जेलों में सुधार धरातल पर दिखायी दे नशीले पदार्थो की ब्रिकी और यौन शोषण ना हो पाये

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भारतीय जेलों में सुधार के बड़े बड़े इंतजाम किये जाने के दावें जिम्मेदार कर रहे है लेकिन दिल्ली की जेल में हो रहे कारनामो का जो चित्रण पिछले कुछ दिनों से सुनने को मिल रहा है और उन्हे लेकर हटाये गये वरिष्ठ अधिकारी से यह तय हो गया है की कही ना कही तो कुछ है जो सही नही है
दूसरी तरफ आजकल जो वेबसीरज दिखायी जा रही है उनमें बच्चो के लिए बने सुधार ग्रहों में जो कारनामे होते दिखाये जा रहे है उनको देखकर आम आदमी की रूह कापने लगती है मेरा मानना है की बच्चा जेलो में किसी भी प्रकार की गुंडई करके आये नाबालिकों को सीधे और शरीफ बच्चे जो किसी कारण से जो यहां आते है उनसे बिल्कुल अलग रखने की व्यवस्था हो इसी प्रकार से बड़ी जेलों में अलग अलग अपराधों के हिसाब से अपराधियो की मनोदशा और चरित्र को ध्यान में रखते हुए आने वाले कैदियो का वर्गीकरण कर उन्हे अलग रखा जाये और शातिर अपराधी उन तक ना पहुंच पाये इसकी मजबूत व्यवस्था करने के साथ साथ हर बैरेक आदि में सीसीटीवी कैमरे फिट हो जो नियमित रूप से चलते रहे और बदनाम टाईप के जेल कर्मियों पर भी निगाह रखी जाये ओर इनका स्थानानंतरण हर साल किया जाये जिससे यह मंठाधीश बनकर खुंखार कैदियो से साठगांठकर वहां गुंडाराज कायम ना होने दें।
क्योकि फिल्मों में नशीले पदार्थो की ब्रिकी तथा नामचीन कैदियों द्वारा अन्यो का जो यौन शोषण दिखाया जा रहा है वो सही नही है इस लिए दावे और घोषणाओ की बजाय जमीनी सच्चाई को ध्यान रखकर व्यवस्थाएं की जाये।

– रवि कुमार बिश्नोई

संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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