Thursday, April 30

लालकुर्ती अब कहलाएगा जवाहर नगर और रजबन शिवाजी नगर

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मेरठ, 30 अप्रैल (प्र)। छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) की बोर्ड बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि अंग्रेजों के जमाने के बाजारों और मोहल्लों के पुराने नामों को पूरी तरह हटाकर नए भारतीय नामों को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
हालांकि कई नामों को 1947 में ही कागजों में बदल दिया गया था। इनमें आरए (रॉयल आर्टिलरी) बाजार तोपखाना को सुभाष बाजार, बीआई (ब्रिटिश इन्फैंट्री) लालकुर्ती को जवाहर नगर और बीसी (ब्रिटिश कैवलरी) रजबन को शिवाजी नगर में बदला जा चुका है लेकिन ये सभी जगह आज भी पुराने नामों से ही प्रचलन में हैं। अब बोर्ड ने इन्हें नई पहचान देने का फैसला किया है। बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार इन क्षेत्रों में आकर्षक होर्डिंग्स और साइन बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि जनता के बीच नए नामों का प्रचार हो सके। जिन मोहल्लों के नाम अभी तक नहीं बदले गए हैं उनके लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही पूरे कैंट क्षेत्र मैं एक ही रंग के बोर्ड लगाए जाएंगे।
बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार हुआ। छावनी जनरल अस्पताल में आईएमए के सहयोग से हड्डी रोग, नाक- कान-गला रोग और चर्म रोग विशेषज्ञों की ओर से प्रतिदिन दो घंटे ओपीडी करने को मंजूरी दी गई। स्त्री रोग व बाल रोग विशेषज्ञों की संविदा पर भर्ती होगी। अध्यक्ष ने छावनी क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण पर जोर दिया। इसके लिए पेड़ों का वरण रजिस्टर में दर्ज करने को कहा गया। सड़क किनारे पांच-छह फुट ऊंचाई के पौधे लगेंगे।
निगम के सहयोग से कूड़ा निस्तारण पर विचार
छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) की बोर्ड बैठक में अब्दुल्लापुर कूड़ा प्लांट के 2.5 लाख मीट्रिक टन कूड़े को निस्तारित करने पर सहमति बनी। इसका डीपीआर बनाने वाली फर्म के 2.36 लाख रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई। शीघ्र ही इसके लिए टेंडर प्रक्रिया होगी। कहा गया कि छावनी क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 55 मीट्रिक टन कूड़े को अब अब्दुल्लापुर नहीं भेजा जाए। नगर निगम के सहयोग से कूड़ा निस्तारण करने पर विचार हुआ। ऐसा नहीं होने पर कूड़े को सोफीपुर में डाला जाए। नमामि गंगे के सहयोग से साफ होगा आबू नाला बैठक में नमामि गंगे के सहयोग से आबू नाले की सफाई पर विचार हुआ। दौराला से निकलने वाले आबू नाले को कंकरखेड़ा में छावनी क्षेत्र में प्रवेश से पहले ही कासमपुर में एसटीपी लगाकर साफ किया जाएगा। नमामि गंगे की टीम के साथ कैंट बोर्ड अध्यक्ष ने आबू नाले का निरीक्षण किया है।
कासमपुर में ए-1 लैंड को सी लैंड में बदलकर प्लांट लगाने पर विचार चल रहा है। आबू नाले में कूड़ा जाने से रोकने के लिए किनारे पर ऊंची फेंसिंग लगाई जाए। आबू नाले में ऐसे शैवाल रूपी ऐसे पौधे लगाए जाएंगे, जो पानी के बैक्टीरिया को साफ कर देंगे। नगर निगम के साथ भी यह तकनीक साझा की जाएगी। दो स्थानों पर अरेस्टर मशीनें लगाकर सफाई होगी। जल्दी ही रिपोर्ट आने के बाद विस्तार से विचार होगा।
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि अधिक आवागमन वाली सड़कों को पहले ठीक किया जाए। जनता से भी सुझाव लिए जाएं। 30 लाख रुपये में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने को मंजूरी। इसमें सात सिस्टम रिपेयर होंगे। तीन नए लगेंगे व सात रिचार्ज पिट बनेंगे। पांच नए ट्रेड लाइसेंस नवीनीकृत हुए। नए ट्रेड लाइसेंस जारी करने के लिए व्यापार संघों के साथ बातचीत करके दिक्कतें दूर की जाएंगी। पांच वार्ड में कूड़ा संग्रह और सफाई के लिए 20.37 करोड़ रुपये में दो साल के ठेके को मंजूरी मिली। 13.39 करोड़ रुपये में मिलिट्री कंजर्वेसी का एक साल के ठेके को मंजूरी मिली। 19.10 करोड़ रुपये में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का दो साल के ठेके को स्वीकृति दी गई। 7.21 करोड़ रुपये से कैंट बोर्ड फंड को स्वीकृति मिली। नई सड़कों के निर्माण के लिए ठेका दिया गया। कैंट बोर्ड की संपत्ति पर विज्ञापन या पोस्टर चिपकाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जाकिर हुसैन, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्षिता चमड़िया, नामित सभासद डॉ. सतीश चंद्र शर्मा, जयपाल सिंह तोमर, पीयूष गौतम, हितेष राय आदि उपस्थित रहे।

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