लोक अदालत वादों के निस्तारण का एक सशक्त माध्यम-पंकज मित्तल

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मेरठ। जन सामान्य को आपसी सुलह एव समझौते के आधार पर सस्ता व सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दीवानी न्यायालय के प्रांगण में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का उदघाटन उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मा0 प्रशासनिक न्यायमूर्ति पंकज मित्तल व जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चन्द्रहास राम ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। मेरठ। जन सामान्य को आपसी सुलह एव समझौते के आधार पर सस्ता व सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दीवानी न्यायालय के प्रांगण में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का उदघाटन उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मा0 प्रशासनिक न्यायमूर्ति पंकज मित्तल व जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चन्द्रहास राम ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।  मा0 प्रशासनिक न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने कहा कि लोक अदालत वादों के निस्तारण का एक सशक्त माध्यम है, जिसमें आपसी  सुलह समझौते के आधार पर वादों का स्थायी निस्तारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में निस्तारित वादो की कोई अपील नहीं है जहां पर एक ही दिन में समय व धन की बचत के साथ अनेकों लोगो को सरल व सुलभ न्याय दिया जाता हैं। उन्हांेने बताया कि प्रदेश में लोक अदालत की शुरूआत  सर्वप्रथम मेरठ से ही हुई थी जबकि देश में प्रथम शुरूआत गुजरात के जूनागढ में हुई थीे।   जिला जज एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चन्द्रहास राम ने कहा कि लोक अदालत का आयोजन एक राष्ट्रीय यज्ञ है, जिसमें सभी अधिकारियों को अपने अपने दायित्वों की आहुति देने की आवश्यकता है।  उन्होंने मा0 न्यायमूर्ति को आश्वस्त किया कि गत जुलाई में मेरठ जनपद प्रदेश में वादों के निस्तारण में प्रथम रहा था, जिसको अब भी बरकरार रखा जाएगा। जिलाधिकारी समीर वर्मा ने कहा कि हमारी संविधान व्यवस्था का स्तम्भ न्याय पालिका है, जिससे न्याय की आशा के लिये सभी लोग आते है। उन्होंने कहा कि कार्य की अधिकता के कारण वादों में न्याय समय से नहीं मिल पाता, लेकिन पीड़ितों को कम समय व धन की बचत के साथ न्याय उपलब्ध कराने का कार्य लोक अदालत द्वारा किया जाता हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व भांति भी राजस्व विभाग द्वारा वादों के निस्तारण में भविष्य में पूर्ण सहयोग किया जाएगा।  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी ने कहा के लोक अदालत एक ऐसा माध्यम है जिसमें कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाकर हताश हुए लोग एक ही दिन में कम समय में एक ही स्थान पर सरल व सुलभ न्याय प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत वादों के निस्तारण के सबसे सरल एवं सुगम कानूनी प्रक्र्रिया है।  सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रामानन्द ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल माह में 13310 वाद चिन्हित किये गये जिसमें से 4829 वादों को निस्तारित किया गया जिसमें 04 करोड़ रूपये की वसूली प्राप्त हुई तथा माह जुलाई में 37646 वाद चिन्हित किये गये जिसमें से 24001 वाद निस्तारित किये गये, 4 करोड़ 55 लाख 80 हजार रूपये की वसूली प्राप्त हुई जिससे जनपद मेरठ प्रथम स्थान पर रहां।  उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में आज आपसी सुलह समझौते के आधार पर न्यायालयों में लम्बित वाद जैसे सिविल वाद, फौजदारी के शमनीय वाद, 138 एन.आई एक्ट के अन्तर्गत वाद, श्रम वाद, पारिवारिक वाद, भूमि अध्यापित वाद, दीवानी वाद, जैसे किरायेदारी, बैंक वसूली, राजस्व वाद, चकबन्दी वाद, मनरेगा, जलकर, बिजलीकर, आयकर, वाणिज्यकर सेवा सम्बंधित वाद, राशन कार्ड, बीपीएलकार्ड जाति एंव आय प्रमाण पत्र से सम्बंधित सभी प्रकार के चालान, वन विभाग के वाद, कैन्टामैन्ट बोर्ड, रेलवे प्रतिकर, आपदा प्रतिकर, सिविल दीवानी के वादों का निस्तारण पक्षकारों की आपसी सहमति के आधार पर किया गया। प्रथम अपर जिला जज अरूण कुमार मिश्रा ने अंत मंे सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।  इस अवसर पर मा0 न्यायमूर्ति राजेश चन्द्रा, वीपी सिंह, नसीमुद्दीन, मेरठ बार एसोसिऐशन के अध्यक्ष मिसाबुद्दीन सिद्दकी एवं जिला बार एसोसिऐशन के अध्यक्ष रोहताश अग्रवाल एडीजे पीयूष शर्मा, ब्रिजेश सिह, सहित अन्य न्यायाधीश एवं अधिवक्तागण, बार के सदस्यगण उपस्थित रहें।

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