बदरअली का अस्पताल किया धराशाही अच्छा है, अवैध निर्माण के लिए दोषीयों के खिलाफ कार्यवाही क्यो नही

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कमिश्नर और डीएम दे ध्यान, रोड बांइडिग की भूमि और नाले नालियां घेरकर बनाई जा रही है ईमारते

मेरठ 10 जुलाई। पिछले 5 साल में चर्चाओं में आये ओर फिर शहर की गतिविधियों में मुख्य भुमिका निभाने लगे बदर अली के निर्माणधीन अस्पताल को एमडीए के दस्ते द्वारा जमींदोज कर दिया गया। लेकिन अगर मौब लांचिग प्रकरण को लेकर विवादित बदर अली ना हुआ होता तो निर्माणधीन चैरिटेबल अस्पताल बनकर तैयार हो ही जाता। सवाल यह उठता है की 2017 में एमडीए के अफसरों द्वारा इस निर्माण के विरूद्ध एक नोटिस दिया गया था जो इस बात का प्रतीक है की अधिकारियो को इस अवैध रूप से बन रहे हाॅस्पिटल के बारे में पूर्ण जानकारी तो जो एमडीए के तमाम अफसर अवैध निर्माणों के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्यवाही करने के दावे हमेशा करते रहे है। तो फिर दो साल से यह अवैध निर्माण कैसे चलता रहा। तो इस संदर्भ में यही कहा जा सकता है की बिजली बम्बा क्षेत्र के फतेहउल्लापुर रोड पर बन रहे। इस अस्पताल के अवैध निर्माण को एमडीए के अधिकारियों का पूरा समर्थन प्राप्त था। वरना बेसमेंट और अन्य निर्माण कोई एक घंटे में नही हो गया। मोबलांचिग के बाद विवादित झुलूस से जो स्थिति उत्पन्न हुई उससे नाराज पुलिस ओर प्रसाशन के अधिकारियों ने जब सख्त रूख अपनाया तो एमडीए के अफसर भी वावाही लूटने का कोई मौका नही चूक रहे है। जबकि सही तो यह है की इनकी करनी और कथनी में तो फर्क है की वीसी साहब भी अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही के मामले मंे सिर्फ दावे ही करते नजर आ रहे है क्योकि शहरी क्षेत्र के साथ साथ बाहरी इलाकों में अवैध निर्माणों की बाड़ आयी हुई है ओर अफसरों को पता है की रोड बाइंडिग हरित पट्टी और सरकारी भूमि तथा नाली नाले घेरकर बिना मानचित्र के निर्माण किये जा रहे है और उनकी खबरे भी आये दिन समाचार पत्रों में खुब छप रही है। मगर कार्यवाही कोई नही हो रही। हां मानचित्र पास कराकर निर्माण करने वालों को परेशान करने का कोई मौका एमडीए के अवैध निर्माण रोकने से सबंध अधिकारी नही छोड़ रहे है। आज नागरिकों में यह चर्चा जोरो पर थी की बदर अली का अवैध निर्माण तुड़वाया अच्छा है। लेकिन पिछले 2.5 साल में इस जोन मंे प्रभारी और जो अन्य अधिकारी रहे उनके खिलाफ आखिर कोई कार्यवाही उपाध्यक्ष मेरठ विकास प्राधिकरण व अन्य अधिकारी क्यो नही कर रहे। कुछ लोगो का यह भी कहना था की अगर सर्वे कराया जाये तो प्राधिकरण की सीमा में कई दर्जन अवैध रूप से कट रही कच्ची काॅलोनियां और कई सौ अवैध निर्माण जिनका मानचित्र ही पास नही है तथा रोड बाईडिंग और हरित पट्टी की भूमि में हो रहे खुलकर सामने आ सकते है। और यह सब इन्हे रोकने के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण के अफसरों की मिली भगत से ही हो रहे है। और मजे की बात यह है की उच्च अधिकारियों को गुमराह करने के लिए जिन कुछ निर्माणों के खिलाफ इनके द्वारा कार्यवाही की जाती है वो भी बाद को इनकी ही मिलीभगत से बनकर तैयार हो जाते है। इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में अधिकारी जीमखाना मैदान के सामने निर्मित हुए साड़ी शोरूम पुष्पदीप, गढ़ रोड पर होटल सम्राट के पीछे एलजी के शोरूम के बराबर हुए निर्माण तथा मोहनपुरी पर नाले वाली सड़क पर बने बहुमंजिले फ्लैटों, आदर्शनगर नाले पर हो रहे भव्य निर्माण और शिवाजी रोड पर अवैध रूप से बन रहे और नर्सिग होम को देखा जा सकता है। इन निर्माणों के बारें में अफसरों को पूरी तौर पर जानकारी बतायी जाती है लेकिन सूत्रों का कहना है की सिर्फ कागजी खानापूर्ति के च्रकव्यूह मे फंसा कर अधिकारी अवैध निर्माण कराने में अपनी भूमिका निभा रहे है। और अपना बैंक बैलेस बढ़ाने में लगे है और अगर ऐसा नही है तो आखिर वो कौनसे कारण है जो पूरीतौर पर नियम विरूद्ध हो रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही इनके द्वारा नही की जा रही। – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स

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