नगर निगम चुनावः मतदान के दिन कुछ विशेष क्या चल रहा है?

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मेरठ 22 नवंबर। सुबह साढ़े सात बजे से मतदान शुरू होते ही समाचार पत्रों, इलैक्ट्रिोनिक व सोशल मीडिया के कार्यालयों में टेलीफोन की घंटी बजने लगी। हर बार फोन करने वालों का सिर्फ एक ही सवाल होता था क्या चल रहा है। कौन जीत सकता है। कहीं कोई हंगामा तो नहीं हुआ।

जानने के इच्छुक थे किसको पड़ रहे हैं मुस्लिम वोट
चुनाव परिणामों को लेकर तो मतदाताओं में जिज्ञासा थी ही लेकिन इससे ज्यादा हर व्यक्ति यह जानने के लिये इच्छुक था कि मुस्लिम मतदाता किसको वोट कर रहे हैं। क्योंकि सबका मानना था कि अगर मुस्लिम मत अगर किसी एक को पड़ जाएंगे तो वो चुनाव जीत जाएगा। अगर उनमे बटवारा हुआ तो भाजपा उम्मीदवारों को हराना किसी के लिये भी संभव नहीं था। सवाल पूछने के साथ ही कुछ नागरिक तो जवाब भी खुद ही दे रहे थे। कोई कह रहा था बसपा को मुस्लिम पड़ रहे हैैं तो कोई सपा के समर्थन में मतदान करने की बात कर रहा था।
कांग्रेस का मेैनेजमेंट नजर आया कमजोर
चुनाव परिणाम क्या होंगे यह एक दिसंबर को पता चलेगा। लेकिन वर्तमान में आज मतदान के दौरान जो माहौल देखने केा मिल रहा है उससे यह लग रहा है कि कांग्रेस, का चुनाव मैनेजमेंट सही प्रकार से नहीं हो रहा। कांग्रेस विचार धारा के कुछ लोगों का कहना था कि अगर उम्मीदवार पर पैसा नहीं था तो भी वो योजनाबद्ध तरीके से सोशल मीडिया के माध्यम से अपना प्रचार कर सकता था क्योंकि भले ही सरकार भाजपा चला रही हो मगर कांग्रेस का हर मोहल्ले में कार्यकर्ता और वोटर तो है हीं। अगर नेता और उम्मीदवार ने प्रचार से संबंध सामग्री सोशल मीडिया पर डाली होती तो वह घर घर तक पहुंच जाती।
रालोद ने क्यों उतारा उम्मीदवार
रालोद ने उम्मीदवार तो खड़ा किया लेकिन क्यों यह बात मतदान केंद्रों पर मतदाता एक दूसरे से पूछ रहे थे। इनमे ज्यादातर चैधरी चरण सिंह समर्थक और रालोद की विचार धारा से प्रभावित दिखाई दे रहे थे। इनका कहना था कि अपना वजूद खड़ा करने के लिये अगर मेयर का उम्मीदवार उतारा था तो उसकी व्यवस्था करनी चाहिये थी। नामांकन कराने के बाद न कोई प्रचार, और सब जगह न बस्ते पहुंचाने से ऐसा लगता है कि रालोद नेता सिर्फ खानापूर्ति चुनाव लड़ने की कर रहे थे। वरना जो स्थिति रालोद उम्मीदवार की दिखाई दी वैसा नहंी होता क्योंकि शहरांे में भी रालोद विचाराधारा के कुछ लोग तो है ही। देहात के क्षेत्रों मंे वार्डों में उसके उम्मीदवारों की मजबूत स्थिति होनी चाहिये थी। जो नजर नहीं आ रही थी।
घर घर तक नहीं पहुंच सकी वोटरों की पर्चिंया
पूर्व की भांति इस बार घर घर में पार्षद मेयर पद के उम्मीदवारो की पर्चिंयां ना पहुंच पाने की शिकायतें वोट डालने आए और राजनैतिक दलों के कैंपों पर पर्चियां लेने के लिये खड़े मतदाताओं से सुनने को मिली। इनमे से कुछ का कहना था कि शोर तो खूब मचा। ठोस काम पर्चियां बांटने का पूरी तौर पर किसी ने नहीं किया। जो भी चुनाव जीतेगा वो अपनी मेहनत की वजह से नहीं बल्कि मतदाताओं के पास कोई ओर विकल्प मौजूद न होने की वजह से ही जीत सुनिश्चित होगी चाहे वो किसी की भी हों।
वोट मांगने नहीं पहुंचे उम्मीदवार व समर्थक
चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी दावे तो बहुत करते नजर आए मगर एक मेयर पद के उम्मीदवार ने तो अखबारों मे ंविज्ञापन छपवाकर मतदाताओं से उन तक न पहुंच पाने की बात कबूल करते हुए कहा कि वो वोट हमें ही दें। लेकिन बाकी उम्मीदवार भी घर घर तक नहंी पहुंच पाए। कई जगह कार्यकर्ताओं ने भी मतदाताओं से संपर्क करने के बजाए कार्यालयों में बैठकर लंबे वादे करने में समय गुजारा इसका
खुलासा उस समय हुआ जब तमाम मतदान पोलिंग बूथों पर सुने गये शब्द की इस बार तो कोई वोट मांगने ही नहीं आया।
मैं सबसे सुंदर उम्मीदवार को ही वोट दूंगा
एक लगभग 40 साल के पढ़े लिखे मतदाता की बात सुनकर तो शास्त्रीनगर के एक बूथ पर सबकी हसी छुट गई। दो लोग वोट डालने पहुंचे। एक ने पूछा किसे वोट दोगे तो दूसरा बोला काम तो कोई करता नहीं। हारे या जीते मेैं तो अपना वोट सबसे सुंदर प्रत्याशी को दूंगा। उसकी यह बात सुनकर वहां मौजूद सब लोग हसने लगे।
नई कालोनियों में मतदान को लेकर नहंी था जोश
मतदान के प्रति नगर निगम क्षेत्र के आबादी वाले क्षेत्रों में तो काफी उत्साह दिखाई दिया। क्योंकि यहां रहने वाले मतदाता खुद भी वोट डालने जा रहे थे और उम्मीदवारों के समर्थक भी उन्हे वोट डालने के लिये प्रोत्साहित कर रहे थे। लेकिन शहर के बाहरी इलाकों में बसी कालोनियों में कई हजार लोग रह रहे हैं। कम या ज्यादा अथवा किसी के कहने से वोट तो यह डालने पहुंचे लेकिन इन्हे ले जाने का निष्ठापूर्ण प्रयास करता कोई नजर नहीं आया। हां इनसे संबंध बूथों में से एक पल्लवपुरम के मतदान केंद्र पर यह चर्चा भी सुनने को मिली उससे लगता था कि ज्यादातर वोट भाजपा उम्मीदवार को पड़ रही होंगी। असलीयत क्या है वो मतगणना के बाद ही पता चल पाएगा।
छावनी के खुले बाजार, शहर में रहा बंद: छावनी क्षेत्र के आठो वार्डाें में मतदान नहीं होना था।
इसलिये यहां सभी दुकाने पूर्व की भांति खुली। और आवागमन भी रोजमर्रा की तरह बना रहा। लेकिन नगर निगम क्षेत्र में मतदान के कारण बाजार, कारखाने पूर्णतः बंद रहे। मगर सब वोट डालने गए ऐसा नहीं है। कोई छुटटी का लाभ उठाने के लिये कहंी घूमने चले गए। तो कुछ लोग सड़कों पर क्रिकेट आदि खेलते नजर आए।
समर्थक बांट रहे थे पर्चें
कई स्थानों पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर स्कूटर व मोटर साइकिल पर सवार नौ जवानांे द्वारा अपने अपने उम्मीदवारों के समर्थक के पर्चें पोलिंग बूथों के आसपास उड़ाए जाने की खबरें मोबाइल पर नागरिकों द्वारा दी गई।

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