Friday, July 19

चारों सदनों में रालोद का हुआ प्रवेश, केन्द्र व यूपी में बने मंत्री, निरंतर मजबूत हो रहे है जयंत चौधरी, कई और प्रदेशों में फराह सकता है पार्टी का झंण्डा

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व्यापार हो राजनीति या समाजसेवा अगर उसका संचालनकर्ता सुलझे विचारों का समाजहित में सोचने और समयनूकुल निर्णय लेने में सक्षम हो तो उसे आगे बढ़ने में कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। यह बात वर्तमान समय में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री श्री जयंत चौधरी पर सही उतरती है।
धामा बोले
वरिष्ठ अधिवक्ता अर्न्तराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त रोटेरियन श्री गजेन्द्र सिंह धामा की यह बात भी इस मामले में सही है कि जयंत चौधरी परिस्थितियां कुछ भी हो समयानुकूल निर्णय लेने में पीछे नहीं रहते है और जिम्मेदारियों का निर्वाह और पार्टी को ऊंचाईयों की ओर ले जाने का इरादा मजबूत है। और उन्हें सफलता भी मिल रही है।
स्मरण रहे कि जब जयंत चौधरी ने राजनीति में कदम रखा था तो पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के प्रशसंकों का यह कहना होता था कि अरे चौधरी साहब के पौते में तो उनकी ही झलक नजर आती है। वो बात भी आजकल बिल्कुल सही नजर आ रही है। क्योंकि पिछले कई साल राजनीति के क्षेत्र में शून्य पर रहकर उनके द्वारा इस क्षेत्र में काफी विचार और गहन समीक्षा भी की गई फिर अपने सहयोगियों के सुझाव पर राजनीति की विचारधारा तय की गई। और तब से जयंत चौधरी हबिव पेंटर की कब्बाली बहुत कठिन है डगर पनघट की कैसे मैं भर लाऊं पनूवा से मटकी। के समान इस राजनीति की कठिन डगर पर सोच समझकर जो चलना शुरू किया तो निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर तो हो ही रहे है धीरे धीरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर अन्य प्रदेशों में भी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी का जो जनाधार बिखर रहा था उसे समेटने का काम अपने सहयोगी मीडिया सचिव श्री सुरेन्द्र शर्मा यूपी के पूर्व सिंचाई मंत्री डा0 मैराजुद्दीन पूर्व विधायक श्री राजेन्द्र शर्मा जैसे वफादार लोगों की राय से आगे बढ़ते हुए जो अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की सोच और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बागपत से पुराने कार्यकर्ता डा0 राजकुमार सांगवान और बिजनौर से चंदन चौधरी को लोकसभा टिकट देकर शौहरत और प्रशंसा तथा विश्वास प्राप्त करने के अतिरिक्त दोनों को जीताने में भी सफल रहे। वो अपने आप में महत्वपूर्ण है।
बताते चले कि लगभग दो वर्ष पूर्व जब उप्र विधानसभा के चुनाव हुए तो सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ कदमताल मिलाकर उन्होंने चुनाव लड़ा और पहला राजनीति का सुखा आठ विधायक को विधानसभा में पहुंचाकर खत्म किया। उसके बाद अखिलेश यादव ने गठबंधन और संबंधों को प्राथमिकता देते हुए जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा परिणाम स्वरूप दो सदनों में उनका प्रवेश हुआ। आगे गठबंधन के परिणाम क्या होते वो अलग बात है लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को पिछले कई दशक से भारत रत्न देने की जो मांग उनके समर्थकों द्वारा की जा रही थी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा उसे पूरा किया गया। परिणाम स्वरूप यह इतना बड़ा काम हुआ कि जयंत चौधरी भाजपा से गठबंधन करने की बात नकार नहीं पाए। राजनीतिक दृष्टिकोण से इसे कोई कुछ भी कह ले मगर उससे उनके लोकसभा में दो सांसद डा0 राजकुमार सांगवान और चंदन चौधरी पहुंचे और केन्द्र की सरकार के गठन में उन्हें मोदी सरकार में केन्द्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास दो मंत्रालयों में राज्यमंत्री का दर्जा मिला जिसमें वो एक में स्वत्रंत प्रभार मंत्री भी बनाये गये।
समयानुसार निर्णय लेने और उस पर अमल करने में भी श्री जयंत चौधरी किसी से पीछे नहीं रहते। बीते दिवस माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी के निवास पर पहुंचकर जहां उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया वहीं जन्मदिन की बधाई भी दी गई।
किसी के आने जाने से
अब चर्चा करें भाजपा से गठबंधन व अन्य कुछ कारणों से नाराज शाहिद सद्दिकी रोहित जाखड़ प्रशांत कन्नौजिया और फिर भपेन्द्र चौधरी रालोद छोड़कर चले गये राजनीति में छोटे से छोटे कार्यकर्ता का पार्टी के प्रति सर्मपण बड़ा ही महत्वपूर्ण होता है लेकिन समय की नजाकत और लिये गये निर्णय का सार न समझकर अगर कुछ लोग जाते है तो उसे पार्टी कमजोर नहीं होती क्योंकि कुछ गये तो कुछ नये आयेंगे भी। परेशानी जब होती है जब कोई विधायक व सांसद पार्टी छोड़कर जाए लेकिन यहां कुछ ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि अगर किसी को भाजपा रालोद गठबंधन से नाराजगी होनी चाहिए थी तो वो मेरठ के सिवासखास विधानसभा क्षेत्र से विधायक गुलाम मौहम्मद आदि को होनी चाहिए थी मगर वो आज भी रालोद के साथ खड़े है।
सुरेन्द्र शर्मा बोले
रालोद के राष्ट्रीय मीडिया सचिव पूर्व कार्यवाहक उपनिदेशक सूचना रहे श्री सुरेन्द्र शर्मा के इस कथन में दम नजर आता है कि भाई साहब जयंत चौधरी जी बहुत सोच समझकर निर्णय लेते है और जब लेते है तो उन्हें आगे बढ़ने और उस पर अमल करने से कोई नहीं रोक सकता। और पिछले दो साल में उन्होंने जो निर्णय लिये उससे पार्टी मजबूत तो हुई ही राजस्थान की पूर्व सरकार में रालोद का विधायक भी जीता था और अब हरियाणा राजस्थान बिहार उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में पार्टी के और मजबूत होने की संभावना से इंनकार नहीं किया जा सकता।
कुलमिलाकर मेरे हिसाब से जयंत चौधरी राजनीति की डगर पर बिलकुल सही और संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहे है चारों सदनों में उनका प्रतिनिधित्व है यूपी और केन्द्र में मंत्री है और यह करिश्मा सिर्फ दो साल की अथक परिश्रम का परिणाम है। मैं विश्वास से कह सकता हूं कि डा0 राजकुमार सांगवान जैसे साथियों डा0 मैराजुद्दीन आदि के सहयोग से जयंत चौधरी जी अपने दादा पूर्व प्रधानमंत्री और जन नायक रहे स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी का जो राजनीतिक रूतबा था वो प्राप्त करने और पार्टी को आगे बढ़ाने में सफल रहेंगे अगर इसी प्रकार से अपने साथी चौधरी चरण सिंह के जमाने से सक्रिय त्रिलोक त्यागी और अपनी धर्मपत्नी चारू चौधरी जी के सहयोग से पार्टी का झंण्डा हर क्षेत्र में बुलंद करने में सफल हो सकते है क्योंकि पार्टी प्रवक्ता श्री मुकेश जैन के इस कथन में वजन है कि लोकसभा में डा0 राजकुमार सांगवान और चंदन चौधरी जी को टिकट देकर जयंत भाईसाहब ने कार्यकर्ताओें में विश्वास और समर्पण की भावना को मजबूत किया है।
(प्रस्तुतिः अंकित बिश्नोई सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महासचिव मजीठिया बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य संपादक व पत्रकार)

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