मेरठ, 30 अप्रैल (प्र)। नगर निगम ने महानगर में सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में कूड़ा कलेक्शन, कूड़ा उठाने आदि पर करीब 128 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
महानगर की आबादी लगभग 25 लाख है, शहर में 90 वार्ड हैं। शहर में गंदगी को लेकर नगर निगम में सर्वाधिक शिकायतें आती हैं। सफाई व्यवस्था को लेकर अधिकांश महानगरवासी संतुष्ट नहीं हैं । गंदगी को लेकर लोग परेशान रहते हैं । गली मोहल्लों से लेकर मेन रोड, बाजारों और कालोनियों में झाडू न लगने, कूड़ा न उठाए जाने या नालियों में सिल्ट भरी होने की शिकायतें होना आम बात है। इसकी वजह है नगर निगम में मानक के अनुसार सफाईकर्मियों न होना । सफाईकर्मचारी संगठनों के अनुसार मानक के तहत महानगर की आबादी के हिसाब से 8400 सफाईकर्मियों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन नगर निगम में स्थाई सफाईकर्मचारी मात्र 450 हैं और आउटसोर्सिंग के 2514 कर्मचारी हैं। इनमें भी कुछ कर्मचारी छुट्टी पर रहते हैं । महानगर के 73 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का ठेका बीवीजी कं. के पास है। इसको नगर निगम हर वर्ष पांच करोड़ रुपये का भुगतान करता है। चालू वित्तीय वर्ष में भी इस कंपनी को पांच करोड़ रुपये का भुगतान करना प्रस्तावित है। इस वर्ष स्थाई सफाई कर्मचारियों के वेतन पर 60 करोड़ रुपये और सफाई मजदूरों व आउटसोर्सिंग सफाईकर्मियों के वेतन की मद में भी 60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा नाला सफाई पर तीन करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। महानगर में मेन रोड, बाजारो में करीब 122 किलोमीटर क्षेत्र में सुबह और शाम झाड़ू लगाने और कूड़ा उठाने का ठेका देने की योजना है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमर सिंह का कहना है कि महानगर में सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए जो योजना चालू वित्तीय वर्ष के लिए बनाई गई है, उसपर अमल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। महानगर साफ सुथरा कराया जाएगा।
महानगर की सफाई 128 करोड़ से होगी
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