Wednesday, March 11

युद्ध से मेरठ के उद्योगों पर बुरा असर, 70 करोड़ का माल फंसा

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मेरठ 11 मार्च (प्र)। इजराइल व ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर मेरठ के उद्योगों पर भी दिखने लगा है। पिछले 10 दिनों में मेरठ के उद्योगपतियों का करीब सत्तर करोड़ का माल समुद्री रास्ते में फंसा हुआ है। यह उम्मीद नहीं है कि माल मिलेगा या नहीं। इसके चलते यहां उद्योगों पर संकट छाया हुआ है। परतापुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन का कहना है कि युद्ध बंद होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। इसके चलते यहां के उद्योगों पर संकट और ज्यादा गहरे होने के आसार हैं। इससे उद्योगों पर बहुत खराब असर पड़ेगा।

बताया गया कि मेरठ की फैक्ट्रियों में बना स्पोर्ट्स गुड्स, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स हैंडक्राफ्ट और डेकोरेटिव आइटम, मेटल और ब्रास उत्पाद, कुछइंजीनियरिंग व फिटिंग आइटम, केमिकल, धागा, कपड़ा आदि चाइना, यूके, फ्रांस, जर्मनी से समुद्र के रास्ते आयात व निर्यात होते हैं। मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी युद्ध और विशेषकर लाल सागर-स्वेज नहर मार्ग पर बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित हो गया। विश्व के लगभग 12-15 फीसदी समुद्री व्यापार और 30 प्रतिशत से अधिक कंटेनर ट्रैफिक इसी मार्ग से गुजरते हैं। सुरक्षा कारणों से कई शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के लंबे मार्ग से भेजना शुरू कर दिया है। इससे यात्रा समय लगभग 10-15 दिन बढ़ गया है और कंटेनर फ्रेट दरों में तेज उछाल आया है।

कई कंटेनरों का फ्रेट 3 से 4 गुना बढ़ा
वर्तमान में एशिया से यूरोप या अमेरिका के लिए जाने वाले कई कंटेनरों का फ्रेट 3-4 गुना तक बढ़ गया है। जहां पहले एक कंटेनर का भाड़ा लगभग 1500-2000 डॉलर के आसपास था, वहीं कई रूट्स पर यह 5000-7000 डॉलर तक पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत अचानक काफी बढ़ गई है और उनका माल विदेश में बिकने में समस्या खड़ी हो गयी है।

मेरठ के उद्योगों पर प्रभाव
मेरठ एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र है। यहां से विभिन्न उत्पाद विदेशों को जाते हैं। इनका बड़ा बाजार अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व है शिपिंग महंगी होने और ट्रांजिट समय बढ़ने से कई खरीदार नए ऑर्डर रोक रहे हैं या कीमत घटाने का दबाव बना रहे हैं, जिससे मेरठ के उद्योगों के मार्जिन पर असर पड़ रहा है। समय पर डिलीवरी न होने का जोखिम भी बढ़ गया है। अब तक मेरठ की फैक्ट्रियों का करीब 70 करोड़ का तैयार माल समुद्री रास्ते में फंसा हुआ है। यह कब पहुंचेगा। इसका कोई पता नही है जिससे मेरठ के उद्योगों पर सकंट के बादल छा रहे है।

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