मेरठ 11 मार्च (प्र)। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में मंगलवार को आवास एवं विकास परिषद की ओर से प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई पुलिस बल (फोर्स) न मिलने के कारण टल गई। विभाग ने जिलाधिकारी और एसएसपी को पत्र भेजकर महिला पुलिस समेत भारी फोर्स और मजिस्ट्रेट की मांग की थी, लेकिन ऐन वक्त पर बल उपलब्ध न होने से फिलहाल व्यापारियों ने चैन की सांस ली है।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने 6 सप्ताह के भीतर अवैध व्यावसायिक निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था ध्वस्तीकरण की जद में 1468 निर्माण आ रहे हैं। ये सभी निर्माण मूल रूप से आवासीय श्रेणी के हैं, लेकिन वर्तमान में यहां शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं। कोर्ट द्वारा दी गई समय सीमा अब समाप्त हो रही है। अगले सप्ताह मामले की दोबारा सुनवाई संभव है जिससे पहले आवास विकास को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है।
पहले चरण में 31 संपत्तियों पर चलना है बुलडोजर
अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने ध्वस्तीकरण की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। विभाग ने द रिलायवल एजेंसीज को पत्र भेजकर दो हैमर हिल्टी लगी जेसीबी और दो पोकलेन मशीनें तैयार रखने को कहा है। पहले चरण की कार्रवाई के लिए
31 संपत्तियों को चिह्नित किया गया है. जिन्हें सबसे पहले ध्वस्त किया जाना है।
सुप्रीम कोर्ट के डंडे और विभाग की सक्रियता को देखते हुए व्यापारियों ने अब खुद ही बचाव के रास्ते खोजने शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को भी मार्केट में कई दुकानों के शटर हटाकर वहां दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां लगाने का काम युद्ध स्तर पर चला ताकि निर्माण को फिर से आवास का रूप दिया जा सके।
वास्तुविद नियोजक की ओर से 80 दुकानदारों को नई शमन नीति के तहत राहत लेने के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद कई बड़े शोरूम और निर्माणों में सेट बैक छोड़ने के लिए तोड़-फोड़ का काम व्यापारियों ने खुद ही शुरू कर दिया है।
