मुख्यमंत्री का तीन घंटे का दौरा! आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के दौर में गरीब की तो रोटी ही छिन गई

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प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ का भरी दोपहरी में तीन घंटे 10 मिनट का दौरा शहर और नगरवासियों के लिए कितने लाभ का रहा यह तो समीक्षा का विषय है मगर विपक्ष की दृष्टि से देखा जाए तो इसे सिर्फ अधिकारियों ने जो दिखाया सीएम ने वो देखा। नौकरशाहों ने जो समझाया उन्होंने वो समझा ही कहा जा सकता है क्योंकि किसी पीड़ित से जो उनकी मुलाकात होने नहीं दी गई औरों की तो बात छोड़िए भाजपा के जाने माने नेता भी अपनी कठिनाईयों को लेकर या जिनके परिवार के लोग कोरोना की भेंट चढ़ गए वो भी उनसे नहीं मिल पाए। सत्ताधारी विधायकों ने उन्हें कौन सा आईना दिखाया यह तो वही जान सकते हैं लेकिन शहर के सपा विधायक रफीक अंसारी ने उन्हें बताया कि सरकारी आंकड़ों और हकीकत में बहुत ज्यादा अंतर है। लोग काफी मरे हैं किसी को बेड नहीं मिला किसी को आॅक्सीजन व दवाई और इलाज। टेस्टिंग को लेकर भी शहर विधायक द्वारा शिकायत की गई।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि यह सिर्फ कहीं पर नजरें कहीं पर निशाना था। कोरोना के बहाने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुखों के चुनाव की तैयारियों की समीक्षा गुप्त बैठक में की गई। तो बसपा के जिलाध्यक्ष मोहित जाटव का कहना है कि कोरोना महामारी से निपटने की तैयारियों को लेकर कम चुनावों की तैयारी की समीक्षा दौरे को ज्यादा कहा जा सकता है अगर बीमारी से निपटने की तैयारी परखते तो ज्यादा अच्छा था। रालोद के क्षेत्रीय अध्यक्ष यशवीर सिंह का मानना है कि शहर और गांवों में लोग कोरोना से मर रहे थे उस समम सीएम दौरे में मस्त थे या लखनऊ में। जुझारू सपा नेता अतुल प्रधान का कहना है कि यह दौरा सरकारी खर्च पर था। अगर जनता का दुख दर्द जानना था तो सीएम को मेडिकल अस्पताल जाना था निजी अस्पतालों काा दौरा करना था। आप के जिलाध्यक्ष अंकुश चैधरी का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बीच सीएम का दौरा केवल औपचारिकता रहा। तो कांग्रेेस के शहराध्यक्ष जाहिद अंसारी का कहना है कि मुख्यमंत्री लोकतंत्र में विपक्ष की कोई भूमिका नहीं समझ रहे हैं। प्राइवेट हाॅस्पिटल मरीजों को लूट रहे हैं। तो दूसरी ओर यह बात सही लगती है कि मुख्यमंत्री जी को शहर में व्याप्त गंदगी और कूड़े के ढेर नजर ना आएं इसके लिए नगर निगम द्वारा उन्हें परदे लगाकर भी ढका गया। तो कई जगह खबरों के अनुसार ग्रामीणों को इसलिए बंधक बनाकर रखा गया जिससे वो अपने नेता के समक्ष सच्चाई ना उगल दें। सही स्थिति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि ग्राम बिजौली में सीएम के पहुंचने पर तारांचद नामक व्यक्ति बोला कि योगी जी राम राम सब ठीक ठाक है और सीएम के जाते ही लोगों को समस्याएं बताने लगा। जब उससे पूछा गया तो उसका कहना था कि अधिकारियों ने सब अच्छा बताने के लिए कहा था।
सीएम साहब आए थे तो बिल्कुल यह तो नहीं कह सकते कि कुछ फायदा नहीं हुआ होगा लेकिन जैसा जनता को प्रदेश के मुखिया के आने पर महसूस होना चाहिए था वो शायद नहीं हुआ। एक भाजपा युवा नेता का यह कहना कि हमने तो टवीट कर दिया है अफसरों ने जो दिखाया वो योगीजी आपने देखा।
इन सब बातों को अगर छोड़ दें तो प्रदेश के मुखिया सीएम योगी का कुछ घंटे का शहर का दौरा आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के दौर में कुछ गरीबों की रोजी रोटी का माध्यम खोखानुमा दुकानें और एमडीए ने कितने ही गरीबों की सिर छिपाने की झोपड़ियां जरूर तोड़ दी। मैं किसी भी तरह के अवैध निर्माण का तो समर्थक नहीं हूं लेकिन पहले यह बनने ही क्यों दी। और अब जिस समय सीएम आने वाले थे उसी दौरान क्यों तोड़ी गई और अगर एमडीए और नगर निगम के अधिकारी इतना ही नियमों का पालन करने वाले हैं तो फिर इस शहर में मौजूद दर्जनों कच्ची काॅलोनियों और हुए हजारों अवैध निर्माण तथा लाॅकडाउन में भी सरकार की निर्माण नीति के विरूद्ध बन रहे कामर्शियल काॅम्पलेक्स तथा कच्ची काॅलोनियों का निर्माण क्यों नहीं रोका जा रहा। मुख्यमंत्री जी आपको पता चले या ना चले लेकिन कोरोना महामारी से बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे गरीब आदमी के तो घर की छत और रोटी कमाने का माध्यम भी अतिक्रमण हटाने के नाम पर छिन लिया गया। अब यह आपको बताने की आवश्यकता नहीं है कि आपके भ्रमण को लेकर ही हटाया गया उक्त झुग्गी झोपड़ी सरकार और सत्ताधारी पार्टी की बदनामी का कारण और उन्हें गरीब विरोधी दर्शाने की कोशिश भी कही जा सकती है। वरना एमडीए और नगर निगम अब तक क्यों चुप बैठे थे।

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