हर तरफ है भ्रष्ट्राचार, 10ः30 पर भी साहब नही मौजूद रहते, सैकड़ों फाईले है गायब यह है डिप्टी रजिस्ट्रार चिटफंड कार्यालय, ज्यादातर बाहर के लोग निपटाते है काम

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टाईप करने वालों के कंधों पर टिकी है व्यवस्था, खाली हाथ आईये और संस्था रजिस्टर्ड करा कर ले जाइये

मेरठ 4 सिंतबर। तहसील में नाजिर सदर बाबू आदि द्वारा प्राईवेट कर्मचारी रख कर कराये जा रहे काम और वसूली की शिकायत जांच में सही ना निकलने के बाद भी शिकायतकर्ता के कथन को दृष्टिगत रख कमिश्नर डाॅ. प्रभात कुमार द्वारा छापामार कर गत दिनों 5 कर्मचारी गिरफ्तार कराने के साथ साथ कुछ सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सुनिश्चित की गयी कार्यवाही से जनमानस में एक बात अब साफ हो गयी की दोषियों और भ्रष्ट्राचारियों के खिलाफ कार्यवाही हर हाल में होगी अगर मंडलायुक्त तक उसकी खबर पहुंच जाये तो।
बताते चले कि इस क्रम में आजकल डिप्टी रजिस्ट्रार चिटफंड सोसाईटी कार्यालय न्यूमोहन पुरी की कार्यप्रणाली को देखा जा सकता है यह भ्रष्ट्राचार का अड्डा बना हुआ है यहां आने वाले परेशान सोसाईटी संचालकों का कहना है की कितने ही लोगो की तो यहां फाईलें गायब है। जो मिल नही पा रही है। तो दूसरी ओर दफ्तर के नीचे प्राईवेंट रूप से टाईप करने वाले लोग ही 50 प्रतिशत कार्य विभाग का निपटाते है इसमें कितनी सत्यता है यह तो जांच का विषय है लेकिन बताते यह है की आप खाली हाथ जाईये बस यह बताइये की सोसइटी का नाम क्या होगा एक दिन में फर्जी मिटिंगें और सविंधान व नियमावली तैयार कर सोसाईटी रजिस्टर्ड कराने तक के पैसे नीचे ही तय हो जायेगे।
कई लोगो का कहना है की डिप्टी रजिस्ट्रार चिट फंड रजिस्ट्रार कार्यालय में लगभग 55 हजार सोसाईटियां रजिस्टर्ड है जिनमें से 50 प्रतिशत की अगर फाइलंे खुलवाकर देखी जाये तो सबमें एक से हस्तारक्षर एक सा संविधान व नियमावली होगी। पदाधिकारियों व सोसाईटी का नाम जरूर बदल जायेगा। चर्चा यह भी है की वर्तमान समय में सोसाईटी रजिस्टर्ड कराने की रसीद कटने के अलावा जो कार्य पहले 1-2 या पांच हजार रूपये तक में हो जाता था अब 5 से 25 हजार तक मांगे जाते है। और कार्य की महत्ता दर्शाने के लिए संस्था रजिस्टर्ड कराने वालों के आवेदनों पर अनावश्यक रूप से आपति लगाकर बुरी तरह परेशान किया जाता है। मगर इनकी सुनने वाला कार्यालय में कोई नही है नागरिकों का मानना है की एक बार अगर मंडलायुक्त जी यहां भी अचानक निरक्षण कर दे या अपने किसी अपर आयुक्त के माध्यम से यहां की पत्रावली और कार्यप्रणाली का निरीक्षण कर ले तो यहां की सारी असलियत खुलकर सामने आ सकती है।
कमिश्नर साहब इस कार्यालय में बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बागपत और मेरठ आदि जिलो में सक्रिय सोसाईटियां रजिस्टर्ड होने का काम होता है। उनके संचालकों को कई कई दिन कभी कोई कागज नही मिल रहा कभी कोई फाईल के नाम पर यहां के कर्ताओं द्वारा चक्कर कटाये जाते है लेकिन काम के नाम पर रात को 8 बजें भी और छुट्टी के दिन में यह कार्यालय खुला दिखायी देता है काम तो होता नही तो फिर कार्य समय उपरांत यहां क्या होता है यह किसी को बताने की आवश्यकता नही।
बताते चले की शासन की नीति के तहत हर फाईल का निस्तारण हर 15 दिन में हो जाना चाहिए लेकिन अगर सेटिंग नही हुई तो यहां महीनों विभिन्न कारण बताकर फाईल अटका दी जाती है।
चर्चा यह भी है की सैकड़ों फाईल बीते काफी समय से नही मिल और सबंधित लोग चक्कर काट रहे है उन्हे सही जबाव नही मिल पाता और आज तो चर्चा यह भी की पिछले कुछ समय से फाईलों का निस्तारण काफी कम हो गया है काफी सुविधाओ की मांग सोसाईटी संचालकों को से की जाने लगी है। संवाद सूत्रों पर आधारित

 

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