विश्व डाक दिवस पर आरकेबी फांउडेशन द्वारा पोस्टमेन महावीर सिंह को किया सम्मानित

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दूर दराज के क्षेत्रों में अपनों को सूचना पहुंचाने का काम समय समय पर अलग अलग तरिकों से होता रहा है पुरानें समय में कबूतर डाक पहुंचाने का माध्यम थे तो फिर गोपनीय सूचनाएं एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने का काम ईशारों गानों व नौंटकी आदि में प्रस्तुत कार्यक्रमों से दी जाने लगी और फिर आया डाकियों का दौर शुरू हुआ इस दौरान मुगल शासन काल के बादशाह शेहशाह सूरी द्वारा अपने जमानें में सैनिकों से डाक बंटवाने का काम शुरू किया। बाद में देश ही राजधानी दिल्ली में सर्वप्रथम 1855 में अंग्रेजो ने डाकसेवा शुरू की और उनका पहला आॅफिस कश्मीरी गेट पर बना जिसें जनरल पोस्ट आॅफिस जीपीओं का नाम दिया गया। 1885 में जीपीओ बिल्डिंग का निर्माण कराया गया। इससे पूर्व 1855 में पुरानी बिल्डिंग में मुख्य डाकपाल की तैनाती हुई। यहां से अपने क्षेत्र के लगभग 5 लाख लोगों को डाक बांटी जाती थी ऐसा देश के हर शहर और कस्बंे में होने लगा यहां खुले डाक खानों से डाकियां चिट्ठी लेता और साईकिल पर सवार होकर दूर दराज के गांवों तक चिट्ठी लेकर जाता और उसके आतें ही शोर मच जाता डाकिया डाक लाया। खुशियों भरा संदेश और अपनों की खबर लाया। तो डाकियां भी सारक्षता कम होने की वजह से किसी को मुफ्त में तो किसी से कुछ पैसे लेकर डाक पढ़कर भी सुनातें थे।
इस सोशल मीडिया के आधुनिक युग में जब एक सेंकेंड में मेल, मैसेज, वाट्सऐप आदि के माध्यम से खबरें कुछ ही सेंकेंडों में दुनियां के कोने कोने तक पहुंचायी जा सकती है ऐसे समय में भी डाक आना भले ही कम हो गयी हो लेकिन अपने देश के देहातों में ही नही शहरों में भी डाकियें का इंतजार आज भी हमें रहता है और रक्षा बंधन और दशहरा तथा भाई दोज के दौरान तो बहन और भाई सहित परिवार के अन्य सदस्य भी डाकियें का बेताबी से इंतजार करते है क्योकि उसके द्वारा लाये जाने वाले लिफाफें में बहन की भेजी गयी राखियां नौरतें एवं रोली चावल तिलक के प्राप्त करके की त्यौहार दूर दराज में रह रहे भाई बहन मनातें है गत दिवस 10 अक्टूबर को दुनियाभर में विश्व डाक दिवस मनाया गया और डाकियों की उपयोगिता और ईमानदारी तथा समय की पाबंदी के लिए इनकी तारिफ और प्रसंशा की गयी क्योकि आंधी हो तुफान गर्मी हो बरसात या जाड़ें डाकियें का साईकिल पर सवार होकर अगर डाक है तो उसे सही व्यक्ति तक पहुचांना अनिवार्य है और यह काम आज भी हमारे डाकिये भाई पूरी शिद्दत के साथ कर रहे है। आज राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन द्वारा डाकियों की सेवाओं की प्रसंशा करते हुए यूपी के ऐतिहासिक शहर मे के बड़े डाक खाने में पोस्टमेंन के पद पर 1980 से कार्यरत बीतें 2007 से वेस्ट एडं रोड मेरठ कैंट सहित आसपास के क्षेत्रों में डाक बांट रहे हंसमुख और मिलन सार पोस्टमेंन (डाकियें) महावीर सिंह को बुके भेंट कर और माला पहनाकर सम्मानित करते हुए उनकी सेवाओं की सराहना की गयी। चित्र में आरकेबी फांउडेशन के राष्ट्रीय महामंत्री, मजीठिया बोर्ड यूपी के सदस्य आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम के चेयरमेन अंकित बिश्नोई सोशल मीडिया एसोसिएशन के संस्थापक श्री रवि कुमार बिश्नोई, सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स व्यापारी नेता सचिन कंसल बाला जी मंदिर, वरिष्ठ पत्रकार इंद्रमणि, पवन बंसल, कादिर खान, विनोद कुमार, ग्राफिक्स डिजाईनर नताशा वर्मा आदि द्वारा महावीर सिंह को बुकें भेंट कर और माला पहनाकर सम्मानित किया गया और महावीर सिंह सहित दुनियाभर में इस काम में लगे सभी पोस्टमेंन व डाकियों को शुभकामनाएं दी गयी।

 

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