कलयुग में तो भगवान की भक्ति ही फलदायक: पं. श्री कृष्णप्रीत मिश्र

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मेरठ 06 नवम्बर। सुरेश्वरी गौपीठ पुण्यार्थ न्यास मेरठ के तत्वावधान में श्री केदारेश्वर शिव मंदिर बद्रीशपुरम के प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पं. श्री कृष्णप्रीत मिश्र जी ने राजा परीक्षित द्वारा पूछने पर श्री शुकदेव जी द्वारा ध्यान विधी और भगवान के विराट स्वरूप का वर्णन, श्रृष्टि वर्णन, भगवान की लीला अवतारों की कथा, भागवत के दस लक्षण, उद्धव और विदुर की भेंट, विदुर जी को मैत्रेय जी द्वारा श्रृष्टि का वर्णन, ब्रह्मा जी द्वारा श्रृष्टि की रचना, प्रहलाद चरित्र ध्रुव-प्रहलाद के चरित्र का वर्णन करते महाराज जी ने कहा कि पूर्ण समर्पण भाव से की गयी भक्ति ही सांसारिक एवं पारलौकिक सभी प्रकार के तापों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। ज्ञान मार्ग से मुक्ति अथवा मोक्ष पाना बहुत कठिन है किन्तु भक्ति भाव से यह सहज ही प्राप्त हो जाती है।

कलयुग में तो भगवान की भक्ति ही समीचीन है। कथा में चै. रणवीर सिंह पंवार, श्री विभोर शर्मा, श्री राजेंद्र सिंह रावत ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस अवसर पर अम्बाह (मप्र) से पधारे हुए वैष्णव संत श्री श्री महक दास जी महाराज जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। श्री नरेंद्र शर्मा, श्री रामशंकर शर्मा, के. वीरेंद्र सिंह गोसाई, श्री यशवंत सिंह नेगी, श्री राजवीर पुण्डीर, श्री भास्कर पोखरियाल आदि मौजूद रहे।

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