विजय आनंद अग्रवाल को उम्मीदवार ना बनाये जाने को लेकर है चर्चा, टिकट गया तो क्या माल तो आ ही गया

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नगर निगम के चुनाव में 22 नवबंर को होने वाले चुनाव में इस बार जानकारी अनुसार आशु रस्तोगी द्वारा तो टिकट नही मांगा गया मगर पंकज कतिरा, सेंसरपाल सिंह तथा विजय आनंद अग्रवाल और रविन्द्र तेवतिया या इनके द्वारा सुझाये गये व्यक्तियों को आवेदन के बावजूद उम्मीदवार बनाया नही गया। इसी प्रकार ब्रहमपुरी क्षेत्र से हरिकिशन गुप्ता या उनकी पत्नि को टिकट ना दिये जाने से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी है। कहा जा रहा है की पंकज कतिरा पर तो सीधे सीधे या किसी को माध्यम बनाकर नगर निगम में ठेकेदारी की जा रही थी सवाल उठता है की तेज तरार और पूरे कार्यकाल में भाजपा पार्षद प्रवक्ता के रूप में हर जगह अपनी आवाज मुखर करने में अग्रणी विजय आनंद अग्रवाल चुनाव में मुख्य धारा से बाहर क्यो हुए यह विषय काफी सोचने वाला है और इसे लेकर विजय आनंद अग्रवाल के चुनाव क्षेत्र व भाजपा के नेताओं में भी चर्चाएं गरम है इस संदर्भ में जब खोज की गयी तो जो तथ्य उभर कर आये उसके अनुसार कहा जा रहा है की विजय आनंद अग्रवाल अवैध निर्माण करने और कराने तथा करने वालों को बढ़ावा देने वालों में अग्रणी भुमिका निभाते रहे जिससे पार्टी की साख को कही ना कही धक्का लगा। इस वजह से उनमें सब तरह से एक अच्छे नेता की क्वालिटी होने के बावजूद उन्हे टिकट नही दिया गया। कुछ लोगो का यह भी कहना है की ऐतिहासिक टाउन हाल में पार्किग बनवाने के काम में उनकी बड़ी भूमिका रही लेकिन टाउन हाॅल की जो शाख और गरिमा थी वो उसके कारण खत्म हो गयी यह भी एक कारण उनके टिकट कटने का हो सकता है समाचार लिखे जाने तक विजय आनंद अग्रवाल से बात नही हो पायी इसलिए सही तथ्य पता नही चल पाये मगर यह चर्चा थी की संयुक्त व्यापार संघ के चुनाव में उनका रूझान नवीन गुप्ता गुट की ओर रहा परिणाम स्वरूप बिजेन्द्र अग्रवाल और अरूण वशिष्ठ का हाथ उनका टिकट कटवाने में हो सकता है। कई भाजपाईयों का मौखिक रूप से कहना है की टिकट गया तो क्या हुआ माल तो बहुत आ ही गया।

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