इनकी हुई अनदेखी………मंत्रिमंडल विस्तार में मोदी जी ने साथ देने वाली वैश्य, कायस्थ और भूमिहार जातियों को किया नजरअंदाज।

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 कैबिनेट विस्तारनिर्मला की छलांग और चांदी बाबुओं की

 मोदी सरकार का 2019 लोकसभा चुनाव से पहले का शायद अंतिम कैबिनेट विस्तार/फेरबदल और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अपने कार्यकाल के पहले शपथ ग्रहण समारोह की सबसे विशेष बात रही निर्मला सीतारमण का रक्षा मंत्री बनना। यानी अब देश के रक्षा तथा विदेश जैसे अति महत्वपूर्ण विभागों को महिला मंत्री देखेंगी। यह सुखद है।  

नेपथ्य में रहकर दिन-रात काम करने वाली  निर्मला सीतारमण इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला होंगी जो साउथ ब्लाक से देश के रक्षा मंत्रालय को देखेंगी। हालांकि इंदिरा गांधी ने पीएम रहते हुए रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थीं। भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये के हथियारों की खरीद करता है। उन सौदों में पारदर्शिता रहे और देश की सीमाएं सुरक्षित रहें इन बिन्दुओं को देखते रहना होगा कभी जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी की स्टुडेंट रही निर्मला सीतारमण को। निर्मला सीतारमण के य़शवंतराव चव्हाणबाबू जगजीवन राम,सरदार स्वर्ण सिंह जैसे पूर्ववर्ती भी रहे हैं। वो इन सभी से भी प्रेरित होती रहेंगी। निर्मला के पास इससे पहले वाणिज्य मंत्रालय की जिम्मेदारी इन पर थी। निर्मला के अलावा पीयूष गोयलधर्मेंद्र प्रधान और मुख्तार अब्बास नकवी ने भी कैबिनेट मंत्री की शपथ ली है। गोयल को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। मुजफ्फरनगर के खतौली में रेल हादसे के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी।

 कहां गए प्रभु ?

 तो जैसी कि उम्मीद थी रेलवे विभाग सुरेश प्रभु की झोली से निकल गया। उन्हें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय सौंपे गए हैं। ये भी अहम विभाग हैं। प्रभु ईमानदार और मेहनती मंत्री थेलेकिन लगातार रेल हादासों के चलते उनकी स्थिति खराब होती जा रही थी। उन पर इस्तीफे का दबाव था। हाल ही में रेल हादसों के बाद उन्होंने खुद भी इस्तीफे की पेशकश की  थी। और पीयूष गोयल की प्रमोशन सही है। उन्होंने उर्जा मंत्रालय का कायाकल्प किया। इस सवाल पर कोई बहस नहीं हो सकती।  पर क्या वो दो रेलवे ट्रैक पर चलने वाली रेलवे में नई जान फूंक सकेंगे? ये अब बड़ा सवाल है। अमेरिका से लेकर चीन जैसे दुनिया के  विकसित देशों में रेलें चार ट्रैकों पर दौड़ती हैं। दो पर मुसाफिर रेलें चलती हैं,एक ट्रैक रहता है मालगाड़ी के लिए और चौथे ट्रैक पर सदैव मेंटिनेंस का काम चलता है। इसी पर आवश्यकता पड़ने पर सेना के लिए रेलें चलाई जाती हैं। चार ट्रैक पर रेलों को दौड़ाए बिना आप हादसों पर रोक की उम्मीद नहीं कर सकते।

 हिन्दू आतंकवादी कौन ?

दरअसल मोदी सरकार के इस तीसरे विस्तार में नौकरशाहों की चांदी हो गई। हिन्दू आतंकवाद की टर्म देने वाले आर.के. सिंह को कैबिनट में शामिल किया जाना हैरान अवश्य करता है। वे यूपीए सरकार के दौर में पी.चिदंबरम के आदमी माने जाते थे। कहते हैं कि रिटायर होने से पहले वे राजीव प्रताप रूढ़ी के दफ्तर में बैठे रहा करते थे ताकि उन्हें भाजपा में एंट्री मिल जाए। अब रूढी की कैबिनेट से विदाई हुई और आर.के.सिंह बने उनके बदले मोदी सरकार के एक और राजपूत मंत्री।  यूपीए सरकार में गृह सचिव रहे आर के सिंह दावा करते थे कि आरएसएस से जुड़े लोगों के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के उनके पास पुख्ता सबूत हैं। यही नहीं, आर के सिंह ने कहा था कि समझौता एक्सप्रेसमक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ दरगाह बम ब्लास्ट की जांच में कम से कम 10 ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं जो सीधेतौर पर आरएसएस या फिर आरएसएस से जुड़े संगठनों से जुड़े हैं। और तो और उनके हिन्दू आतंकवाद टर्म को तब कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने यह कहते हुए खारिज किया था कि कांग्रेस आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ कर नहीं देखती। पार्टी हिंदू आतंकवाद से सहमत नहीं है और मुमकिन है गलती से ऐसी बातें किसी के मुंह से निकल गई हों। आरके सिंह को ऊर्जा मंत्रालय स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। और स्मृति ईरानी की ताकत और बढ़ गई। उन्हें संचार मंत्री बनाया गया है। टैक्सटाइल मंत्रालय भी स्मृति ईरानी के पास रखा गया है। नितिन गडकरी को गंगा एवं जल संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यानी वो उमा भारती के पुराने विभाग को देखेंगे। वहीं उमा भारती को पेयजल-सफाई मंत्री बनाया गया है।

मोदी के प्रिय धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम और कौशल विकास मंत्रालय दिया गया है।अश्विनी चौबे को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री बनाया गया है। विजय गोयल से खेल मंत्रालय स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा वापस लिया गया है। वे कल तक आगामी ओलंपिक खेलों में भारत की तैयारी पर बात कर रहे थे। अब ओलंपिक खेलों में पदक विजेता राज्यवर्धन राठौड़ को इस विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राठौड़ सूचना और प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री भी बने रहेंगे। विजय गोयल को अब संसदीय कार्य राज्य मंत्री बनाया गया है। शिव प्रताप शुक्ला को वित्त राज्य मंत्री बनाया गया है। नरेंद्र तोमर को ग्रामीण विकास और खनन मंत्रालय सौंपा गया है।इसके अलावा मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक मंत्रालय सौंपा गया है। अनंत कुमार हेगड़े को कौशल विकास राज्यमंत्री बनाया गया है। राजकुमार सिंह को ऊर्जा एवं नवीकरणीय एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार)वहीं गजेंद्र सिंह शेखावत को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय मिला है।

 बाबुओं की चांदी

 हरदीप पुरी को आवास और शहरी मामलों (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली के हिन्दू कालेज के छात्र रहे पुरी जेपी आंदोलन से जुड़े थे। मिलनसार इंसान हैं। उम्मीद थी कि उन्हें विदेश विभाग में भेजा जा सकता है। इसके अलावा अल्फ़ोंस को पर्यटन और राज्य मंत्री बनाया गया है। केरल कैडर के अल्फोंस भी धाकड़ अफसर रहे हैं। इस कैबिनेट विस्तार और फेरबदल में पूर्व सरकारी बाबुओं की चांदी हो गई। हालांकि कहने वाले कह रहे हैं कि सरकारी बाबू जनता के सुख-दुख से उस तरह से नहीं जुड़ पाते जैसे कि राजनीतिक लोग जुड़ पाते हैं। इस राय को इन सभी को गलत साबित करना होगा। सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन विकास मंत्रालय राज्य मंत्री बनाया गया है। ये उनके मिजाज का विभाग है। हालांकि वे पुलिस अफसर रहे हैं। पर वे सरस्वती पुत्र हैं।

 और मोदी सरकार के विस्तार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी साफ संदेश दिया गया है। उनके गोरखपुर क्षेत्र के ब्राहमण नेता शिव प्रकाश शुक्ल को कैबिनेट में जगह देकर योगी को  मानो बता दिया गया कि जरा संभल कर चलो।

किनकी हुई अनदेखी

 हैरानी इस बात को लेकर अवश्य है कि भाजपा का सदैव साथ देने वाली जातियों जैसे वैश्य, कायस्थ और भूमिहार को मोदी जी ने नजरअंदाज किया। अब तो इन जातियों से जुड़े सांसदों को शायद ही कुछ मिले।

प्रस्तुति विवेक शुक्ला (09818155246), पूर्व संपादक सोमाय पब्लिकेशंस तथा विशेष संवाददाता, एचटी मीडिया, नई दिल्ली, 110092
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