प्रधानमंत्री दें ध्यान, पर्वतीय क्षेत्रों में लगी कागज उत्पादन मिलें एनपीए की आड़ में कुछ लोग कर रहे हैं करोड़ों की कमाई

0
248

नई दिल्ली/मेरठ, 13 अक्टूबर (विशेष संवाददाता) केंद्र सरकार द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देने और वहां के नागरिकों को व्यवसाय के संसाधन सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जम्मू-कश्मीर आदि पहाड़ी प्रदेशों में उद्योग लगाने के लिए स्थानीय नागरिकों के साथ ही बताते हैं कि बाहरी लोगों को भी काफी प्रोत्साहन और सब्सिडी तथा बैंकों के ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नियम निर्धारित किए गए थे। जिसके चलते इन क्षेत्रों में उद्योग लगाने वालों की जानकारी अनुसार बाढ़ सी आ गई और परिणामस्वरूप तमाम तरह की फैक्ट्रियां लगाने के लिए व्यापारी आगे आए और जिन्हें उद्योग का तर्जुबा था उन्हंें भी और जिन्हें नहीं था उन्हें भी पूरी सुविधा मिली और फैक्ट्रियां लग गई। उद्योग की चिमनियों से धुंआ निकला और कर्मचारियों का आवागमन शुरू हुआ। कुछ लोग जो तर्जुबेकार थे वो अपना काम चलाकर ले गए और मुनाफा कमाने लगे लेकिन जिन्हें कोई तर्जुबा नहीं था और लेकिन सुविधाओं के लालच में बड़े उद्योग लगा बैठे। और समस्याओं में घिर गए।
बताते हैं कि यहीं से कुछ कानून और नियमों के जानकारों पुराने उद्योगपतियों ने हाथ पैर फैलाने शुरू किए और साम दाम दंड भेद की नीति अपनाकर उनके संचालकों को परेशानी से निकालने का लालच देकर मामूली से दामों में बताते हैं कि बैंकों से सांठ गांठ कर बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां हथिया ली गई। इस संदर्भ में आज देश की राजधानी दिल्ली में निवास करने वाले एक सज्जन से जब बातचीत हुई तो उन्होंने मौखिक रूप से जो खुलासा किया उसके अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि पर्वतीय प्रदेशों में लगी ज्यादातर पेपर मिलें इस क्षेत्र की जानकारी रखने और बैंकों के कर्ता धर्ताओं से सांठ गांठ के चलते एनपीए की आड़ में तमाम कागज उत्पादन मिलें अपने नाम करा ली गई और इस क्रम में बताते हैं कि सैंकड़ों और हजारों करोड़ी की पेपर मिलें एनपीए के हिसाब से सांठ गांठ कर कुछ लोगों ने सस्ते दामों पर हथिया ली और अब हर वर्ष करोड़ों रूपये कमा रहे हैं। और सरकार की आम आदमी को उद्योग लगाने के लिए बढ़ावा देने की योजना को पलीता लगाया जा रहा है। चर्चा है कि कागज उत्पादन मिलों के लिए नियमों का पालन भी इससे संबंधित अधिकारियों की जी हजूरी कर उन्हें सुविधाओं के सब्जबाग दिखाकर एक प्रकार से बैंकों की रकम के आधार पर मिलों को अपने नाम कराने वाले अब करोड़ों में खेल रहे हैं। और सरकार की जिन योजनाओं का लाभ लेने के लिए वे पात्र भी नहीं बताए जाते उनका लाभ इनके द्वारा उठाया जाना बताया गया है। कुछ जानकारों का कहना है कि बैंकों के एनपीए के तहत दूसरों के नाम ट्रांसफर हुई या अन्य तरीकों से सहमति के आधार पर फैक्ट्रियां चला रहे हैं उनकी और नियमों का पालन इनमें हो रहा है या नहीं कहीं यह प्रदूषण को बढ़ावा देने के साथ साथ सरकार को तो कोई आर्थिक नुकसान कागजी खानापूर्ति के चक्रव्यूह मंे फंसाकर तो नहीं दे रहे हैं इसकी जनहित में प्रधानमंत्री जी और पर्वतीय प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को जल्द से जल्द जांच करानी चाहिए जिससे सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों को ही मिले। कुछ चालाक टाइप के लोग संबंधित कुछ अफसरों से मिलकर उन पर अपना अधिकार ना जमा पाएं।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

twenty − 13 =