शहर में जाम का कारण बनीं ई-रिक्शाएं, शोरूम संचालकों आरटीओ और पुलिस के कारण सरकार को हो रहा है करोड़ों के राजस्व का नुकसान

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मेरठ 08 नवम्बर।  शहर के यातायात को प्रभावित करने तथा जाम लगने के मुख्य कारणों में से एक ई-रिक्शाओं की वजह आम आदमी को परेशानी और सरकार को राजस्व की कितनी हानी तथा कानून व्यवस्था की जो स्थिति पैदा हो रही है उसकी तरफ से प्रशासन और पुलिस अनभिज्ञ क्यों है आरटीओ विभाग ने क्यों चुप्पी साधी हुई है यह तो वहीं जाने लेकिन यह सूचना सनसनीखेज है कि आरटीओ विभाग में मात्र 6 हजार ई-रिक्शा जनपद में रजिस्टर्ड है और इससे कई गुना बिना नंबर और बिना रजिस्ट्रेशन के ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रही हैं मौखिक सूत्रों से प्राप्त उक्त जानकारी से पता चलता है कि बिना नंबर की कुछ ई-रिक्शाओं के संचालक सवारियों का मौका देखकर रात बेरात मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न करने से भी नहीं चूकते हैं इसका उदाहरण बीते दिनों रोडवेज से सवारी लेकर चले एक ई-रिक्शा संचालक द्वारा कैंट क्षेत्र में उनके साथ किये गये हंगामे का उदाहरण दिया जाता है।

मौखिक चर्चा अनुसार रजिस्ट्रेशन नंबर से ई-रिक्शा सवा से डेढ़ लाख रूपये के बीच बैठती है और बिना नंबर के 70-80 हजार रूपये में मिल जाती है। वर्तमान समय में बासा पैंथर, टीरा मोर्टर्स, कायनेटिक, बजाज, मटेरा आदि कंपनियों द्वारा ई-रिक्शा बनाई और बेची जा रही बताई जाती है। मौखिक सूत्रों का कहना है कि यहीं से बिना नंबरों की ई-रिक्शा को बढ़ावा मिलता है। क्योंकि मौखिक सूत्रों का कहना है कि इन कंपनियों के संचालक अगर बिना नंबरों की ई-रिक्शा न बेचें और पुलिस व ट्रैफिक पुलिस चैकिंग अभियान तेज करें तो बिना नंबर की गाड़ियों का चलन बंद हो सकता है इससे जीएसटी, परिवहन टैक्स लाइसेंस शुल्क आदि 50 हजार के आसपास विभिन्न रूपों में सरकार को मिलने की बात स्पष्ट होती है दूसरी ओर यह भी बताया जा रहा है कि बिना नंबर की ई-रिक्शा पकड़े जाने पर 58सौ रूपये का चालान है। एक चैका देने वाली जानकारी यह भी प्राप्त हुई है कि शहर के घने गली-मोहल्लों में अवैध रूप से कटिया डालकर एक एक घर में दस-दस रिक्शाओं की बैटरी चार्ज की जा रही हैं जिससे स्पष्ट है कि बिजली की चोरी भी खुले आम होने की बात भी सामने आई है कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चर्चाओं में जो खुलकर सामने आया है कि आरटीओ विभाग ट्रैफिक पुलिस और ई-रिक्शा विक्रेंताओं की मिली भगत से सरकार को तो लगभग एक ई-रिक्शा पर अगर ईमानदारी से काम हो तो लगभग 50 हजार रूपये का नुकसान राजस्व का हो ही रहा है शहर के गली मोहल्लों में दौड़ रही बिना नंबर की ई-रिक्शाओं की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। कुछ लोगों ने इन्हें किराये पर चलाने का काम भी 400 रूपये रोज पर कर रखा है।

दैनिक केसर खुशबू टाईम्स से सहभार

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