1978 में व्यापारी हित में सुंदर लाल जैन और डा. ब्रजभूषण के प्रयासों से गठित हुए संयुक्त व्यापार संघ में क्यों बंट रही है जूतियों में दाल

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व्यापारियों के हित में नौजवानों को आगे क्यों नहीं लाना चाहते नवीन गुप्ता और अरूण वशिष्ठ
व्यापारिक संगठनों में जनपद की सबसे प्रमुख संस्था संयुक्त व्यापार संघ में वर्तमान समय में स्थिति ग्रामीण कहावत जूतियों में दाल बंटने जैसी हो गई है। और इसके नेता कितना ही कह लें कि निस्वार्थ भाव से काम किया जाता है। लेकिन जिस प्रकार से आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं तथा इस पर कब्जे के लिए प्रयास हो रहे हैं उसे देखकर आम आदमी द्वारा जो बात कही जा रही है कि व्यापारी नेताओं को इससे कई प्रकार के लाभ होते हैं इसलिए उनका हरसंभव प्रयास रहता है कि इस पर वो ही कब्जा जमाए रखें और इसीलिए उनके द्वारा इस क्रम में किसी नए नौजवान व्यापारी को आगे नहीं आने दिया जाता। कुल मिलाकर जिस प्रकार से (अखबारों में) खबरें छप रही है उससे तो यही लगता है कि इसकी सदस्यता आदि में काफी गडबड़ है।

चार दशक में
बताते चलें कि 25-01-1978 को शहर सर्राफा मंदिर में संयुक्त व्यापार संघ का विधिवत गठन हुआ। और ऑनरेरी मजिस्ट्रेट श्री सुंदर लाल जैन इसके संस्थापक अध्यक्ष और डा. ब्रजभूषण गोयल संस्थापक महामंत्री बनाए गए तथा कुंजबिहारी अग्रवाल श्री जयप्रकाश सर्राफ, आदि इसके मंत्री रहे। तथा संगठन द्वारा उस समय व्यापाारी नेता सांसद श्री भीकूराम जैन के साथ मिलकर 1979 को बिक्रीकर के विरोध में दिल्ली में लगभग 20 किलोमीटर लंबी रैली निकाली और रामलीला मैदान में एक जनसभा की गई जिसमें नानी पालकीवाल, बजाज व डालमिया ग्रुप के मालिकों सहित कई बड़े व्यापारियों ने भाग लिया था। तब के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त व्यापार संघ द्वारा शायद अन्य संस्थाओं से मिलकर कोई इतना बड़ा आंदोलन नहीं किया गया।

समय से चुनाव क्यों नहीं वर्तमान में पिछले कई वर्षों से संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष व महामंत्री पद पर श्री नवीन गुप्ता, बिजेंद्र अग्रवाल, संजय जैन, अरूण वशिष्ठ आदि बने चले आ रहे हैं। हर बार चुनाव से पूर्व इनमें खींचातान और आरोप-प्रत्यारोप होते हैं। लेकिन चुनाव में अलग-अलग गुटों के पदाधिकारियों के चुनकर आने से बैठकें और शपथ समारोह भी नहीं हो पाते यही वर्तमान कमेटी के कार्यकाल में भी हुआ।

अब 26 सितंबर को चुने हुए पदाधिकारियों का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। सब चुप्पी लगाए बैठे थे। सरदार दलजीत सिंह आदि ने बोलना शुरू किया तो चर्चा जारी हुई। तथा संस्थाओं का पैसा जमा कराकर अपने घर में रख लेने के आरोप जब मौखिक रूप से नवीन गुप्ता पर लगे तो उनके द्वारा 18 सितंबर को व्यापार संघ की आम सभा बुलाने की घोषणा की गई तो दूसरे ग्रप के वर्तमान महामंत्री श्री अरूण वशिष्ठ ने 17 को ही आम सभा बुलाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही बीती 12 सितंबर को एक पत्रकार सम्मेलन आयोजित कर 70 संस्थाओं को फर्जी करार दिया। तो नवीन गुप्ता ने आज एक होटल में पत्रकार सम्मेलन बुलाकर अपनी बात रखी।

व्यापारी संगठन
इसी दौरान किसी ने वाॅटसऐप पर एक समाचार वायरल किया जो इस प्रकार है। कि संयुक्त व्यापार संघ की सूची में पृष्ठ नंबर 34 पर अंकित टीवी पार्टस एसोसिएशन इंडिया से संबंध हैं जिसका नंबर 165/3 है। हैरानी इस बात की है कि शहर के नामचीन होटल के मालिक सुरेश सजनहार इसके अध्यक्ष तथा महानगर में कई स्कूल चलाने वाले विशाल जैन इसके महामंत्री है। लेकिन शायद इनके द्वारा टीवी के पार्टस बेचने का धंधा नहीं किया होगा। इसी प्रकार संयुक्त व्यापार संघ की सूची में पृष्ठ नंबर 46 पर मेरठ क्राकरी हायर एसोसिएशन के नाम से अंकित संस्था का शहर के सबसे बड़े बिल्डरों में से एक इंद्र गर्ग को इससे संबंध दिखाया गया है। और बताया जाता है कि वो क्राॅकरी किराए पर चलाए जाने वालों का संगठन है। इसी तरह से नवीन गुप्ता के परिवार के भी तमाम सदस्य कई-कई संस्थाओं के पदाधिकारी बताए जा रहे हैं। कुछ का कहना है कि परिवार के एक सदस्य द्वारा नौ वोट डाले जाते रहे हैं। वाॅटसऐप पर प्रसारित खबर और संस्थाओं को लेकर हो रही चर्चाओं से यह स्पष्ट है कि कहीं न कहीं घोटालों की बात में सच्चाई तो नजर आती ही है।
वर्तमान समय में व्यापार संघ में 696 संस्थाएं संबंध बताई जाती है। और पिछले नौ साल में 97 संगठन इससे जुड़े इससे बताए गए।

अधिकार को लेकर चुनाव टालना
17 की बैठक को लेकर नवीन गुप्ता का कहना है बिना उनकी अनुमति के महासचिव आम सभा की बैठक नहीं बुला सकते। तो ऐसा ही कुछ तथ्य अरूण वशिष्ठ द्वारा रखे गए है जिसे लेकर नागरिकों का मानना है कि यह सब नूरा कुश्ती के समान है। दोनों पक्ष अनकहे रूप में चुनाव आगे टालना चाहते हैं। सही क्या है यह तो वही जान सकते हैं। बताते चलें कि शहर एक है लेकिन यहां नर्सिंग होमों की पांच संस्थाए संयुक्त व्यापार संघ में रजिस्टर्ड है।
दोस्तों जब संयुक्त व्यापार संघ का गठन हुआ था तब और आज से दो दशक पहले तक यह व्यापार संघ सबसे मजबूत संस्था होती थी। मगर जब से छोटे व्यापारियों के मौखिक अनुसार इसमें व्यापारी नेताओं से सांठगांठ कर भूमाफिया अवैध निर्माण कर्ता आदियों द्वारा अपनी घुसपैठ बनाई गई है। तब से संयुक्त व्यापार संघ निरंतर कमजोर होता चला गया। इसमें कितनी सत्यता है यह तो कहने वाले जाने लेकिन चर्चा है कि अब पिछले एक दशक से गरीब व्यापारी की बात कम सुनी जाती है। बड़े व्यापारियों के अवैध धंधों को बचाने का आरोप ज्यादा लगने लगा है। इसके सबूत के रूप में ऐसा कहने वाले बीड़ी व्यापारी संजय जैन के पिछले वर्ष गोदाम में पड़े छापे और पकड़े गए माल को बचाने का हवाला दिया जा रहा है।

अन्य संगठन हो रहे मजबूत
जिस शहर में कभी संयुक्त व्यापार संघ की तूती बोलती थी अब वहां व्यापारियों के कई संगठन मजबूती से उभरकर सामने आए हैं और कई मामलों में इनकी प्रस्तुति नवीन गुप्ता और अरूण वशिष्ठ से ज्यादा मजबूत दिखाई दी। कई व्यापारियों का यह कथन सही लगता है कि कई संगठन छोटे व्यापारियों की लड़ाई लड़ने के लिए सामने आते हैं।

नौजवानों को मौका दें
निष्पक्ष विचारधारा वाले कुछ व्यापार संघों से जुड़े वोटरों का कहना है कि आखिर वर्तमान पदाधिकारी कब तक संयुक्त व्यापार संघ पर कब्जा जमाए रखेंगे । उन्हें नए व्यापाारियों को आगे आने का मौका देना चाहिए। और व्यापार संघ के संस्थापक महामंत्री डा ब्रजभूषण गोयल जैसे बुजुर्ग नेताआंें से विचार विमर्श कर व्यापार संघ की मजबूती के लिए आगे आकर काम करना चाहिए। यहीं संयुक्त व्यापार संघ के हित में होता वरन तो व्यापारी नेता संदीप गुप्ता ऐल्फा का यह कथन सही साबित हो जाएगा कि संयुक्त व्यापार संघ शून्य होता जा रहा है।

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