मेरठ मंडलायुक्त व बिल्डरों से संबंध सरकारी विभागो और प्रशासनिक अधिकारी दे ध्यान, 6 रूपये सेकड़ा पर कौन दें रहा है ब्याज पर रूपया

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मेरठ 15 सितंबर। देशभर में बिल्डरों के फेल होने और इस क्रम में आवंटी उपभोक्ताओं को बुक कराए गए मकान व फ्लैट आदि न मिलने तथा बिल्डर हाथ न आने या सही जवाब न देनें के चलते परेशान उपभोक्ता को राहत देने हेतु उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा कई सकारात्मक व प्रभावी निर्णय लेते हुए जिलों के अधिकारियों को इस संदर्भ में कार्रवाई करने और आवंटियों को समय से बुक कराए गए घरों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बड़े बिल्डरों पर शिकंजा कसा जाना शुरू हो गया है। लेकिन प्रदेश के जिलों में बिल्डरों से संबंध जो समस्याएं उपभोक्ताओं के समक्ष आ रही हैं। उनका समाधान संबंधित विभागों के अधिकारी करने में पूर्ण सफल नजर नहीं आ रहे है। आजकल एक चर्चा शहर में विशेष तौर पर मौखिक रूप से सुनने को मिल रही है कि कुछ एकस्पोर्टर तो कई होटल संचालक कुछ ज्वेलर्स तो कुछ अन्य नोट बंदी से परेशान बिल्डरों को 6 रूपये सैंकड़ा ब्याज पर रूपया देकर जितना पैसा देते हैं उससे डबल की जमीन सर्किल रेट पर अपने नाम लिखवा लेते हैं। और इस काम में दो तीन दलाल और एक सीए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे बताते हैं। उक्त लाईन लिखे जाने तक 6 रूपये सेकड़ा में रूपये देने लेने वाले बिल्डर व देने वाले ब्याजखोरों तथा सीए अथवा दलालों के नाम पर सामने नहीं आ पाए। लेकिन उन उपभोक्ताओं में कुछ कशमशाहट देखी गई जिन्होंने बिल्डरों से मकान खरीदे और अब उन बिल्डरों द्वारा जमीने गिरवी रखकर रूपया लिया जा रहा है अगर वो नहीं चूका पाए तो उन्हे मकान कैसे मिलेंगे क्योंकि जिन ब्याजखोरों ने अपने नाम जमीने लिखवा ली और रजिस्ट्रियां करा ली वो तो बिल्डरों से बुक कराए जाने वाले मकान उपभोक्ताओं को देने वाले लगते नहीं हैं और बिल्डर के पास जमीन नहीं हेागी तो वो देगा कैसे। ऐसी स्थिति में जो हाल नोएडा व गुड़गांव में बिल्डरों के द्वारा उपभोक्ताओं का किया जा रहा है वो इस शहर में भी हो सकता है। इस तथ्य और मुख्यमंत्री जी की भावना को देखते हुए कुछ जागरूक लोगों का कहना है कि भवन बनाने वाले बिल्डरों से संबंध विभागों और प्रशासन के अधिकारियों को गोपनीय रूप से जांच कराकर 6 रूपये सेकडा ब्याज देने वाले ब्याज खोरों का पता लगना चाहिये ओर ब्याज देने वालों से संबंध नियमों का पालन अगर इनके द्वारा नहंी किया जा रहा तो लेने देने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई क्योंकि जब बिल्डर मकान दुकानों की बुकिंग कर सते हैं तो वो संपत्ति को गिरवी कैसे रख सकते है। बताया जाता है कि 6 रूपये सैकड़ा ब्याज पर रूपया देने वाले कुछ सफेदपोश ब्याजखोर कई समाजसेवियों के माध्यम से थोड़े बहुत रूपये खर्च कर एक आद अच्छा काम करने की आड़ में अधिकारियों का सानिध्य प्राप्त भी करते रहते हैं। यह तो कोई बुरा नहीं लेकिन इनकी ब्याजखाओ प्रवृत्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहियें । -जनहित में संवाद सूत्रों के आधार पर प्रकाशित

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