मेरठ कालेज का स्वर्ण जयंती समारोह, न्यायालय भी जा सकते हैं कुछ सदस्य, फोटो के चक्कर में कुलपति का प्रोटोकोल भी भूल गए आयोजक सदस्यों को आयोजन से अलग क्यों रखा गया?

0
380

राम कुमार गुप्ता व अरविंद नाथ सेठ द्वारा इस बात को लेकर जारी है चर्चा

मेरठ कालेज के स्वर्ण जयंती समारोह में बिहार के राज्यपाल तथा मेरठ कालेज छात्र संघ के पहले अध्यक्ष डा. सत्यपाल मलिक का सम्मान किया गया। अपने आप में यह एक बडी अच्छी बात और शुरूआत कहीं जा सकती है जिस कालेज में आप छात्र रहे वहां आपका सम्मान हो और वो भी ऐसे माहौल में जिसमे आपके तमाम साथी और बाद के छात्र संघ अध्यक्ष तथा शहर के गणमान्य नागरिक और वो भी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद हो।
लेकिन कालेज के कुछ सदस्यों के अनुसार अनेकों मामलों में विवादित पैसों के दम पर कालेज की प्रबंध कार्यकारिणी के चुनाव के लिये बनाए गए सदस्यों के दम पर पदाधिकारी बन बैठे आयोजकों द्वारा मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल को सम्मानित करने के लिये मैनेजमेंट कमेटी द्वारा बनवाई गई विशाल माला में विशिष्ट अतिथि चैधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति एनके तनेजा को छोड़कर आयोजक खुद घुस कर खडे हो गए और कुलपति के प्रोटोकाॅल को भी भूल गए।
आज शहर में फैले मेरठ कालेज के सदस्यों में चर्चा थी कि आखिर मैनेजमेंट कमेटी ने कालेज के स्वर्ण जयंती समारोह के आयोजन में सदस्यों को आमंत्रित क्यों नहीं किया। जो लोग पदाधिकारी बन बैठे हैं कालेज उनके घर की समंपत्ति तो नहंी पर गलत काम करने वाले पदाधिकारियों को भी मंच पर विराजमान होने से उन्हे रोक पाना तो फिलहाल संभव नहीं हैं। मगर वो इतने महत्वपूर्ण मौके पर सभी सदस्यों को नजर अंदाज करने की कैसे सोच बैठे?
जबकि अभी कुछ वोटों की गिनती करने के लिए डिप्टी रजिस्टार चीट फंड सोसायटी को निर्देश दिए गए हैं। कुछ सदस्यों का मौखिक रूप से का यह भी कहना था कि मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष राम कुमार गुप्ता सचिव अरविंद नाथ सेठ इस आयोजन पर जो खर्च का पूरे विवरण के सदस्यों को अवगत कराए। और आयोजन पर खर्च हुआ वो पैसा अपनी जेब से लगाए क्योंकि एक प्रकार से उन्होंने अपने घर का आयेाजन सदस्यों को आमंत्रित न कर बना दिया।
अब इसमे कितनी सच्चाई है कितनी नहीं यह ता मैं नहीं कह सकता मगर मौखिक रूप से यह चर्चा आम है कि अगर पूर्व में मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष राम कुमार गुप्ता की फैक्ट्री में लगी आग और सेकेटरी अरविंद नाथ सेठ द्वारा बागपत अडडे पर बनाए गए माॅल की कमिश्नर जांच कराए तो अवैध निर्माण और मानचित्र के विपरीत निर्माण से मिलने वाले कंपाउंड शुल्क के रूप में करोड़ों रूपये की वसूली हो सकती है। जो सेठ अरविंदनाथ द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबवा दिया गया है।
कुछ लोगों का मौखिक रूप से यह भी कहना था कि सही में तो किस भी नियम विरूद्ध कार्य करने वाले व्यक्ति को ऐसे सार्वजनिक पद पर विराजमान होने का अधिकार नहीं होना चाहिये। मगर यहां तो क्रिकेट का मैच होगा तो पूरी तौर पर मंच हो यह लोग होंगे ऐसे ही मामलों के चलते सदस्यों के अनुसार इनके कई कार्य जो नियम विरूद्ध कहे जा सकते हैं वो दबकर रह जाते हैं क्योंकि ऐसे लोग हर जगह अपने पैसे के दम पर संस्था में बनाए गए सदस्यों के दम पर अग्रणी भूमिका में अपने आप को प्रस्तुत करने का कोई मौका नहीं चूकते।
एक सदस्य का मौखिक रूप से यह भी कहना था कि सेठ अरविंद नाथ आदि अपने सहयोगी पदाधिकारियों व सदस्यों को नजर अंदाज करने का भी कोई मौका नहीं चूकते तो एक का कहना था कि वो वकील से राय लेकर इनके खिलाफ कोर्ट जाने की सोच रहे हैं क्योंकि सार्वजनिक पदों पर छोटा बड़े या छोटे व्यक्तियों को विराजमान नहीं होने दिया जाना चाहियें।
बताते चले कि पूर्व में छात्रों द्वारा भी मौखिक रूप से कई मौकों पर इन पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जाते रहे। संवाद व मौखिक सूत्रों से प्राप्त हुई जानकारी और उनके कथन को यहां प्रकाशित करने के माध्यम से किसी को अपमानित करने का कोई इरादा नहीं मगर कालेज के सदस्यों को आयोजकों द्वारा नजर अंदाज किया जाना बिल्कुल ठीक नहीं था इस बात को दृष्टिगत रखकर उनकी बात से आम जनता को अवगत कराने का यह प्रयास किया जा रहा हैं।
संवाद व मौखिक सूत्रों पर आधारित

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

19 − 18 =