डीएम की मिटिंग में तय हो जाने के बाद भी एसपी ट्रैफिक द्वारा कांवड़ मेले पर पास विभाग सूचना विभाग को क्या उपलब्ध नही कराये गये?

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मेरठ 22 जुलाई। कांवड़ मेला शिवरात्रि पर शांति से सम्पन्न हो गया लेकिन वाहन पासों के वितरण में लापरवाही की चर्चा इस दौरान कई मौको पर सुनने को मिली लोगो का कहना था की ना तो पास छपावाने और ना ही वितरण की कोई नीति बनायी गयी होगी तो उसमें मनमानी की शहर छोटी से छोटी बात में जनसहयोग की आकांशा रखने वाले यातायात के अधिकारियों ने इस संदर्भ में प्रमुख नागरिकों या जनप्रतिनिधियों से कोई विचार विमर्श या चर्चा करने की जरूरत महसूस नही की।
खैर जो भी हो एक बात सोचने की है की पिछले वर्ष कांवड़ मेले के दौरान जब जिला स्तरीय अस्थायी समिति की बैठक उस समय के डीएम श्री जगत राज त्रिपाठी की अध्यक्षता व पुलिस अधिकारियो की मौजुदगी में हुई थी जिसमें ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के अतिरिक्त उस समय के सूचना उपनिदेशक श्री नवलकांत तिवारी व सूचना अधिकारी आशुतोष चंदौला भी समिति के सदस्यों के साथ मौजूद थे मै यह मुद्दा उठाता की कांवड़ मेले के दौरान पत्रकारों के वाहन पास सूचना विभाग के माध्यम से दिये जाये क्योकि उन्हे पता होता है की मीडिया जगत में सक्रिय किसकों कितने पास दिये जाने आवश्यक है। जिस पर डीएम सहित सूचना विभाग और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने पूर्ण सहमति जताते हुए कहा था की अगले वर्ष सूचना उपनिदेशक से लेटर लिखकर पूछ लिया जायेगा की कितने पास चाहिए या उन्हे पास भेज दिये जायेगे ओर दुबारा जरूरत पड़ेगी तो और दे दिये जायेगे और पत्रकारों को वाहन पासों का वितरण कांवड़ मेले के दौरान भी अन्य अवसरो की भांति उपनिदेशक सूचना या सूचना अधिकारी के माध्यम से किये जायेगे उक्त व्यवस्था को वर्तमान एसपी ट्रैफिक ने लागू क्यो नही किया या सूचना के अधिकारियों से सम्पर्क कर पत्रकारों को वाहन पास के संदर्भ में चर्चा क्यो नही की यह विषय भी सोचनीय है। जबकि सरकार से मान्यता प्राप्त कई पत्रकारों का कहना था की उन्हे एक पास भी नही दिया गया। पत्रकारों के नाम इस बार खूब पास बांटे गये बताये जा रहे है। चर्चा है की बांटे गये पासों की संख्या चार हजार केलगभग थी अगर यह सही है तो फिर प्रतिबंद्ध की आवश्यकता कहां थी। संवाद सूत्र 

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