पत्रकार बनकर सीएम पर आतंकी हमले को लेकर अलर्ट जारी; हर जिले में सूचना विभाग बनाये अधिकृत पत्रकारों के फोटोयुक्त कार्ड

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दावत खाने और कुछ लोगों को महिमामंडन व दलाली करने वालों पर सक्ति से लगाई जाए रोक

मेरठ, 14 फरवरी। कठिनाइयों और समस्याओं के वाबजूद भी पत्रकारिता का पेशा सबसे सम्माजनक व प्रतिष्ठित माना जाता है और इसके नाम पर आप थोड़ा सा प्रयास करके किसी से भी मिल सकते है और अपनी बात कह सकते है और इसीलिए शायद पिछले कुछ वर्षो में पत्रकारों की संख्या में अभूपूर्व वृद्वि होने की चर्चाऐं सुनने और पढने को मिलता है। और इसमें कोई हर्ज भी नजर नहीं आता है अगर इस क्षेत्र में सक्रिय व्यक्ति सही मायनों में पत्रकारिता के लिए सम्पर्पित हो और उसके द्वारा संकल्ति समाचार कहीं प्रकाशित हो या अधिकृत समाचार चैनेलों और वेबसाइडों पर दिखाई देते हो वही सही मायनों में पत्रकार है लेकिन जितना देखने और सुनने को मिलता है उसके अनुसार समाचार तो कम के छपते है मगर पत्रकार सम्मेलनो में और इस नाम पर वीआईपीयों से मिलने वालों की संख्या ज्यादा नजर आती है। और कभी कभी तो जैसे कि समाचार पढने और सुनने को मिलते है उससे पता चलता है कि कई प्रकार के अपराधिक क्षेत्रों में सक्रिय व्यक्ति भी विभिन्न तरीके अपनाकर अपना स्थान बनने की कोशिश करते है।

और इसके सबसे बडे प्रमाण के रूप में 13 फरवरी 2020 के अमर उजाला के 13 फरवरी के अंक पृष्ठ दो पर एक काॅलम में पत्रकार बनकर सीएम पर हमला कर सकते है आतंकी शीर्षक से छपे गोरखपुर डेट लाईन से छपे समाचार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जान को खतरा है। इसके लिए आईबी व अन्य खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों के मुताबिक आतंकी पत्रकार बनकर गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री पर हमला कर सकते हैं। इस सूचना के बाद पुलिस प्रशासन ने शहर के पत्रकारों की सूची ली और एलआईयू जांच कराने के बाद सबका फोटोयुक्त पहचान पत्र बना दिया हैं। अब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की कवरेज के लिए गोरखनाथ मंदिर में वहीं पत्रकार प्रवेश कर सकेंगे, जिनके पास पुलिस से जारी पहचान पत्र रहेगा। दो महीने पहले खुफिया एजेंसियों ने गोरखनाथ मंदिर में ही मुख्यमंत्री पर हमला होने की अलर्ट जारी किया था। और मंदिर के आसपास हथियारबंद अतिरिक्त फोर्स भी बढ़ा दी गई। दरअसल, सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में पत्रकारों से सहजता से मिलते है। इसका फायदा आतंकी उठा सकते है। वे पत्रकारों के बीच में शामिल होकर जानलेवा हमला कर सकते हैं। एसएसपी डाॅ0 सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि सीएम के कार्यक्रम में उन्हीं पत्रकारों की एंट्री होगी, जिनके पास पहचान पत्र होगा।

बताते चले कि पूर्व में आॅल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना द्वारा व सोशल मीडिया एसोसिएशन द्वारा कई बार फर्जी पत्रकारों की बढती संख्या पर रोक लगाने की मांग कई की मंचों के माध्यम से की जाती रही है। लेकिन सही प्रकार से समाचार पत्रों का प्रकाशन व पत्रकारिता करने वालो का विभिन्न प्रकार से उत्पीडन करने में अग्रिण और अपनी जिम्मेदारियों को पुरा करने के फिसड्डी यूपी सूचना विभाग के ज्यादातर अधिकारियों व आरएनआई तथा डीएवीपी के अफसरों द्वारा इस ओर इससे होने वाले नुकसान पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिस कारण फर्जी अखबारों, चैनेल व सोशल मीडिया में सक्रिय ऐसे लोगों की संख्या बढती जा रही है जिनका पत्रकारिता से कोई सम्बंध नहीं हैमाननीय मुख्यमंत्री यूपी की सुरक्षा को लेकर एक बार यह बिन्दु अब और उठ खड़ा हुआ है मुझे लगता है कि इस पर व्यापक रूप से प्रभावी तरीके से फर्जी पत्रकारों व समाचार पत्र संचालकों की संख्या को रोकने के लिए होना चाहिए काम। इस संदर्भ में कुछ सुझाव मेरे द्वारा दिये जा रहे है।

1. समाचार पत्र का नया शीर्षक देते समय आवेदक के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त की जाए।
2. दूसरे पत्रकार बनने के इछुक व्यक्तियों को जिस प्रकार मान्यता देते समय जांच कराई जाती है उसी प्रकार मीडिया संस्थानों के मालिक भी इच्छुक व्यक्यिों का पुलिस बरिफीकेशन कराये।
3. जिस संवाददाता की खबरे कहीं ना छपती हो उसकी मान्यता और संवाददाता कार्ड सरकारी हो या प्राईवेट वो एक समय सीमा के बाद उसका कार्ड समाप्त किया जाए।
4. फर्जी पत्रकार व अखबारों को बढ़ावा देने वालों को पहचानकर उनके विरूद्व हो कार्यवाही।
5. सिर्फ फेसबुक पर समाचार डालकर पत्रकार बताने वालों को ना दी जाए किसी भी प्रकार की मान्यता।क्योंकि देखने में आता है कि कुछ लोग फेसबुक पृष्ठ बनाकर और उस सौ पचास लोग जोडकर कई व्यक्ति अपनेआपको पत्रकार बताने लगते है और फिर संवाददाताओं सम्मेलनों में दवाते खाने अथवा कुछ लोगों को महिमामंडन करने या पत्रकार होने का दावा करते हुए और दलाली का काम करने वाले नियम विरूद्व कामों में संलग्न इन व्यक्तियों को रखा जाए इससे दूर, क्योकि ऐसे ही लोगों के कारण पत्रकार सम्मेलनों में भिड़ बड़ने लगी है और संधिग्ध व्यक्तियों का पत्रकारिता व पत्रकार सम्मेलनों में इनके प्रवेश की संभावनाएं प्रबल हो जाती है शायद इन्हीं बिन्दुओं की तरफ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सुरक्षा को लेकर आईबी व अन्य खुफिया एंेन्सियों द्वारा अलर्ट जारी किया गया है।
मेरा केंद्रीय व सूचना मंत्रियों से आग्रह है कि वो अपने काम के प्रति लापरवाह सूचना विभाग आदि के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देेश दे कि सभी जिलो के सूचना अधिकारी पूर्ण जानकारी प्राप्त कर या इलैक्ट्राॅनिक चैनलों, वेबसाइड़ो, समाचार पत्रों के किसी को भी अपने यहां नियुक्त करने में सक्षम अधिकारियांे के द्वारा जारी अधिकृत नियुक्ति पत्र प्राप्त व्यक्तियों के फोटोयुक्त कार्ड बनाऐ और स्पष्ट कर दे कि कोई भी वीआईपी अथितियों व अफसरों के द्वारा आयोजित किये जाने वाले पत्रकार सम्मेलनों में इसके अलावा प्रवेश नहीं कर पायेगा।

क्योंकि अधिकृत आंकड़ तो उक्त लाईन लिखे जाने तक तो प्राप्त नहीं थे लेकिन पत्रकारों की आड़ में कई प्रकरण पूर्व में अपराधिक प्रवृति के व्यक्तियों के द्वारा अंजाम दिये जाने से इनकार नहीं किया जा सकता।

(प्रस्तुतिः रवि कुमार बिश्नोई)

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