पैसा विवाह मंडप वाले कमाए, व्यवस्था पुलिस प्रशासन क्यों करें?

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कमिश्नर का आदेश तुगलकी फरमान नहीं, मंडप संचालकों से कराया जाए नियमों का पालन
सड़क पर जाम न लगे इसके लिये आतिशबाजी और चढ़त पर लगे रोक
आदेशों का पालन न करने वाले होटलो व विवाह मंडप स्वामियों के खिलाफ हो कार्रवाई

मेरठ 7 अक्टूबर। शादियों का सीजन खुशियां लेकर आता है। घरों में शुभकारज की चहल पहल होती है तो व्यापारी इसलिये खुश होते हैं कि अब सामान बिकेगा और व्यापार बढ़ेेगा। लेकिन वर्तमान समय में पिछले कुछ सालों से मेरठ विकास प्राधिकरण नगर निगम आवास विकास परिषद व छावनी परिषद के सुनियोजित चहुमुंखी विकास का दावा करने वाले अधिकारियों की परपरस्ती में अवैध निर्माण रोकने के लिये जिम्मेदार अफसरों के सानिध्य में शहर में मुख्य मार्गांे पर अवैध रूप से बन गए विवाह मंडपों के द्वारा साहलगों के दिनों में जीवन की रफतार एक प्रकार से और खासकर शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक अनेक स्थानों पर रोक जाती है।
इनके कारण मुख्य मार्गाें सहित हाईवे आदि पर लगने वाले जाम में फंसे नागरिकों का कहना होता है कि यह सब विवाह मंडप जो सडको पर शासन की निति के विपरीत बने हैं उन्हे तुरंत ही बंद कर देना चाहिये। लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं होता है। क्योंकि अफसरों का रवैया ज्यादातर यह रहता है कि जो चल रहा है वो चलने दो शिकायत आयी तो आश्वासन देकर मामले को टाल दो। परिणाम स्वरूप विवाह मंडप से उत्पन्न समस्या नागरिकों के समक्ष सुरसा के मुंह की भांति बढती ही जा रही है और स्थिति यह हो गई है कि नागरिक कोशिश करते है। कि शाम के बाद अगर लंबे रूट पर न जाना पडे तो अच्छा है।
नागरिकों को शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में गंभीर मेरठ मंडलायुक्त डा प्रभात कुमार ने नागरिकों की समस्याओं को समझा और कुछ सख्त निर्णय जैसा की सड़क पर बारात चढ़ती मिली तो मंडप को सील किया जाएगा आदेश उनके द्वारा मंडल के सभी जिलों के जिलाधिकारियों व पुलिस कप्तानों को दिए गए हैं। जिसके तहत हर विवाह मंडप संचालक को चाहे वो होटल के रूप में बना हो या फिर विवाह मंडप के रूप मे। उसके स्वामी को अपने यहां होने वाली शादियों की सूची पूरे विवरण के साथ पुलिस को देनी होगी। आयोजन के दिन प्रशासनिक अधिकारी स्वयं जाकर स्थिति को देखेंगे और जहां भी आदेश का उल्लंघन पाया जाएगा वहीं मंडप और उसके संचालक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
आदेश के तहत मंडप के भीतर ही बैंड या डीजे बज सकेगा। रात को दस बजे तक तथा मंडप के बाहर अगर पार्किंग दिखाई दी तो मंडप संचालक को उसका खामियाजा भुगतना पडेगा। विवाह के दौरान सडक पर आतिशबाजी प्रतिबधित होगी। जो कुछ भी करना है वो मंडप के अंदर ही हो । इसके लिये मंडप स्वामी को बुकिंग के समय यह सारी बातें समारोह आयोजक से तय करनी होगी। मंडप के अंदर अगर हर्ष फायरिंग होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी मंडप स्वामी की होगी।
कुल मिलाकर कहने का आशय है कि मंडप स्वामी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह शादी समारोह और मंडप के लिये बने सभी नियमों का पालन कराने के साथ साथ उसके यहां होने वाले विवाह समारोह की वजह से सड़क पर जाम न लगे और यात्रियों को परेशान न होना पड़े यह सब उसे सुनिश्चित करना होगा।
मंडप एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज गुप्ता और महामंत्री विपुल सिंघल के हवाले से अखबारों में छपी खबर में कमिश्नर के आदेशों को तुगलकी फरमान बताया जा रहा है। और कहा जा रहा है कि चढ़त को रोकना मंडप मालिक का नहीं प्रशासन का काम है। इसलिये जिसके यहां शादी है उससे अंडर टेकिंग पुलिस प्रशासन खुद लें। यह निर्देश जनभावना के खिलाफ है।
सवाल यह उठता है कि माल कमाए मंडप संचालक तो व्यवस्था प्रशासन और पुलिस क्यो करें। और अगर यह आदेश जनभावना के खिलाफ है तो सड़कों पर होने वाली चढ़त और आतिशबाजी को लेकर जो समस्या बेकसूर आम नागरिकों को होती है उनका कसूर क्या है।
रही बात मंडप संचालकों की इसमे नागरिकों का यह कथन बिल्कुल सटीक है कि मंडप और होटलों के लिये एक नियमावली निर्धारित है उसे तोड़कर अवैध निर्माणों को रोकने के लिये जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर विवाह मंडपों का निर्माण इस प्रकार क्यो किया गया जो वो नागरिकों की समस्या का कारण बने।जागरूक नागरिकों का कहना है कि एनएच 58 बाइपास पर रीबूरा और बिगबाइट दोनों होटलों का निर्माण शासन की नीति के बिल्कुल विपरीत हुआ है। और जब इनमे शादियां होती है तो मंसूरी से दिल्ली आने जाने वाले यात्रियों को शाम के समय घंटे जाम में फंसने के बाद समय की बर्बादी उठानी पड़ती है क्योंकि बाइपास इन पर विवाह समारोह में होने वाली आतिशबाजी और वहां खड़े होने वाले वाहनों से जो जाम लगता है वो कभी कभी कई कई किलो मीटर लंबा लग जाता है जिससे निकलने में कई घंटों यात्रियों को लग जाते हैं।
आम आदमी की इस समस्या की जिम्मेदारी अगर विवाह मंडप की नही है तो किसकी है। देहली रोड पर समुद्रा, जेपी रिसोर्ट व अन्य विवाह मंडप शादी विवाह के दिनों में नागरिकों के लिये सिर दर्द बनते हैं तो गढ रोड पर वोलगा, एरोमा, रूड़की रोड पर स्थित मंडप भी यात्रियों की जान का बबाल बन जाते हैं। लोगों का कहना है कि शादी एक खुशी का अवसर पर है जिसके यहां होती है वो भी खुश और देखने वाले भी प्रसन्न होते हैं ओर बिना कोई मतलब के भी जिसकी शादी होती है उसको शुभकामनाएं औ परिवार को बधाई देते हैं। लेकिन चारो ओर गली मोहल्लों से लेकर मुख्यमार्गाें तक छोटे बड़े बन गए विवाह मंडपों व होटलों में होने वाली शादियों से जो परेशानी हो रही है उससे आम आदमी का मन खटटा हो जाता है दूल्हे और उसके घर वालों के बारे में कोई कुद नहीं कहता लेकिन मंडप संचालकों और उनके बन जाने के लिये जिम्मेदार अफसरों को जी भरकर उसके द्वारा जरूर कोसा जाता है। ऐसे में कमिश्नर मेरठ डा प्रभात कुमार के तुगलकी फरमान नहीं आम आदमी को राहत देने वाला ही कहा जा सकता है। लोगों का कहना है कि मंडलायुक्त के आदेशों का सख्ती का पालन हो यूपी सरकार भी इस संदर्भ में एक सख्त आदेश जारी करे क्योंकि यह परेशानी उत्तर प्रदेश के जिलों में ज्यादा होती है और प्रदेशों इतनी समस्या कभी कभी की बात तो छोड़ दो हमेशा नहीं होती।
प्रस्तुत संवाद सूत्र, मौखिक चर्चा, निजी संवाददाता

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