मेरठ क्लब के चुनाव और सिविल सदस्यों में से चुने गये पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर जांच शुरू

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मेरठ 13 सितंबर। मवाना रोड स्थित रक्षापुरम में आसीन मेरठ क्लब के सचिव को 15 दिन के अंदर यह अवगत कराने के निदे्रश डिप्टी रजिस्ट्रार चिट फंड सोसाईटी द्वारा दिये गये है की संस्था की प्रबंध समिति का पिछला निवाचन किस दिनांक और वर्ष में सम्पन्न कराया गया था। अगला निर्वाचन कब तय है संस्था की प्रबध समिति का कार्यकाल कितने वर्ष का है उक्त सभी सूचनाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराये।

मौखिक चर्चा अनुसार उच्च पदाधिकारियों को गुमराह कर नियम विरूद्ध तथा पूर्व अध्यक्ष द्वारा स्पष्ट रूप से पारदर्शी वातावरण में चुनाव सम्पन्न कराने के दिये गये आदेश के बावजूद योजना बंद तरिकें से सदस्यों को अवगत कराये बिना अथवा जनरल हाउस की बैठक में रखे बिना गुपचुप रूप से कुछ पदाधिकारी नियुक्त कर लिये गये।

इसमें कितनी सत्यता है यह तो एक अलग बात है लेकिन क्लब में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का जो निमंत्रण पत्र सदस्यों को भेजा जाता है उसमें सरकारी अधिकारी जिन पदों पर है उनके तो पुरे नाम लिखे जाते है लेकिन कार्यकारणी सदस्य में सिर्फ एक सदस्य का नाम छापा जाता है। इस ओर इशारा करता है की कही ना कही सरकारी जमीन पर बने इस क्लब पर शायद कब्जा करने की मंशा से गुप चुप तरिके से यह सब किया जा रहा है।

सही गलत क्या है यह तो जांच का विषय है लेकिन यह चर्चा विश्वनीय व मौखिक सूत्रों व क्लब के सदस्यों से आये दिन सुनी जाती है की श्री एमएस जैन द्वारा मन मर्जी चला कर चुनाव की खानापूर्ति की गयी है और अधिकारियों को भी गुमराह किया गया क्योकि उनके द्वारा स्पष्ट रूप से नियमनुसार चुनाव कराने के निद्रेश शायद दिये गये थे लेकिन ऐसा क्या हुआ की एमएस जैन ने चुपचाप पदाधिकारी चुन लिये जिसका पता तब चला जब मेरठ क्लब के किसी कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र उन्हे मिला।

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