मंजूर को बदनाम करने के पीछे कौन? शाहिद लीडर हैं और रहेंगे, कौन कर रहा है कमजोर

0
2158

मेरठ 16 मई। पूरे प्रदेश में अपना जनाधार ज्यादातर हिंदू मुस्लिम मतदाताओं में रखने वाले प्रदेश की अखिलेश यादव की पूर्व सरकार में कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर से लगता है कि आजकल कुछ लोग खफा हो गए हैं। क्यों की कारण कुछ भी हों हमेशा निर्विवाद रहने वाले पूर्व मंत्री को विवादों में घसीटने का कोई भी मौका यह नहीं चूक रहे हैं। जबकि सभी जानते हैं कि शाहिद मंजूर समाजवादी पार्टी सपा के प्रति पूरी तौर पर आस्थावान नेता व कार्यकर्ता बने रहेें अपने मंत्रित्व कार्यकाल में भी उनका कोई बड़ा आरोप नहीं लगा और वो विवादों से बचे रहे। लेकिन जब से यूपी में भाजपा की सरकार बनी है तब से उनके राजनीतिक विरोधी सक्रिय हो गए लगते हैं। शायद इसलिये सोशल मीडिया पर उनको सपा से
निकाले जाने से संबंध समाचार फैलाने की कोशिश की गई तो उससे पूर्व जब उन्हे संगठन की जिम्मेदारी दी तो भी उन्हे विवादों में घसीटने का प्रयास किया गया था और ऐसे ही विवादों में फंसाने के लिये कभी उनके पुत्र का नाम लिया जाता है तो कभी सहयोगियों का नाम लेकर अवैध निर्माणों के क्रम में उन्हे घेरने की कोशिश की जा रही है। वह हमेशा अवैध निर्माण करने वालों का विरोधी रहा हूं लेकिन यह कहां लिखा है कि अगर किसी नेता का दोस्त या सहयोगी व रिश्तेदार कहीं अवैध निर्माण करता है तो उसे दोषी ठहराया जाएगा।
पिछले वर्ष ऐसे ही एक मामले में मेरठ विकास प्राधिकरण की बिल्डिंग की हुई सौंदर्यकरण के दौरान शाहिद मंजूर साहब ने अपने संबोधन में कहा था कि मेरे दोस्तों को भी रोटी खाने और काम करने का पूरा अधिकार है। कुछ लोग निर्माण कर रहे हैं तो इसमे बुरा क्या है हां अगर गलत कर रहे हैं तो विभाग उनके विरूद्ध कार्रवाई करें मेरा उनसे कोई मतलब नहीं।
सपा के जिला अध्यक्ष चैधरी राजपाल सिंह एडवोकेट के द्वारा यह स्पष्ट किया जा चुका है कि शाहिद मंजूर सपा में है। अब सवाल उठता है कि आखिर स्पष्टवादी अपने क्षेत्र की जनता के साथ हमेशा रहने और उनकी समस्या का समाधान करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शाहिद मंजूर को विवादों में फंसाने के पीछे कौन है यह देखना सपा मुखिया अखिलेश यादव का काम है। मगर एक बात जो विश्वास के साथ कहीं जा सकती हैै कि शाहिद मंजूर पार्टी के प्रति निष्ठावान नेताओं में शामिल हैं अगर विरोधी उन्हे बदनाम कर रहे हैं तो उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर सपा के किसी व्यक्ति का इसके पीछे हाथ है तो वो शाहिद मंजूर को नहीं बल्कि सपा को कमजोर करने का काम कर रहा है। रही बात पूर्व मंत्री की तो चुनाव में हार व जीतने का कोई विशेष फर्क शाहिद मंजूर जैसे नेताओं को नहीं पड़ता । यह सत्ता में रहे या विपक्ष में हमेशा ही नेता रहते हैं। संवाद सूत्र से प्रस्तुत

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

14 − 8 =