नगर निगम चुनाव में चहेतों को टिकट दिए तो हो सकता है हरियाणा जैसा हाल

0
1542

मेरठ 26 सितंबर। नगर निगम चुनाव को लेकर शुरू हुई चर्चा में अब पार्षद और मेयर पद का उम्मीदवार बनने को लेकर व्यक्तिगत, जातिगत, लामबंदी शुरू हो गई लगती है। गत दिवस स्थानीय निकाय चुनाव केा लेकर शहर घंटाघर मुकंदी देवी की धर्मशाला में एक बैठक आयोजित हुई जिसमे सुरेश जैन रितुराज व भाजपा नेता विवेक रस्तोगी, आदि द्वारा भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं के साथ मतदाता सूची और संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा की। अगर अयुब अंसारी और हाजी शाहिद अखलाक के कार्यकाल को छोड़ दिया जाए तो नगर निगम में अब तक अरूण जैन प्रथम मेयर, मधु गुर्जर, सुशील गर्जुर, हरिकांत अहलुवालिया हिंदु मेयर रहे इसलिये इस चुनाव में सबसे ज्यादा मारामारी उम्मीदवार बनने के लिये भाजपा में जारी है क्योंकि वर्तमान में केंद्र व प्रदेश में इसी पार्टी की सरकार है इसलिये कहीं भी किसी भी स्तर पर चुनाव में बेईमानी की कोई संभावना नहीं है। इस कारण से राजनीति में थोड़ा सा भी दखल रखने वाला जागरूक व्यक्ति अगर वो
राजनीति या समाजसेवा से जुडा है तो वो पार्षद अथवा मेयर का उम्मीदवार बनना चाहता है तो बन सकता है। मेयर का पद अगर सामान्य हो जाता है तो वर्तमान महापौर हरिकांत अहलुवालिया, पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा.लक्ष्मीकांत वाजपेई उनकी पत्नी डा. मधु वाजपेई व्यापारी नेता अरूण वशिष्ट पूर्व पार्षद पीयूष शास्त्री कई बार पार्षद रहे।
वरिष्ठ भापजा नेता अजय गुप्ता पूर्व पार्षद मंगलसैन भाजपा व्यापारी नेता विनित शारदा अग्रवाल, नवीन अरोरा ललित नागदेव व्यापारी नेता सरदार दलजीत सिंह पूर्व पार्षद नवीन गुप्ता, भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता संजीव जैन सिक्का, संयुक्त व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष
विजेंद्र अग्रवाल, भाजपा नेता जयकरण गुप्ता, कैंट विधायक के निकट नीरज मित्तल, विधायक पद के उम्मीदवार रहे मुकेश सिंघल, व्यापारी नेता पवन मित्तल, रेड क्रास सोसायटी मेरठ के चेयरमैन अजय मित्तल रिश्तो का संसार के संचालक व संपादक महेश शर्मा, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, डा. हिमानी अग्रवाल, पूर्व एमएलसी डा. सरोजनी अग्रवाल आदि ऐसे नाम है जो फिलहाल चर्चाओं में हैं। इनके अलावा भी अनेक नाम उम्मीदवार घोषित होने तक उभरकर सामने आएंगे। एक नाम चरण सिंह लिसाड़ी का भी हो सकता है यह चुनाव अगर ध्यान से देखे तो राजनीति दल अपने सिंबल पर लड़ाएंगे तो भाजपा कांग्रेस सपा व बसपा उम्मीदवारों के बीच होगा।
आम नागरिकों में होने वाली चर्चा से यह जो स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा चाहे पंडित को दे या वैश्य को। पंजाबी या किसी दलित को जिसको भी देगी वो दमदारी से चुनाव लड़ेगा और जीतने वाले उम्मीदवारों में प्रथम नंबर पर नजर आएगा। लेकिन अगर वर्तमान में जनाधार के हिसाब से जो चुनावी समीकरण बैठ रहे हैं उसके अनुसार कई बार शहर विधान सभा क्षेत्र से विधायक और सरकार में मंत्री रहे वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में सबसे सक्रिय भाजपा नेताओं में शामिल डा लक्ष्मीकांत वाजपेई और अमित अग्रवाल तथा अजय गुप्ता और विनित शारदा अग्रवाल के नाम सबसे मजबूत दिखाई देते हैं।
एक चर्चा यह भी है कि दिव्यांगों को प्रतिनिधित्व देने के दृष्टिकोण से मेरठ आगमन पर नरेंद्र मोदी तक का स्वागत कर चुके और आरएसएस के क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले जीवट व्यक्तित्व के स्वामी अतुल गुप्ता को भी भाजपा अपना उम्मीदवार बना सकती है। नागरिकों का जो कहना है उसके अनुसार अगर भाजपाईयों ने जनाधार वाले कार्यकर्ता और नेताओं को नजर अंदाज कर अपने चहेतों को जबरदस्ती मेयर या पार्षद का उम्मीदवार घोषित करने की कोशिश की जो हार नगर निगम चुनावों में भाजपा का हरियाणा में हुआ वो यहां भी हो सकता है। क्योंकि वहां 35 में से 13 सीटो पर भाजपा को संतोष करना पडा। बाकी क्षेत्रों से उसके विद्रोही और सात क्षेत्रों में गलत टिकटों के कारण जीत प्राप्त हुई। और भाजपा के मजबूत नेताओं ेके उम्मीदवार भी चारो खाने चित हो गए। वैसे चर्चा है कि अगर सीट सामान्य होती है तो वैश्य या ब्राहमण अथवा पंजाबी को मेयर पद का टिकट मिल सकता है। लेकिन हरिकांत अहलुवालिया पंजाबी प्रतिनिधि के रूप में पांच साल तक मेयर रह चुके हैं इसलिये इस बार किसी ब्राहमण को टिकट दिया जा सकता है। क्योंकि एक भी विधायक इस समय जनपद में ब्राहमण नहीं है। जिले का अध्यक्ष ठाकुर और महानगर भाजपा अध्यक्ष वैश्य जाति से हंैं। जिससे ऐसा लगता है कि ब्राहमणों को खुश करने के लिये भाजपा अपना मेयर का उम्मीदवार किसी ब्राहमण को भी बना सकती है।

संवाद सूत्र के चर्चाओं पर आधारित

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here