यह कैसा स्वच्छता पखवाड़ा? कूड़ा उठवाने में भी सफल नहीं हो रहे महापौर

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मेरठ 15 सितंबर। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा आज कानपुर के ईश्वरी गंज से प्रधानमंत्री श्री नरंेंद्र मोदी के द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता एवं सेवा पखवाड़े की शुरूआत की गई। यह अभियान अगर देखे तो आम आदमी को जीवन देने में सक्षम है। लेकिन विज्ञापनांें और बयानों तक कुछ शहरों में इसके सिमट कर रह जाने से माननीय प्रधानमंत्री द्वारा जिस भावना को दृष्टिगत रख यह महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू की गई मगर उनकी पार्टी से मेयर या अन्य स्थानीय निकायों के पदाधिकारी जिन शहरों व महानगरों व कस्बो में है वहां भी इस अभियान की स्थिति कोई सफल नहीं बताई जाती। इसके उदाहरण के रूप में देश के स्वतंत्रता संग्राम व धार्मिक दृष्टिकोण की पृष्ठभूमि से जुड़े एतिहासिक अपने शहर को देखा जा सकता है।

यहां भाजपा के मेयर हरिकांत अहलुवालिया ने अपने चुनाव से पूर्व इस महानगर को चंडीगढ़ की तर्ज पर विकास कराने का वादा किया लेकिन वह इससे पुराने हाल में भी संभाल पाने में सक्षम नहीं हो सके। और प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को किस प्रकार से यहां पर लागू किया जा रहा है इसका उदाहरण तो चित्र में बेगमपुल से कचहरी जाने वाले आदर्श नगर के नाले के बाहर पड़े कूड़े के इस पहाड़ और मेघदूत पुलिया से मोहनपुरी जाने वाले मोढ़ नाले के किनारे पड़े इस कूड़े के ढेर जिससे उत्पन्न बदबू से प्रदूषित हो रहे माहौल तथा कूड़ा सूख जाने से उड़ने वाली धूल से बचने के लिये राहगीर या तो सांस रोककर या रूमाल रखकर यहां से गुजरने पर मजबूर है। ऐसा नजारा शहर में अनेक स्थानों पर देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना था कि यह कैसा स्वच्छता अभियान है जिसके चलते पहले ही दिन कई दिनों से निकला नालों का कूड़ा सड़को पर सड रहा है और सूखकर नालो में पहुंच रहा है लेकिन इसे उठवाने की व्यवस्था आज भी महापौर व्यवस्था नहीं कर पाए।

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