जिलाधिकारी जी ध्यान दीजिए! कैसे हो रहे हैं फर्जी बैनामे व रजिस्ट्री में स्टाम्प शुल्क की चोरी

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मेरठ 26 सितंबर। दूसरों की जमीनों के फर्जी तरीके से बैनामे कराने से संबंध खबरों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। समय असमय ऐसी खबरें पढने और सुनने को मिलती ही रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा जमीनों की रजिस्ट्री में होने वाले घोटालों को रोकने के लिये काफी प्रयास किये गए है और नियम भी बनाए गए हैं। उसके बाद भी सब रजिस्टार संपत्ति के कार्यालयों में नियमों को तोड़ने का सिलसिला हर मामले में जारी बताया जाता है। और सबसे बड़ा मुद्दा इस संदर्भ में फर्जी बैनामों का सुनने को मिल रहा है।
इसमे कितनी सत्यता है और कौन कौन लोग शामिल है यह तो जांच का विषय है। सब रजिस्टार संपत्तियों के यहां आम आदमी फर्जी बैनामे होने से काफी परेशान नजर आ रहा है। एक समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार लिसाडी गेट थाना क्षेत्र के अंतर्गत मजीद नगर में शमीम नामक महिला द्वारा करीब 12 साल पहले एक जमीन खरीदी गई थी जिस पर छप्पर डालकर वो अपनी बेटी के साथ रह रही थी। भूमाफियाओं की नजर पड़ी और जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैनामा करा लिया। गत शनिवार को महिला के प्लाट पर पहुंचे भूमाफिया और उसके साथियों ने उसका छप्पर व बाउंड्री तोड़ दी। इस प्रकार कच्ची और पक्की कालोनियों में कुछ बिल्डरों द्वारा जमीन बेचकर उसका बैनामा करा दिये जाने के कुछ दिनों बाद दूसरे व्यक्ति को उन्हे वो जमीन बेचे जाने की उड़ती उडती खबरे मिल रही हैं।
जानकारों का कहना है कि जिनकी जमीन फर्जी तरीके से बेच दी जाती है अगर वो दबंग व प्रभावशाली होता है तो बिल्डर कुछ ले देकर फैसला कर लेता है और अगर जमीन मालिक किसी भी रूप से थोड़ा कमजोर नजर आता है तो उसे डरा धमकाकर या कुछ पैसा देकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जाती है।
इस मामले में कुछ बेईमान टाइप के बिल्डरों को जो सबसे बड़ा फायदा होता बताया जाता है वो यह है कि जो भी रजिस्ट्री होती है वो इनके द्वारा घूमा फिराकर सर्किल रेट से कम में या सर्किल रेट में दिखाकर बैनामा कराया जाता है बाकी पैसा दो नंबर में ले लिया जाता है। जब कोई विवाद फंसता है तो अगर पूरा पैसा देना पड़े तो सर्किल रेट का जो होता है वो वापस ही दिया जाता है बाकी का कोई हिसाब नहीं होता इसलिये वो दबा लिया बताया जाता है। मौखिक चर्चा तो यह भी है कि महंगी जमीन वाले क्षेत्रों की जमीनों की रजिस्ट्रियां भी किसी ओर स्थान जहां जमीने सस्ती होती है दिखाकर स्टाम्प शुल्क बचाने के लिये विभागीय लोगों से मिलकर रजिस्ट्री कराए जाने की खबर है।
अगर इस संदर्भ में सुनने और पढ़ने को मिलने वाली खबरें सही हैं तो यह आम आदमी के साथ तो धोखा और बेइमानी है ही सरकार को भी भारी स्टाम्प शुल्क की चोरी और उसके द्वारा निर्धारित नियमों का खुला उल्लंघन कहा जा सकता है। जिलाधिकारी जी खबर के संदर्भ में सूत्रों से मिल रही जानकारी काफी
संवदेनशील है। जनहित में और सरकार के नियमों का पालन कराने और पूरा स्टाम्प शुल्क वसूलने तथा कोई भी किसी की भी संपत्ति की गलत रजिस्ट्री न करा पाए इसके लिये जांच कराकर बिंदु अगर सही हैं तो कार्रवाई अवश्य की जाए।
संवाद सूत्रों के आधर पर

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