मेरठ में बनी पटरियों पर दौड़ेगी मेट्रो और रैपिड ट्रेन

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मेरठ. मेरठ से दिल्ली के बीच रैपिड ट्रेन हो या फिर मेरठ मेट्रो, दोनों के लिए ही कैंट स्थित रेल कारखाना हादसों को रोकने वाली पटरियां तैयार करेगा। कारखाने को आठ माह बाद रैपिड ट्रेन के लिए पटरियां सप्लाई करने को कहा गया है। हाल ही में जापानी विशेषज्ञों की टीम ने इस कारखाने का दौरा भी किया है। अब यहां रैपिड ट्रैक तैयार करने के लिए जापानी तकनीकी वाली विशेष मशीनें मंगाई जाएंगी। अगले महीने से रैपिड पटरियां बनाने का काम शुरू होने की उम्मीद है। प्रदेश और केंद्र सरकार 2019 के पहले मेरठ मेट्रो और रैपिड ट्रेन के काम को ग्राउंड पर लाना चाहती है। रैपिड ट्रेन का काम शुरू करने के लिए मार्च 2017 की डेडलाइन रखी गई थी। रैपिड रेल का ट्रैक तीन चरणों में तैयार होगा। पहले चरण में गाजियाबाद से दिल्ली के बीच 17 किलोमीटर की दूरी में काम होगा। मेरठ स्थित रेल कारखाने में भिलाई में बनी पटरियां लाई जाती हैं। इन पटिरयों की यहां फिनि¨शग की जाती है और ट्रैक पर ले जाकर इन्हें जोड़ने का काम होता है। अभी तक रेल पटरियों के 13-13 मीटर के टुकड़ों को फिश प्लेट के जरिए जोड़ा जाता था, अब फ्लैश बट वैलिं्डग तकनीक से इन्हें जोड़कर 260 मीटर तक की पटरी बनाई जाएंगी। मेरठ कारखाने में फ्लैश बट तकनीक से पटरियां जोड़ी जा रही हैं। यह हादसे रोकने में सक्षम हैं और ज्यादा स्मूथ हैं। हाल में जापानी विशेषज्ञों की टीम ने भविष्य की जरूरतों के मुताबिक कुछ तकनीकी सुझाव दिए हैं। कुछ नई तकनीकी वाली मशीनें लगाने की भी सिफारिश की गई है। जल्द ही यहां रैपिड ट्रेन के ट्रैक के लिए पटरियां तैयार करने का काम शुरू हो जाएगा। मेरठ कारखाने में सेक्शन इंजीनियर डा. विपिन कुमार बताते हैं कि छह से आठ महीने में उनका प्लांट रैपिड और मेट्रो ट्रेन के लिए पटरियां मुहैया कराने की स्थिति में होगा। जल्द ही प्लांट को कुछ नई मशीनें मिलने जा रही हैं।

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