महेश नवमी के अवसर पर झारखंडी मंदिर में महेश्वरी समाज ने किया महारूद्राभिषेक

0
104

मेरठ 11 जून। महेश नवमी के शुभ अवसर पर आज प्रातः 7 बजें नगर निगम स्थित झारखंडी महादेव मंदिर में महेश्वरी समाज के लोगो द्वारा महारूद्राभिषेक किया गया महेश्वरी मित्र मंडल के अध्यक्ष पंकज महेश्वरी के अनुसार माहेश्वरी हिंदू धर्म से जुड़े हैं और भगवान महेश (शंकर) के अनुयायी हैं। इन्हें कभी-कभी मारवाड़ी अथवा राजस्थानी भी लिखा जाता है।.
मान्यता के अनुसार इनकी उत्पत्ति (वंश) भगवान महेश के कृपा-आशीर्वाद से ही हुई है इसलिए श्री महेश परिवार (भगवान महेश, माता पार्वती एवं श्री गणेश) को माहेश्वरियों का कुलदेवता माना जाता है। भारत की आजादी की लड़ाई में और भारत की आर्थिक प्रगति में माहेश्वरियों का बहुत बड़ा योगदान है। माहेश्वरी मित्र मंडल के अध्यक्ष पंकज माहेश्वरी ने बताया कि जन्म-मरण विहीन एक ईश्वर (महेश) में आस्था और मानव मात्र के कल्याण की कामना माहेश्वरी धर्म के प्रमुख सिद्धान्त हैं। माहेश्वरी समाज सत्य, प्रेम और न्याय के पथ पर चलता है।
उनके अनुसार शरीर को स्वस्थ, निरोगी रखना, कर्म करना, बांटकर खाना और प्रभु की भक्ति (नाम जाप एवं योग साधना) करना इसके आधार हैं। माहेश्वरी अपने धर्माचरण का पूरी निष्ठा के साथ पालन करते हैं तथा वह जिस स्थान, देश और प्रदेश में रहते हैं वहां की स्थानीय संस्कृति का पूरा आदर-सम्मान करते हैं।
आज दुनियाभर के कई देशों में और भारत के हर राज्य, शहर में माहेश्वरी बसे हुए हैं और अपने अच्छे व्यवहार के लिए पहचाने जाते हैं।
ई.स. पूर्व 3133 में जब भगवान महेश और देवी माहेश्वरी (माता पार्वती) के कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी तब भगवान महेश ने महर्षि पराशर, सारस्वत, ग्वाला, गौतम, श्रृंगी, दाधीच इन छरू ऋषियों को माहेश्वरियों का गुरु बनाया और उन पर इनको मार्गदर्शित करने का दायित्व सौंपा।
कालांतर में इन गुरुओं ने ऋषि भारद्वाज को भी माहेश्वरी गुरु पद प्रदान किया जिससे माहेश्वरी गुरुओं की संख्या सात हो गई जिन्हे माहेश्वरियों में सप्तर्षि कहा जाता है।

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

3 × one =