जुलाई 2018 से शुरू होगा 90 किमी लम्बे आरआरटीएस का कार्य-आयुक्त

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आयुक्त ने की आरआरटीएस के कार्यो की समीक्षा

परतापुर से मोदीपुरम तक एक ही एलाइमेंट में होंगे मेट्रों व आरआरटीएस-डा0 प्रभात

समय सीमा व गुणवत्तापरक ढंग से पूर्ण हो आरआरटीएस का कार्य-मण्डलायुक्त

मेरठ। रेलगाड़ी छुक- छुक छुक, मेरे वाले स्टेशन पर रूक रूक रूक। जी हा कुछ यही दृश्य आने वाले भविष्य में शहर में होगा। प्रदेश व केन्द्र सरकार ने जनपद को मेट्रों व आरआरटीएस की सौगात दी है। दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक आरआरटीएस तथा मेरठ शहर मे दो काॅरीडोर पर मैट्रो चलेगी। आरआरटीएस की कुल लम्बाई 90 किमी होगी जिसमें 22 स्टेशन होंगे तथा यह दूरी 62 मिनट में तय होगी। आरआरटीएस पर कार्य जुलाई 2018 से शुरू होकर जून 2024 तक पूर्ण होगा। इसकी कुल अनुमानित लागत 32 हजार 598 करोड़ रूपये आयेगी। परतापुर से मोदीपुरम तक मेट्रों व आरआरटीएस एक ही एलाइमेंट में होगी।

आयुक्त सभागार में आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) के कार्यो की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आयुक्त डा0 प्रभात कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि आरआरटीएस भारत में अपनी तरह की पहली क्षेत्रीय रेल सेवा लेकर आ रहा है जोकि दिल्ली से मेरठ तक होगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2018-19 में 250 करोड़ रूपये व केन्द्र सरकार ने 659 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है।
आयुक्त ने अधिकारियों को आरआरटीएस के लिए जहां भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता है उस कार्य को शीघ्र पूर्ण करने, स्टेशन के आसपास पार्किग की व्यवस्था सुनिश्चित करने व समय सीमा के अन्दर कार्य पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया। आरआरटीएस की डीपीआर डीएमआरसी द्वारा बनायी गयी जिसको मई 2017 में प्रदेश सरकार ने स्वीकृत किया व वर्तमान में यह केन्द्र सरकार में जमा की जा चुकी है तथा पीआईबी स्टेज में है।
एनसीआरटीसी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) के ग्रुप महाप्रबन्धक प्लानिंग सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि मेट्रों के दो काॅरीडोर होंगे परतापुर से मोदीपुरम तक प्रथम काॅरीडोर तथा श्रद्धापुरी से बेगमपुल होते हुए जागृति विहार एक्सटेशन तक द्वितीय काॅरीडोर होगा। आरआरटीएस की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा होगी तथा वह 160 किमी प्रति घंटा तक चलेगी तथा औसत गति 100 किमी प्रति घंटा होगी, इसकी गति मेट्रो की गति से तीन गुनी होगी। आरआरटीएस 80 प्रतिशत ऐलीवेटिड व 20 प्रतिशत अंडरग्राउड होगी।

एनसीआरटीसी के ग्रुप महापं्रबंधक प्लानिंग सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि आरआरटीएस पर साहिबाबाद से दुहाई तक कुल 16.5 किमी पर दो पैकेजस में कार्य किया जाएगा, जिस पर टेण्डर आमंत्रित किये जा चके है तथा मई 2018 तक टेण्डर प्रक्रिया पूर्ण होकर जुलाई 2018 से कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। बेगमपुल पर इंटरचेज होगा तथा परतापुर व मोदीपुरम के बीच मेट्रों यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए आरआरटीएस उपलब्ध होगी। परतापुर से मोदीपुरम कुल 18 किमी कुल 15 मिनट में तय होगा। परतापुर से मोदीपुरम तक मेट्रों व आरआरटीएस एक ही एलाइमेंट में होने से इसकी लागत में 6500 करोड़ रूपये की कमी आयेगी। इसकी कुल दूरी 90 किमी होगी जोकि 62 मिनट का सफर होगा।
एनसीआरटीसी के ग्रुप महापं्रबंधक प्लानिंग सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि आरआरटीएस के प्रथम फेस में 06 कोच लगाये जायेंगे तथा बाद में इसकी संख्या 12 कर दिये जायेंगे जिससे 2 हजार से ज्यादा लोग एक साथ सफर कर सकेगे। आरआरटीएस के लिए ऐसियन डवल्पमेंट बैंक (एडीबी) से 60 प्रतिशत ऋण, 20 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा व शेष 20 प्रतिशत उत्तर प्रदेश व दिल्ली सरकार द्वारा दिया जाएगा।

एनसीआरटीसी के ग्रुप महाप्रबन्धक प्लानिंग सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि एनसीआरटीसी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम) चार राज्यों, दिल्ली उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान में कार्य कर रहा है तथा इन चारों प्रदेशों की प्रत्ये की इसमें इक्युटी 12.5 प्रतिशत है तथा 50 प्रतिशत केन्द्र सरकार का है। उन्होंने बताया कि एनसीआरटीसी के 08 काॅरीडोर है जिसमें प्रथम चरण में तीन काॅरीडोर जिसमें दिल्ली से मेरठ 90 किमी प्रथम काॅरीडोर, दिल्ली से गुड़गाव होते हुए अलवर राजस्थान तक 180 किमी का द्वितीय काॅरीडोर तथा दिल्ली से सोनीपत होते हुए पानीपत तक 111 किमी का तृतीय काॅरीडोर होगा यह कार्य सन 2032 में ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
एनसीआरटीसी के ग्रुप महाप्रबन्धक प्लानिंग सुधीर कुमार शर्मा ने बताया कि आरआरटीएस के अनेक फायदे है जिसमें हाई स्पीड कनेक्टेविटी, हाई फ्रीक्वेन्सी, हाई कैपेसिटी, आरामदायक सफर, तुल्नात्मक वहन किये जा सकने वाला किराया, रेडयूसड कन्जेशन एवं पाॅल्यूशन, यूजर फ्रेडली इनफारमेशन सिस्टम, मल्टी माॅडल इंटीग्रेशन, सेफ ट्रेवल व सभी मौसम में आरामदायक व भरोसेमंद सफर है। उन्होंने बताया कि लोग दूरियों को किमी में नहीं मिनटों में नापते है इसलिए आरआरटीएस एक बढिया सफर है। उन्होंने बताया कि आरआरटीएस में सभी कोचस ऐसी होंगे तथा दिव्यांगों के लिए भी व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी।

एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार सिंह नेे बताया कि एनसीआरटीसी सुरक्षा व संरक्षा के लिए कटिबंद्ध है तथा निर्माण कार्य की बैरीकेडिंग भी करायी जाएगी। आरआरटीएस के लिए दुहाई व मोदीपुरम में एक एक डीपोट भी बनाया जाएगा तथा वहां एक एक स्टेशन भी होगा। आरआरटीएस के कोच की डिजाइन स्पेनिस एवं फ्रेच कम्पनी एकोम व इनिका के कन्शोर्सियम (गठबंधन) द्वारा की जा रही है।
एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार सिंह ने आयुक्त के समक्ष आरआरटीएस के कार्यो को तीव्रगति देने के लिए विभिन्न बिन्दुओं पर ध्यान आकर्षण किया जिसमें गाजियाबाद नगर निगम से भूमि का राइट आॅफ वे, मेरठ तिराहे से इलैक्ट्रिक पोल को शिफट किये जाने, पीडब्लूडी से कुछ एनओसी लम्बित होने, खेल निदेशालय व यूपी सिंचाई से लम्बिंत प्रकरणों के साथ-साथ कास्टिग यार्ड के लिए अस्थाई भूमि की उपलब्धता की मांग रखी जिस पर आयुक्त ने सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित कर जल्द से जल्द मांगों को पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया।
इस अवसर पर मा0 विधायक हस्तिनापुर दिनेश खटीक, रफीक अंसारी, सांसद प्रतिनिधि हर्ष गोयल, अपर आयुक्त जयशंकर दूबे, मुख्य विकास अधिकारी आर्यका अखौरी, एमडीए सचिव राज कुमार, जीडीए के मुख्य अभियंता वीएन सिंह, मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा, एनसीआरटीसी के सीपीएम आरके हुस्तु, महापं्रबंधक विद्युत आरडी गुप्ता, नेशनल हाई डिवीजन गाजियाबाद के एई आरएस आर्य, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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