कमिश्नर लोकसभा चुनाव लड़े तो जीत सकते हैं, भैया सांसद जी की कुर्सी खतरे में पड़ गई लगती है!

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मेरठ 13 दिसंबर। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे पीएल पुनिया एवं महाराष्ट्र के पुलिस कमिश्नर रह चूके प्रमुख आईपीएस सत्यपाल सिंह जैसे दो चार प्रमुख सरकारी नौकरियों में सेवारत रहे अधिकारियों को अगर छोड़ दिया जाए जितने भी अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद या नौकरी में रहते इस्तीफा देकर राजनीति में आए और चुनाव लड़े और उन्हे कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके उदाहरण के रूप में गाजियाबाद के जिलाधिकारी रहे ओम पाठक तथा आईएएस देवी दयाल जी जैसे उच्च पदों पर आसीन रहे अधिकारियों को देखा जा सकता।
इसके बावजूद गत दिवस 12 दिसंबर को मेरठ की महापौर सुनीता वर्मा के टाउन हाल में हुए शपथ समारोह के दौरान
वंदेमातरम और जयभीम के नारों क बीच एक दूसरे को कम आंकने की कोशिश कर रहे भाजपा और बसपा के नेताओं को जब पूर्व मेयर और कैंट विधायक
सत्यप्रकाश अग्रवाल शांत करने में सफल नहीं हो पाए तो महापौर को शपथ दिलाने हेतु समय से पूर्व पहुंचे कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने माइक संभाला। और कहा कि चुनाव आते जाते हैं उसमे पार्टी जीतती है लेकिन निर्वार्चित होने के बाद चुना गया प्रतिनिधि सबका होता है।
लोकतंत्र की यही पहचान हैं इसलिये आप हिंदुस्तान जिंदाबाद भारत माता की जय जैसे नारे लगाए और शांत हो जाए। कमिश्नर के इतना कहते ही शपथ समारोह स्थल लगभग पूर्णतः शांत हो गया। इस पर कुछ नेताओं का कहना था कि यार जिस भीड को हमारे नेता शांत नहीं कर सकें कमिश्नर ने एक बार में ही साद लिया। इन्हे तो यहां से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहिये।
तभी दूसरा बोला की भाई जब तक अफसर हैं तब तक ही पूछ है उसके बाद कोई नहीं सुनता। इस पर वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति का कहना था यार ऐसा नहीं हैं प्रभात कुमार मु.नगर , मुरादाबाद, नोएडा जहां भी रहे वहां के लोग उन्हे आज भी याद करते। यहां जिस प्रकार से वो काम कर रहे हैं उस हिसाब से उनके प्रशंसकों की बडी संख्या है। इसलिये अगर चुनाव लड़े तो जीत सकते हैं। चर्चा पर ध्यान दिया जाए अभी तो कमिश्नर साहब की सर्विस बहुत है जब सेवानिवृत्त होंगे तब कहां बसेंगे और क्या करेंगे अथवा चुनाव लडेंगे या समाजसेवा यह सब अलग बात है। लेकिन फिलहाल सभा स्थल पर गैर मौजूद सांसद राजेंद्र अग्रवाल की अनुपस्थिति को लेकर जो चर्चा थी उसने इस चर्चा के बाद एक नया रंग लेना शुरू कर दिया था क्योंकि कुछ लोगों का कहना था कि भाई इस प्रकार तो दूसरी बार जीते हमारे सांसद की कुर्सी ही खतरे में पड़ सकता है। -संवाद सूत्रों पर आधारित

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