किसकी अनुमति से छात्र-छात्राओं को स्वागत के लिए ले गया एमपीएस स्कूल का संचालक

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मेरठ 25 मई। मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से तीसरी बार चुनाव जीते राजेन्द्र अग्रवाल हर दिल अजीज और सबके प्रिय नेता है इसीलिए पहली बार कांग्रेस की लहर मे भी वो 2009 में चुनाव जीत गये थे अब तो उनकी निकटता और पहचान अपने हर मतदाता से है इसलिए उनका स्वागत करने के लिए हर कोई उत्साहित है मगर अपने स्वार्थ हेतु स्कुली छात्र छात्राओं को माध्यम बनाना किसी भी रूप में उचित नही कहा जा सकता। पूर्व में प्रदेश मंे जब श्री राजनाथ सिंह जी की सरकार थी तब शायद यह तय हुआ था की स्कूली छात्र छात्राओं को वीआईपी के स्वागत आदि में कही नही ले जाया जा सकता मगर गत दिवस जब श्री अग्रवाल चुनाव जीतने के बाद पहली बार कालीपल्टन मंदिर भगवान के दर्शन करने पहुंचे तो उनके चुनाव में कही भी नजर ना आने वाले एमपीएस स्कुल के संचालकों काफी संख्या में छात्राओं को लेकर मंदिर पहुंच गये और वहां श्री अग्रवाल के आने तक छात्राएं धूप में मंदिर के बाहर हाथों में फूल लेकर खड़ी रही जिसे लेकर दर्शनार्थीयों में चर्चा थी की स्कूल संचालकों सांसद जी का स्वागत करना था तो अपने परिवार के सदस्यों को लेकर आना चाहिए था छात्राओ को लेकर क्यो और किसकी अनुमति से वो मंदिर पहुंचे क्या इन छात्राओ के घरवालों से इसकी अनुमति ली थी या अभिभावकों ने स्कुल संचालक के राजनीतिक उदेश्यों की पूर्ति अपनी बच्चियों को पढ़ने भेजा है ओर ना ही यह छात्राएं राजनीतिक शास्त्र विषय शायद पड़ती होगी। तो आये दिन किसी ना किसी विवाद को लेकर चर्चाओं में रहने वाले वेस्ट एडं रोड के स्कुल संचालक छात्राओं को लेकर स्कुल समय में मंदिर कैसे पहुंचे? इसकी जनहित में नागरिकों के अनुसार प्रशासन को जांच होनी चाहिए और स्कुल संचालक से पूछा जाये की वो कौन से नियम और नीति के तहत बच्चियों को मंदिर ले गये और फिर धूप में खड़ा रखा। चित्र में मंदिर के बाहर सड़ती गर्मी में फूल लिए मौजूद छात्र छात्राएं तथा स्वागत करते स्कूल संचालक नजर आ रहे है। -दैनिक केसर खुशबू टाईम्स से सहभार

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