बागियों के निष्कासन पत्र पर सवाल, करुणेश महानगर अध्यक्ष हैं या जिलाध्यक्ष, स्पष्ट नहीं?

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मेरठ। भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पार्षद प्रत्याशियों को बाहर करने का फैसला महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग को भारी पड़ता जान पड़ रहा है। बागी कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत से इस बार चुनाव लड़कर भाजपा के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दी है, इस माहौल को देखते हुए भाजपाइयों के मन में चुनाव को लेकर कहीं न कहीं संशय तो है। ई-रेडियो से बातचीत में बागी प्रत्याशियों ने रिश्वत लेकर पार्षद का टिकट बांटने का आरोप लगाया था। जमीनी कार्यकर्ताओं को नहीं बल्कि ‘हवाई’ कार्यकर्ताओं को टिकट देने का आरोप लगाया है।

चुनाव के दिन ही शाम को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग ने उक्त सभी बागी कार्यकर्ताओं को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। लेकिन इस निष्कासन पर सवालिया निशान लगना शुरू हो गया है।

इस्तीफा दे चुके तो निष्कासन का क्या मतलब: बबिता
वार्ड 26 से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली बबिता गुप्ता का आरोप है कि महानगर अध्यक्ष को पहले ही इस्तीफा दे चुकी हूं लेकिन अब उन्होंने खुद को हारता देखा तो पार्टी से निष्कासन का ड्रामा रच डाला, यह निष्कासन पूर्णरूप से बेबुनियाद और मेरे निजी प्रतिष्ठा पर चोट करने वाला है।

माफीं नहीं मागी तो लेंगे कानून का सहारा
भाजपा की पूर्व महिला कार्यकर्ता बबिता ने ई-रेडियो से बातचीत में कहा कि अगर महानगर अध्यक्ष ने लिखित रूप में खण्डन नहीं किया तो वह कानून का सहारा लेंगी।

विज्ञप्ति में हैं कई गलतियां
महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग को निष्कासन विज्ञप्ति में जिलाध्यक्ष बताते हुए सभी बागियों को पार्टी से छह वर्ष के लिए बाहर करने का आदेश बताया गया है। अब मामला यह स्पष्ट नहीं है कि करुणेश गर्ग पार्टी के महानगर अध्यक्ष हैं या फिर जिलाध्यक्ष? src – eredio 

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