प्रमुख सचिव आवास का भय, एमडीए अधिकारियों ने जवाबदेही का रचा नाटक

0
145

अवैध निर्माण के लिये जिम्मेदारों को बनाया जोन प्रभारी
एमडीए जहां शासन की नीति के विरूद्ध ही होते हैं ज्यादातर काम
सही वसूली हो तो कई सौ करोड़ रूपये का प्राप्त हो सकता है विभाग को राजस्व जो जा रहा है जेईयों की जेब में

मेरठ 11 नवंबर। एमडीए के अवैध निर्माण रोकने से संबंध कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली हमेशा ही संदिग्ध रही है। लेकिन अब प्राधिकरण के सचिव ने आवासीय योजनाओं से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण व अवैध निर्माण पर नजर रखने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है मगर यह बड़े आश्चर्य की बात है की जो जोन प्रभारी बनाए गए हैं उनमे से कुछ तो अवैध निर्माण कराने और करने वालों को बचाने के लिये पूरी तौर पर प्रसिद्ध है उसके बाद भी उन्हे ग्रामीण कहावत चोटटी कुतिया जलेबियों की रखवाली को चरितार्थ करते हुए ऐसे लोगों को जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई।
अधिकारी को संबंधित काॅलोनी की शिकायत या अवैध निर्माण की शिकायत का रजिस्टर भी तैयार करना होगा। आवासीय योजनाओं की समस्या के समाधान के लिए मुख्य अभियंता दुर्गेश श्रीवास्तव व अधीक्षण अभियंता योगेश पाठक को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया गया है। अधिशासी अभियंता पीपी सिंह को शताब्दी नगर, स्पोर्ट्स एन्क्लेव, रक्षापुरम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहयोग के लिए सहायक अभियंता राजीव कुमार सिंह को तैनात किया गया है। अधिशासी अभियंता डीसी तोमर पर पल्लवपुरम, श्रद्धापुरी, सैनिक विहार, डिफेंस एन्क्लेव, गंगानगर व वेदव्यासपुरी की जिम्मेदारी रहेगी, उनके साथ सहायक अभियंता धीरज सिंह रहेंगे। अधिशासी अभियंता आशु मित्तल पर लोहिया नगर, पांडव नगर की जिम्मेदारी रहेगी। इसके साथ ही वह उद्यान प्रभारी भी रहेंगे। उनके सहयोग के लिए सहायक अभियंता आरके गुप्ता को तैनात किया गया है। उधर, अवैध निर्माण पर लगाने के लिए प्राधिकरण क्षेत्र को चार जोन में बांटा गया है। अधीक्षण अभियंता योगेश पाठक इसके पर्यवेक्षण अधिकारी बनाए गए हैं। जोन-एक के जोनल अधिकारी तहसीलदार करनवीर सिंह व नोडल अधिकारी विवेक शर्मा रहेंगे। जोन-बी के जोनल अधिकारी मनोज कुमार सिंह व नोडल अधिकारी धीरज सिंह रहेंगे। जोन-सी के जोनल अधिकारी पीपी सिंह व नोडल अधिकारी राजीव कुमार सिंह बनाए गए हैं। जोन-डी के जोनल अधिकारी अजय कुमार सिंह व नोडल अधिकारी नीरज कुमार बनाए गए हैं। सचिव राजकुमार ने कहा कि जिम्मेदारी तय होने के बाद भी यदि निराकरण नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। सचिव की मंशा और कथन तो सही लगता है लेकिन अगर जांच करायी जाए तो एमडीए कार्यालय में शासन की नीतियों के विपरीत काम ज्यादा और सही कम होता है। यह कहा जाए तो कुछ गलत नहीं है।
यहां ग्रामीण कहावत बाडी खेत को खाने लगे तो क्या होगा। बिल्कुल सही प्रतीत होती हैं । इसलिये सचिव को छोटी से छोटी शिकायत हर ध्यान देकर अपने सहयोगियों की कार्यप्रणाली पर पूर्ण रूप से निगाह रखनी होगी। इस मामले केा लेकर कुछ लोगों का कहना है कि 12 नवंबर को प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल शहर में होंगे। और ईमानदार छवि के सख्त मिजाज अफसर के समक्ष कुछ लोग अवैध निर्माण आदि की शिकायत रख सकते हंै जिससे बचने के लिये प्राधिकरण अधिकारियों द्वारा जिम्मेदारी सौंपने का नाटक भी रचा गया है।

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

20 + 18 =