केएल इंटरनेशनल स्कूल और आनंद अस्पताल तथा मोहनपुरी के नाले पर बने फ्लैटो से हो सकती है सरकार को करोड़ों की राजस्व वसूली, जेई से लिया जाए शपथ पत्र

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मंडलायुक्त दें ध्यान! मानचित्र और कंपाउंड शुल्क वसूलने में उदासीन और लापरवाह क्यों हैं एमडीए के अधिकारी?

मेरठ 8 सितंबर। आर्थिक अभावों से ग्रस्त मेरठ विकास प्राधिकरण की स्थिति सुधारने और उसे इस मामले में स्वलंबी बनाने के लिये भरपूर प्रयास एमडीए बोर्ड के अध्यक्ष कमिश्नर मेरठ डा प्रभात कुमार द्वारा किये जा रहे हों अपने काम में प्राधिकरण के अधिकारियों को कोई समस्या न हो और नहीं कोई अड़ंगेबाजी इस काम में न कर पाए इस ओर तमाम तरीके के दबाव और सिफारिशों के तौर पर आने वाली कठिनाईयों की चिंता किये बिना प्राधिकरण के अधिकारियों को खुली छूट मानचित्र और समन शुल्क वसूलने के लिये आयुक्त द्वारा दी गई है। और इस हेतु मंडलायुक्त ने एक टारगेट भी विभाग के अधिकारियों के लिये निर्धारित किया हैं।
लेकिन इतनी सपोर्ट उच्च अधिकारियों की होने के बाद भी मेरठ विकास प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी अपने काम को अंजाम देने में उदासीन व लापरवाह क्यों है यह विषय सोचनीय है। एमडीए बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा दिये गए सौ करोड़ के टारगेट के मुकाबले मुझे लगता है कि विभाग के ऐई व जेई और जोन प्रभारी ईमानदारी से प्रयास करें तो 100 की जगह हजार करोड़ रूपये तक भी कंपाउंड शुल्क आदि के रूप में वसूल हो सकते हैं। और मजे की बात तो यह है कि इस वसूली के लिये किसी को कहीं ढूंढने की आवश्यकता नहीं है। जिस सड़क पर भी प्राधिकरण की टीम निकल जाएगी उसे रास्ते पर यह पिछले एक दशक में बनी इमारतों की लंबी लाईन नजर आएगी जिससे एक एक इमारत से कई करोड़ रूपये समन शुल्क व कंपाउंड शुल्क वसूल हो सकता है। बताते हैं कि दूसरी ओर जो कुछ कंपाउंड शुल्क विभाग में कैंप लगाकर वसूल किये जाने की खानापूर्ति चल रही है उसमे भी सरकारी कोष में कम व्यक्तिगत वसूली ज्यादा संबंधित अधिकारी कर रहे हैं। वरना वो क्या कारण है कि गढ रोड स्थित आनंद अस्पतल और जाग्रति विहार स्थित केएल इंटर नेशनल स्कूल व मोहनपुरी नाले पर बने फ्लैटो और दुकानों की इमारतों की जांच कराकर यह क्यों नहीं देखा जा रहा कि इनका मानचित्र कितना पास था और वर्तमान समय से कितना निर्माण हो चुका हैं और इन्होंने उसे कंपाउंड क्यों नही कराया। अब इसमे कितनी सत्यता है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।बताया जाता है कि केएल इंटर स्कूल का निर्माण मानचित्र पास से कई गुना ज्यादा और गलत तरीके से हो चुका है। इसी प्रकार आनंद अस्पताल का पहला निर्माण ही मानचित्र के बिल्कुल विपरीत हुआ। वाहनों के लिये छोडे गए बेसमेंट में काॅमर्शियल गतिविधियां शुरू हो गई। एक पोर्सन पिछले दिनों मुख्य गढ़ रोड पर बन गया जबकि दूसरा पोरेशन दामोदार कालोनी के मोड़ पर नवीन मंडी उपनिदेशक कार्यालय के निकट भव्य रूप से बन गया। लेकिन एमडीए के अधिकारियों ने न तो उससे पूर्व सबसे मानचित्र वसूली के प्रयास किये और न ही कंपाउंड शुल्क के। जबकि जानकारों की माने तो इन दोनों इमारतों से करोड़ रूपये इमानदारी से जांच हो जाए तो कंपाउंड शुल्क के रूप में मिल सकते हैं।,बताया जाता है कि इस बारे में वीसी एमडीए को पिछले दिनों कुछ लोगों ने अवगत कराया था और उन्होंने इस संदर्भ में कार्रवाई शुरू की थी लेकिन उसके परिणाम क्या हुए यह किसी को पता नहीं। मंडलायुक्त जी आनंद अस्पताल और केएल इंटरनेशनल स्कूल जाग्रति विहार तथा मोहनपुरी के नाले पर बने भव्य लैटों से अगर कंपाउंड शुल्क ही वसूल लिया जाए तो पा्रधिकरण की आर्थिक स्थिति अदभूतपूर्व सबसे मजबूत हो सकती है। कंपाउंड शुल्क वसूली में ईमानदारी बनी रहे इसके लिये संबंधित जेई से लिखित रूप में लिया जाए कि जो शुल्क लिया जा रहा है वो ठीक है। अगर कोई कमी आदि होगी तो मैं जिम्मेदार हूंगा। इसका शपथ पत्र भी लिया जा सकता है। सही वसूली हेतु। संवादद सूत्रों पर आधारित

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