एमडीए में तीन दिन में नक्शा पास कराना है लोहे के चने चबाने समान, एक ही मानचित्र में लगाई जाती है कई कई आपत्तियां

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मेरठ 16 जनवरी, (प्रतिनिधि)। प्रदेश सरकार द्वारा अपना घर बनाने और सिर पर छत नियम अनुसार प्राप्त करने के इच्छुक नागरिकों की सुविधा हेतु प्रदेश भर में आॅन लाईन मानचित्र पास करने का नियम बनाने के साथ ही नक्शे को लेकर अनेक प्रकार की रियाते भी नागरिकों को दी गई। बताया जा रहा है कि शुरू में यह व्यवस्था सही चली लेकिन अब प्राधिकरणों और अन्य संबंधित विभागों में मौजूद इससे संबंध अफसरों के द्वारा आवेदन करने वालों को परेशान करने और फिर अपनी मनो इच्छा पूरी करने के लिये अनेक प्रकार के अड़ंगे भी विकसित कर ली गई है। इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में मेरठ विकास प्राधिकरण में पिछले छह माह जो नक्शे पास हुए और निरस्त किये गए अगर उनकी जांच करायी जाए तो अनेको ऐसे बिंदु मिल जाएंगे जिनको लेकर पहले तो आपत्ति लगाई गई और बाद में खानापूर्ति कर उक्त आपत्ति को नजर अंदाज कर मानचित्र पास कर दिया गया। जिन लोगों ने संबंधित अधिकारियों की इच्छा पूरी नहीं की तो उनके नक्शे मौखिक चर्चा है कि निरस्त कर दिये गए जब इस संबंध उन्होंने पूछताछ की तो दोबारा आवेदन करने को कह दिया। मौखिक चर्चा के अनुसार ऐसे ऐसे आॅबजैक्शन लगाए जा रहे हैं जिनका कोई औचित्य नजर नहीं आता। जैसे एमडीए से पास पूर्ण रूप से विकसित हर प्रकार काशुल्क जमा करा चुकी कालोनी में प्लाट पर मानचित्र पास कराने के लिये किये जाने वाले आवेदनकर्ताओं से आपत्ति लगाकर कालोनी के नक्शापास की काॅपी मांगी जा रही है जबकि इसी विभागग से मानचित्र पास हुआ तो अपने यहां उसको देखकर कार्रवाई कयों नहीं की जा रही। इसी प्रकार एक मानचित्र पर अगर कोई आपत्ति है तो एक बार बताया जाए लेकिन एक ही मानचित्र पर कई कई बार आपत्ति लगाकर आवेदकों को परेशान किया जा रहा है।
बताया जाता है कि एटीपी गोरखी एक ग्रामीण सादू वाली कहावत की बेटा हम तो कुछ नहीं लेते जो भी है जेब में रख दो को शायद इसी तरह चरितर्थ किया जा कराया जा रहा है। वरना एक ही मानचित्र में एक जेई एक आपत्ति लगाता है और अगर पास होने से पहले नक्शा दूसरे जेई पर गया तो वो दूसरी आपत्ति लगा देता है। मौखिक सूत्रों की माने तो एमडीए में यह हाल है कि एक जेई केा मानचित्र में लगाया वो काम करना नहीं चाहता तो लोगों के नक्शे बीच में ही अटके पड़े है और शायद सुनवाई करने वाला कोई नजर नही ंआता है।
बताया जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ जी ने मानचित्र के संबंध में जनहित में जो यह निर्णय लिया उसका दुरूपयोग एमडीए के अधिकारी खुलकर कर रहे है। तीन दिन में मानचित्र पास करके देने के बजाए कुछ नक्शो को कई दिनों तक पास नहीं किया जाता अब इसमे कितनी सच्चाई है यह तो जांच का विषय है। मगर क्योंकि प्राधिकरण उपाध्यक्ष जनता से मिलना नहीं चाहते। लोग काफी देर इंतजार कर वापस चले जाते है और जेई व एटीपीसी की टशन भी निराली है। ऐसे में जब तक विभिन्न माध्यमों से इनकी इच्छा पूरी नहीं की जाती तब तक मानचित्र पास कराना एमडीए में लोहे के चने चबाने के समान टेढ़ी खीर हो गया है। मौखिक सूत्रों पर आधारित

– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल  इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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