चर्चा हैं जारीः आनंद हाॅस्पिटल प्रकरण, अवैध बनी बिल्डिंग बढ़ी मगर साख घटी; हरिओम आनंद क्या दर्शाना चाह रहे हैं

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मेरठ, 13 फरवरी (विशेष संवाददाता) नागरिकों को सस्ती चिकित्सा उपलब्ध कराने के नाम पर लगभग 12 साल पहले गढ़ रोड पर दामोदर काॅलोनी के कोने पर अवैध निर्माण कर बनाए गए आनंद हाॅस्पिटल के संचालकों द्वारा अपने वायदे के अनुसार शायद गरीबों को चिकित्सा सुविधा तो उपलब्ध नहीं कराई गई मगर सरकार की निर्माण नीति के विपरित मानचित्र पास के नाम पर कई इमारतें और जरूर खड़ी कर दी गई। और इनमें जो बेसमेंट वाहनों के खड़ा करने के लिए बना था उसका उपयोग भी व्यवसायिक रूप से शुरू कर दिया गया।
इतनी मोटी कमाई होने के बावजूद पिछले वर्षों में आनंद हाॅस्पिटल आर्थिक तंगियों में क्यो घिरा इस पर समय असमय शहर के नागरिकों में चर्चाएं खूब सुनाई देती हैं। कुछ का कहना है कि अपनी पैसे की बढ़ती लालसा को मिटाने के चलते इसके संचालकों द्वारा जो अन्य धंधे किए गए उससे इसकी आर्थिक स्थिति तो बिगाड़ी ही यहां काम करने वाले डाॅक्टरों में भी असंतोष पैदा कर दिया क्योंकि मौखिक सूत्रों के अनुसार इनका काफी पैसा भी संचालकों द्वारा इन्हें सब्जबाग दिखाकर अपने यहां लगवा लिया गया।

बीते दिनों शहर लगभग डेढ़ दर्जन प्रतिष्ठित डाॅक्टर जो पिछले काफी समय से यहां अपनी सेवाएं देते चले आ रहे थे उनके द्वारा इससे अपने आप को अलग कर अपने नर्सिंग होम या क्लीनिक में बैठने का फैसला लिया गया और इससे संबंधित एक विज्ञापन दैनिक जागरण के 9 फरवरी के अंक में प्रकाशित कराया गया कि वह अब आनंद हाॅस्पिटल में नहीं बल्कि अपने क्लीनिक में बैंठेंगे।
इससे जब लगा कि निरंतर हाॅस्पिटल की गिरती साख नीचे पहुंच जाएगी तो आज एक विज्ञापन लगभग 47 डाॅक्टरों और हाॅस्पिटल के प्रबंध निदेशक हरिओम आनंद द्वारा अपना फोटो लगवाकर कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशिक कराया गया और यह दिखाने की कोशिश की गई है कि वह पूरी तौर पर जमे हुए हैं। असलियत क्या है यह तो हरिओम आनंद ही जान सकते हैं।

सवाल यह उठता है कि जब आनंद हाॅस्पिटल की स्थिति इतनी अच्छी है और इतने डाॅक्टर इससे जुड़कर अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं और मरीज भी आ रहे हैं तो जिन दवा विक्रेताओं के पैसे इन पर बाकी हैं वो क्यों नहीं चुकाए जा रहे । एक चर्चा यह भी सामने आई है कि जिन लोगों से कई प्रकार से हरिओम आनंद आदि द्वारा पैसा लिया गया था अगर हाॅस्पिटल की स्थिति अच्छी है तो उन्हें वापस क्यों नहीं किया जा रहा।
कुल मिलाकर पिछले लगभग एक साल से आनंद अस्पताल को लेकर जो चचाएं चलती हैं और हंगामे होते हैं उसको देखते हुए कई बार इसके बिकने और कर्जदारों द्वारा इसे अधिगृत करने की खबरें भी खूब सुनने को मिली। आज भी एक चर्चा मौखिक रूप से सुनने को मिली कि गाजियाबाद के किसी यशेादा हाॅस्पिटल से आनंद हाॅस्पिटल को लेकर चर्चा चल रही है। कुछ का कहना है कि बिक्री का मसौदा तय हो चुका है तो कुछ कह रहे हैं कि अभी डील होना बाकी है। जो भी हो फिलहाल जनहित में तो यही लगता है कि यहां आने वाले मरीजों को वो सुविधाएं शायद अभी नहीं मिल पा रहीं होंगी जो इसके शुरू आती दौर में दी जा रही थी।

अब स्थिति क्या है यह तो विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता है लेकिन मरीजों के अभिभावकों द्वारा पूर्व में फेसबुक पर जो कुछ टिप्पणियां की गई थी उसे देखकर कहा जा सकता था कि वो इससे संतुष्ट नहीं थे।

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