अवैध निर्माणों पर कमिश्नर की सख्ती का असर : कुछ बड़े व्यापारी व राजनेताओं के निर्माणों की जांच शुरू होने की चर्चाएं

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न्यूमोहनपुरी नाले पर सरकार के सभी नियमों को तोड़कर बनाए गए यह अवैध काॅम्पलैक्स और इसमे बनी यह
दुकानें भी किसी व्यापारी नेता की या उसकी शह पर बनी ही बताई जाती है। एमडीए के अधिकारी भी इसे बचाने के प्रयास में लगे हुए हैं। इसलिये कभी कह देते हैं की यह कंपाउंड हो गया कभी कहते हैं कार्रवाई चल रही है लेकिन केाई ठोस कदम पिछले काफी समय में अधिकारियों द्वारा अभी तक नहीं शायद अभी तक नहीं उठाया गया।

मेरठ 7 सितंबर। वैसे तो देश की राजधानी दिल्ली से लेकर कई प्रदेशों में अवैध निर्माणों का मुददा लगभग रोज ही सुर्खियों में बना रहता है। कभी इनके खिलाफ खबर छपती है तो कभी सरकार द्वारा इस संदर्भ में बनाए गए नियमों की चर्चा होती है तो कभी इनके तोड़फोड़ के समाचार प्रकाशित होते हैं। अपने शहर में जब जिलाधिकारी के रूप में संजय अग्रवाल यहां कार्यरत थे तो कुछ बड़े अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया था। उसके बाद से जब से डा. प्रभात कुमार मेरठ मंडलायुक्त बने तब से उनके द्वारा अवैध निर्माणों के प्रति सख्त रूख अपनाया गया और कुछ संबंधित विभागों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सुगबुगाहट शुरू हुई तो अवैध निर्माणकर्ताओं की नींदे उड़ गई हंैं। कमिश्नर के रूप में डा. प्रभात कुमार की तैनाती के बाद कितने ही निर्माणों में सील लगी तो कई पर बुल्डोजर का प्रहार भी किया गया और कुछ के विरूद्ध कार्रवाई चल भी रही है।
लेकिन मौखिक चर्चित सूत्रों के अनुसार जब से एक प्रातः कालीन समाचार पत्र के पांच सितंबर के अंक में व्यापारी नेता समाजसेवी विपुल सिंघल के गढ़ रोड स्थित होटल सेवन इलेविन के अवैध निर्माण की सूचीमें शामिल होने की खबर छपी तो जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो रही थी उनमे हलचल उत्पन्न हुई तो कुछ अन्य लोगों को अलर्ट होने का मौका मिल गया। परिणाम स्वरूप आज मंडलायुक्त कार्यालय मेरठ विकास प्राधिकरण और कचहरी कंपाउंड में कितने ही लोगों को यह कहते सुना गया कि अब बागपत रोड दिल्ली रोड के मोहक्कमपुर क्षेत्र, रूड़की रोड व परतापुर बाइपास आदि पर कई बडे राजनेता व व्ययापारी नेताओं द्वारा भी भव्य कालोनियां काटी गई। और किसी अवैध निर्माण विकास तथा इनके निर्माण या तो बिना मानचित्र के कर लिया गया या फिर नकशे के विपरीत।
इसमे कितनी सत्यता है यह तो नहीं कहा जा सकता। लेकिन कुछ लोगों को मौखिक रूप से यह चर्चा करते हुए जरूर सुना गया कि कितने ही बडे नेताओं ने जो कालोनियों को काटा है उनमे नाली रास्तों की जो जमीन दबाई ही गई है वो कई करोड़ों की हो सकती है। तथा इनमे निर्माण भी ज्यादातर प्रदेश सरकार की निर्माण नीति के विपरीत हुआ और हो रहा है।
एक व्यक्ति तो आज कई उन व्यापारी नेताओं का नाम लेकर जो आजकल अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का जगह जगह विरोध कर रहे हैं पिछले एक दो दिन में इसके कहे अनुसार कुछ लोग वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात भी कर चुके हैं। जिनसे मुलाकात हुई उनमे कमिश्नर मेरठ, एमडीए वीसी का नाम भी लिया जा रहा है। दूसरी ओर शास्त्री नगर क्षेत्र में चाणक्यपुरी आदि में भी कुछ व्यापारी नेताओं द्वारा अवैध निर्माण सरकारी जमीन घेरकर किये जाने की चर्चा सुनने को मिल रही है। खबर क्योंकि अधिकारिक रूप में प्राप्त नहीं हो सकी थी इसलिये हम किसी का नाम तो प्रकाशित नहीं कर रहे हैं। बताते हैं कि उच्च स्तर पर गोपनीय रूप से कुछ बड़े राजनीतिक व व्यापारी नेताओं व उनसे संबंधित व्यक्तियों द्वारा किये गए निर्माणों, काटी गई कच्ची कालोनियां, नाली बटियां घेरे जाने से ंसंबंध जांच कराए जानेकी खबर है। दूसरी ओर होटल सेवन इलेविन की जांच तो शुरू हो चुकी बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि देर सवेर अगर कोई दोषी है तो वो भी नहीं बचेगा। मेरठ मंडलायुक्त डा प्रभात कुमार व एमडीए वीसी सीताराम यादव और सचिव राज कुमार से इस संदर्भ में अधिकारिक रूप में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसलिये सही तथ्य क्या है और क्या नहीं इसका खुलासा नहीं हो पाया। – संवाद सूत्रों पर आधारित दैनिक केसर खुशबू से सहभार

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