पीएम के कालेधन का उपयोग रोकने का निर्णय कंपनी एक्ट में बदलाव के बिना कैसे हो लागू, चर्चा है तुलसी नर्सिंग होम प्रकरण में करोड़ों की अनियमिता, स्टांप और इनकम टैक्स की चोरी का मामला भी हो सकता है

0
137

2014 में पूर्ण बहुमत से भाजपा और सहयोगी दलों की बनी सरकार के प्रधानमंत्री की शपथ लेने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए काले धन का उपयोग रोकने हेतु जो घोषणा की गई थी उसको लागू करने के लिए 8 नवंबर 2016 को सर्वप्रथम नोटबंदी का सख्त निर्णय लिया गया। जिसकी आलोचना भी हुई लेकिन अपनी बात पर अटल पीएम इस निर्णय पर कायम रहे उसके बाद ही काले धन के प्रचलन को रोकने हेतु कितने ही सकारात्मक निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिए गए और उन पर काम भी किया जा रहा है।

कंपनी एक्ट की आड़ में कालेधन का उपयोग
लेकिन देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का कालेधन के उपयोग की समाप्ति का फैसला मुझे लगता है कि जब तक कंपनी एक्ट में बदलाव नहीं किए जाएंगे तब तक लागू होने वाला नहीं है। जहां तक पता चलता है और खबरें सुनने को मिलती है वहां तक कंपनी एक्ट की आड़ में देश में अरबो रूपये के कालेधन का लेनदेन होने की जो बात चर्चाओं में सुनने को मिलती है वो लगता है कि पूर्ण रूप से सही है। इस संदर्भ में यूपी के मेरठ के गढ़ रोड स्थित सम्राट कालोनी के तुलसी नर्सिंग होम को इसके प्रमाण के रूप में देखा जा सकता है। मौखिक सूत्र बताते हैं कि किसी डॉक्टर बंसल द्वारा पूर्ण रूप से अवैध और मानचित्र तथा यूपी सरकार की निर्माण नीति के विपरित इस नर्सिंग होम का निर्माण कराया गया और फिर कंपनी बनाकर इसका संचालन भी शुरू किया गया।

तुलसी नर्सिंग होम का संचालन
इस बात में कितनी सत्यता है कि तुलसी नर्सिंग होम का संचालन अब डॉक्टर बंसल के द्वारा पिछले लगभग 20 वर्षों में तमाम अवैध रूप से काटी गई कालोनियों और उनमें सरकार को मिलने वाले राजस्व ना देने वाले किसी इंद्र गर्ग नामक व्यक्ति द्वारा यह नर्सिंग होम हैंडओवर कर लिया गया बताते हैं कि इसमें उच्च स्तर पर कालेधन का लेनदेन हुआ लगता है वरना एक दम ज्यादातर पार्टनर या डायेक्टर नहीं बदले जाते। ऐसा यह अकेला मामला नहीं है। देशभर में कंपनी एक्ट की आड़ में खरबों रूपये के काले धन का लेनदेन हो रहा बताते है।

पहले कंपनी दिवालिया घोषित हो
आदरणीय प्रधानमंत्री जी अगर सरकार वाकई में कालाधन का उपयोग रोकना चाहती है तो जितनी खबरें पढ़ने सुनने को इस संदर्भ में मिलती है उनके अनुसार मेरा मानना है कि अगर कोई कंपनी घाटे में जाती है तो सीधे पुराने निदेशकों की जगह नए निदेशकों की नियुक्ति कर उनके हवाले नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इस प्रकरण में ही कालेधन का लेनदेन होता है। जानकारों का कहना है कि अगर स्थिति है तो पहले कंपनी दिवालिया घोषित हो फिर बंद की जाए और फिर उसका ऑक्शन हो जिससे जो संपत्ति कंपनी के तहत हस्तातंरण हो रही है उससे करोड़ों रूपये का स्टांप शुल्क मिल सके तथा लेनदेन में जो पैसे का इस्तेमाल हुआ उस पर जो आयकर मिलना चाहिए वो मिले और कालेधन का उपयोग बंद तथा आर्थिक अपराधियों पर भी अंकुश लग सके।

अफसर, पीएम, वित्तमंत्री को दू सूचना
वरना मुझे तो लगता नहीं है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो प्रधानमंत्री जी भावनाओं और कार्यनीतियों के तहत कालेधन का प्रचलन बंद हो सकता है। अब सवाल उठता है कि सरकार को कैसे पता चले कि कौन सी कंपनी स्थानातंरित हो गई और किसके डायरेक्टर बदल गए तो इसमें तो यही ंकहा जा सकता है कि कंपनी एक्ट से संबंध अफसर सर्वप्रथम रिजर्व बैंक और वित्त मंत्री तथा प्रदेश की सरकारों को सूचित करें। और उससे भी पहले ऐसे मामले संज्ञान में आने पर मंडलों में नियुक्त आयकर विभाग के अफसर कमिश्नर जिलाधिकारी एडीएम वित्त और अन्य वित्त विभाग से संबंध अफसरों को ऐसी कोई भी सूचना मिलते ही उसकी खबर पीएम कार्यालाय और केंद्रीय वित्त मंत्री के कार्यलय, सीएम और वित्त सचिवों के कार्यालयों को देनी चाहिए जिससे हरदिल अजीज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कालेधन के उपयोग पर रोक लगाने के निर्णय और भावनाओं पर काम हो सके।

– रवि कुमार बिश्नोई

संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here