जागरूकता से ही हो सकती है बर्ड फलू की रोकथाम-आर्यका अखौरी

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मेरठ. एवियन इन्फ्लूएन्जा  (बर्ड फलू) की रोकथाम हेतु बर्ड फ्लू निवारण एवं राष्ट्रीय खुरपका – मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सम्बंध में पशुपालन विभाग द्वारा एक दिवसीय कार्याशाला का आयोजन विकास भवन सभागार में किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी आर्यका अखौरी ने दीप प्रज्जवलित कर किया।  मेरठ. एवियन इन्फ्लूएन्जा  (बर्ड फलू) की रोकथाम हेतु बर्ड फ्लू निवारण एवं राष्ट्रीय खुरपका – मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सम्बंध में पशुपालन विभाग द्वारा एक दिवसीय कार्याशाला का आयोजन विकास भवन सभागार में किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी आर्यका अखौरी ने दीप प्रज्जवलित कर किया।  मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि बर्ड फलू एक ज्वलन्त समस्या है, जिसके विषय में आज कार्यशाला का आयेाजन  के माध्यम से बर्ड फ्लू के लक्ष्ण एव उसकी रोकथाम हेतु किये जाने वाले उपायों एक अच्छी पहल है। उन्होंने बताया कि एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) वायरस बर्ड फ्लू के नाम से पॉपुलर है। इस खतरनाक वायरस का संक्रमण इंसानों और पक्षियों को अधिक प्रभावित करता है। बर्ड फ्लू इंफेक्शन चिकन, टर्की, गीस और बत्तख की प्रजाति जैसे पक्षियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इससे इंसान और पक्षियों की मौत तक हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस वायरस के प्रति जागरूक होकर उसकी रोकथाम हेतु सभी सम्बंधित विभाग आपस में समन्वय बनाकर कार्य योजना तैयार करें ताकि किसी भी समस्या से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वह आमजन को भी इस बीमारी के प्रति जागरूक करें और इससे बचाव के उपाय भी बतायें। उन्होंने कहा कि पशु पालन विभाग पशुओं को टीकाकरण भी समय से करायें ताकि पशु इस बीमारी से दूर रह सके।  अपर निदेशक पशुपालन डा0 एस0के0 श्रीवास्तव ने बताया कि बर्ड फ्लू के लक्षण होने पर बुखार, हमेशा कफ रहना, नाक बहना, सिर में दर्द रहना, गले में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, दस्त होना, हर वक्त उल्टी-उल्टी सा महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना सांस लेने में समस्या, सांस ना आना, निमोनिया होने आदि है। उन्होंने बताया कि इंसानों तक यह वायरस ये बीमारी संक्रमित मुर्गियों या अन्य पक्षियों के बेहद निकट रहने से ही फैलती है। यानि मुर्गी की अलग-अलग प्रजातियों से डायरेक्ट या इन्डायरेक्ट कॉन्टेक्ट में रहने से इंसानों में बर्ड फ्लू वायरस फैलता है फिर चाहे मुर्गी जिंदा हो या मरी हुई हो। इंसानों में ये वायरस उनकी आंखों, मुंह और नाक के जरिए फैलता है। इसके अलावा इंफेक्टिड बर्ड्स की सफाई या उन्हें नोंचने से भी इंफेक्शन फैलता है। उन्होंने बताया कि मरे हुए पक्षियों से दूर रहकर, तथा किसी पक्षी की मौत हो जाती है तो इसकी सूचना पशुपालन विभाग को दें, बर्ड फ्लू वाले एरिया में नॉनवेज ना खाएं, जहां से नॉनवेज खरीदें वहां सफाई का पूरा ध्यान रखें कोशिश करें कि मास्क पहनकर बाहर निकले। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू का इलाज एंटीवायरल ड्रग ओसेल्टामिविर और जानामिविर (रेलेएंजा) से किया जाता है। इस वायरस को कम करने के लिए पूरी तरह आराम करना चाहिए। हेल्दी डायट लेनी चाहिए जिसमें अधिक से अधिक लिक्विड हो। बर्ड फ्लू अन्य लोगों में ना फैले इसके लिए मरीज को एकांत में रखना चाहिए।मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डा0 ए0के0 सिंह ने बैठक का संचालन करते हुए बर्ड फलू नियंत्रण के लिये विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही पर विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की।इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 राजकुमार, परियोजना निदेशक भानू प्रताप सिंह, उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा0 वीपी सिंह, डा0 प्रमोद कुमार, सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।

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