आखिर क्यों नहीं कराए जा रहे कैंट बोर्ड के चुनाव, मेरठ कैंट बोर्ड के कार्यकाल का दूसरा अवधि विस्तार

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मेरठ, 13 जनवरी (प्र) मेरठ कैंट बोर्ड के कार्यकाल का अब दूसरा अवधि विस्तार (एक्सटेंशन) बुधवार से शुरू हो गया। इससे पूर्व 12 जुलाई को कार्यकाल समाप्त होने पर रक्षा मंत्रालय ने छह माह का एक्सटेंशन दिया था। छह माह में भी चुनाव न होने की स्थिति में अब दूसरा एक्सटेंशन मिल गया है। अब इस अवधि में चुनाव हुआ तो ठीक, अन्यथा रक्षा मंत्रालय के आदेश के तहत आगे की कार्रवाई होगी।
मेरठ कैंट के वर्तमान बोर्ड का जुलाई 2015 में गठन हुआ था। तब बीना वाधवा उपाध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। 2019 में सात सदस्यों ने बीना वाधवा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटा दिया। उसके बाद विपिन सोढ़ी उपाध्यक्ष चुने गए।
इस बीच सत्ता परिवर्तन को लेकर अब बीना वाधवा भी भाजपा में आ गईं। 12 जुलाई 2020 को वर्तमान बोर्ड का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। कोरोना काल के कारण चुनाव न होने पर छह महीने के लिए एक्सटेंशन दिया गया। इस छह माह में भी चुनाव नहीं हुआ तो अब दूसरा एक्सटेंशन दिया गया, जो बुधवार से प्रारंभ हो गया।
चुनाव कराने की बजाय बार बार कार्यकाल बढ़ाए जाने को लेकर आज कैंट क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और आगामी चुनाव लड़ने तथा कुछ करने की इच्छा रखने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं में यह चर्चा जोरों पर सुनी गई कि जब सारे काम और सब जगह चुनाव हो रहे हैं तो कैंट बोर्ड के चुनाव ही क्यों टाले जा रहे हैं। कुछ का कहना था कि इससे अवैध निर्माणों को बढ़ावा मिल रहा है क्योंकि कुछ तो क्षेत्र के पार्षदों द्वारा किन्ही भी कारणों से निगाह बचाने और कुछ विभिन्न नामों से हो रहे अवैध निर्माणेां में सहयेाग करना बताते हैं। कोई भी विकास कार्यों की ओर विशेष ध्यान नहीं दे रहा। और ना ही ज्यादातरर पार्षदों के कार्य से जनता संतुष्ट है। ऐसी बाते कैंट क्षेत्र में खूब होती है।

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