Friday, July 19

350 करोड़ के घोटाले को लेकर थाने में राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय-उपाध्यक्ष का हंगामा

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मेरठ 09 मार्च (प्र)। जिला पूर्ति कार्यालय से जुड़े 350 करोड़ के राशन घोटाले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे हैं। शुक्रवार को राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी इसको लेकर थाने पहुंचे तो हड़कंप मच गया।
उन्होंने विवेचक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। माहौल गर्माता देख इंस्पेक्टर थाने से खिसक लिए और सीओ को मौके पर आना पड़ा। सीओ अभिषेक तिवारी ने 10 दिन के भीतर जांच कराते हुए निष्पक्ष कार्रवाई का सांसद को भरोसा दिलाया, तब जाकर मामला शांत हुआ।

गत दोपहर राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी सिविल लाइन थाने जा पहुंचे। उनके साथ पार्टी के नेता संजय सम्राट भी रहे। सांसद ने इंस्पेक्टर रतनेश सिंह को बताया कि वह सपा सरकार के कार्यकाल में जिला पूर्ति कार्यालय में हुए 350 करोड़ रुपये के राशन घोटाले में दर्ज मुकदमे के सिलसिले में जानकारी लेने आए हैं।

मामले की विवेचना उप निरीक्षक उत्तम सिंह कर रहे हैं, इसलिए इंस्पेक्टर ने उप निरीक्षक को बुला लिया। जैसे ही उप निरीक्षक ने बताया कि मामले में फरार आरोपी जिला पूर्ति कार्यालय का कंप्यूटर ऑपरेटर शाहनवाज गिरफ्तार कर लिया गया है तो सांसद नाराज हो गए। सांसद ने पूछा कि क्या शाहनवाज से पुलिस ने पूछताछ की ? उप निरीक्षक ने रिमांड लेने की बात कही तो सांसद और भड़क गये।
उन्होंने सवालों की बौछार कर दी। आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील मामले में पुलिस ‘खेल’ करने में लगी है। बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास हो रहा है। देखते ही देखते मामला गरमा गया। इंस्पेक्टर मौका पाकर थाने से निकल गये । इसके बाद राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने एसएसपी रोहित सिंह सजवाण को फोन मिलाकर नाराजगी जताई।
कुछ ही देर में सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी वहां आ गए और सांसद से बात की। करीब डेढ़ घंटे तक थाने में हड़कंप मचा रहा। बाद में सीओ ने 10 दिन के भीतर निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की बात कहते हुए मामला शांत करा दिया।

यह था पूरा मामला
सपा सरकार के कार्यकाल में राशन घोटाले का मामला उठा, जिसकी डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से शिकायत की भाजपा सरकार बनते ही एसआईटी का गठन हुआ, जिसकी जांच में 350 करोड़ के राशन घोटाले का राज खुला सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। विभागीय अफसरों के अलावा कम्प्यूटर ऑपरेटर शाहनवाज का नाम सामने आया। वर्तमान में थाने में जांच चल रही है, | जिसमें एक सप्ताह पहले पुलिस ने शाहनवाज को गुपचुप गिरफ्तार कर बिना पूछताछ किए जेल भेज दिया था।

 

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