बुध पुर्णिमा पर नजर नहीं आएगा साल का पहला चंद्र ग्रहण

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मेरठ 15 मई (प्र)। हिंदू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। वैशाख महीने में पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था, इसलिए इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। 16 मई को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी। भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के चैप्टर चेयरमैन ज्योतिषाचार्य आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि यह स्नान-दान की पूर्णिमा भी रहेगी। सनातन धर्मावलंबी दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा करेंगे, वहीं बौद्ध विहारों में तथागत भगवान बुद्ध की वंदना की जाएगी। इस दिन की गई पूजा और खरीदारी शुभ और समृद्धिदायी रहेगी।

उन्होंने बताया कि वैशाख पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्रग्रहण होगा, जोकि भारत में नहीं दिखेगा। हालांकि ये भी सिर्फ खगोलीय नजरिये से खास रहेगा। धार्मिक रूप से इसका महत्व नहीं होने से इसका अशुभ असर नहीं पड़ेगा। ये ही वजह है कि इसका सूतक काल भी देश में नहीं माना जाएगा और पूर्णिमा पर होने वाले धार्मिक काम करने में किसी भी तरह का दोष नहीं लगेगा। सुबह 6.16 बजे तक वरियान योग रहेगा, इसके बाद 16 मई की सुबह से दोपहर करीब 2.30 बजे तक अगले दिन परिघा योग भी रहेगा।

साल का पहला चंद्रग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में भी दिखाई देगा। भारत में यह चंद्रग्रहण नजर नहीं आएगा, जिसके कारण देश में सूतककाल मान्य नहीं होगा।
बुद्ध पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों और पवित्र सरोवरों में स्नान के बाद दान-पुण्य करना पुण्यकारी होता है। भगवान बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। उन्हें हरि विष्णु का अंशावतार भी माना जाता है।

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