय से जुड़े रहे एक अफसर का 54 हजार गज का बाग प्रयाग कालोनी और मोचरी के पीछे स्थित था जो सेवा नियुक्ति होने के बाद उसके द्वारा थोडा थोड़ा कई लोगों से पैसा लेकर उन्हे दे दिया गया। लेकिन इसकी रजिस्ट्री नियम अनुसार स्टाम्प आदि लगाकर नहीं करायी गई। बाद में जमीन के बंटवारे को लेकर संपत्ति मालिक के दमाद और शहर के कुछ लोगों में मुकदमेबाजी चली। जिसका फैसला बाद में हुआ। जिसमे 15 हजार गज भूमि मालिक के दमाद को मिली। और 41 हजार गज भूमि उन लोगों के हक में  गई जिनसे पैसे ले लिए गए थे। इनमे भी बताते हैं कि अब जमीन का मालिकाना हक को लेकर आपस में विवाद चल रहा है।
सूत्रों का कहना है कि लाला सूरजभान डोरली वालों ने जो जमीन ली थी उनके बाद उनके वंशज उस पर कब्जा जमा रहे हैं और बाकी 32 हजार गज जमीन जिस व्यक्ति के पास है उस के द्वारा कोशिश लाला सूरजभान के वंशजों से जा रहा है।
मंडलायुक्त जी पूरे प्रकरण में कोई भी जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाला स्टाम्प शुल्क जो करोड़ो में बैठता है देने की बात नहीं कर रहा है। कुछ जानकारों का कहना है कि यह पूरा मामला प्रदेश के एक हिस्से में बंजर और खादर की जमीन पर कब्जा जमाने के लिये जिस प्रकार कुछ लोग या भाई भाई आपस में मिलकर न्यायालय में मुकदमा डालकर यह दावा करते हैं कि उसका भाई या मित्र उसका हिस्सा नहंी दे रहा है और बाद में मिलीभगत कर एक के पक्ष में एसडीएम आदि के यहां से निर्णय करा लिया जाता है और फिर सरकारी जमीन की बंदरबांट कर ली जाती है।  इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो नहीं कहा जा सकता। लेकिन प्रयाग फार्म की जमीन की हो रही बंदरबांट में ऐसा ही कुछ हो रहा लगता है। क्योंकि अगर 15 हजार गज जमीन जो मालिक के दामाद को मिली और उसे अगर गिफ्ट समझ लिया जाए तो 41 हजार गज भूमि सर्किल रेट जो वहां 25 हजार रूपये गज का मौखिक रूप से बताया जाता है से स्टाम्प शुल्क इस जमीन पर करोड़ो रूपये का बैठता है। जमीन चाहे लाला सूरज के वंशज लें जिनके हिस्से में कुल 8 हजार गज जमीन बैठती है या अन्य व्यक्ति।
लेकिन कुछ मिलाकर जो कई करोड़ का स्टाम्प शुल्क बैठता है उसकी वसूली के लिये राजस्व विभाग से संबंध अधिकारी प्रयास क्यों नहीं कर रहे है और इस ओर से आंखे मूंदे क्यों बैठे हैं। यह विषय सोचनीय है। क्योंकि जब किसी ने हमे सूचना दी तो उन्हे ने दी हो ऐसा नहीं हो सकता। उसके बावजूद सरकार को इतने मोटे राजस्व का नुकसान कैसे होने दिया जा रहा है यह देखा जाना चाहिये।
तीन बार बिका बांके बिहारी इंस्ट्टीयूट, नही दिया स्टाॅप शुल्क का एक भी पैसा
दिल्ली हापुड़ बाईपास पर स्थित बांके बिहारी इंस्ट्टीयूट ट्रस्ट बनाकर उसकी आड़ में इस के संचालक ने तीन बार बेच दिया और ना तो उस पर कोई स्टाॅप शुल्क दिया गया और ना ही अन्य प्रकार से जो राजस्व बनता उसकी अदायगी की गयी।
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