शीलकुंज कालोनी को बदनाम करने के पीछे कौन? कमिश्नर साहब! शिकायतकर्ताओं की करायी जाए जांच,

0
1281

आरोप सिद्ध न हो तो उनके खिलाफ भी हो कार्रवाई ,देश की प्रमुख कालोनियों में से एक शीलकुंज में रहने से मिलता है सम्मान

मेरठ 26 जून। जब से होश संभाला तब से एक कहावत सुनते चले आ रहे हैं कि कुछ लोग जिस पेड़ की ढाली पर बैठते हैं उसे ही काटते हैं। उन्हे यह नहीं पता होता कि इसका नुकसान उन्हे ही होना है। आज कल यह कहावत मेरठ और उप्र की नहीं बल्कि देश की प्रमुख रिहायशी कालोनियों में से एक रूड़की रोड स्थित शीलकुंज में रहने वाले उन कुछ लोगों पर लागू होती है जो कालोनी को बदनाम करने के लिये अलग अलग प्रयास समय समय करते सुने जाते हैं।
बताया जाता है कि कुछ रख रखाव व कोलोनाईजर द्वारा जलापूर्ति सफाई हरियाली सेक्योरिटी और स्ट्रीट लाईट की सराहनीय व्यवस्था की गई हंैं। यहां पर खुली सोच रखने वाले निवाससियों का कहना है कि यह बेस्ट कालोनी हैं और ऐसी आसपास कोई कालोनी नहीं है जैसा माहोल और सुविधाएं यहां प्राप्त हैं ऐसा किसी दूसरी कालोनी में नजर नहीं आती चाहे वो सरकारी हो या गैर सरकारी।
बड़े बडे पार्क चैड़ी सड़कें बच्चों के लिये खुले जिम और झूलें अंतराष्ट्रीय स्तर के आधुनिक फव्वारे जहां नजर आते हैं उस कालोनी का नाम है शीलकुंज। इसका आकर्षण कितना है इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि पल्लवपुरम या डौरली स्कूल के समीप तथा दोनों तरफ से बने सुंदर गेट के अंदर जब कोई नया आदमी प्रवेश करता है तो वो एक ही बात दोहराता है कि कितनी सुंदर कालोनी है और रखरखाव बहुत अच्छा है और हरियाली का कोई मुकाबला नहीं यह बात किसी को बताने की आवश्यकता नहीं जब यहां किसी मकान का मुहुर्त होता है अथवा किसी अन्य धार्मिक समाजिक व घरेलू कार्यक्रम में उसके अतिथि आते हैं तो कालोनी की तारिफ करते नहीं थकतें। ज्यादातर तो अपनी आवश्यकता अनुसार वहां मकान या भूखंड या तो तुरंत ले लेते है या समय अनुसार व्यवस्था कर खरीद लेते हैं। ऐसे अनेकों उदाहरण यहां मिल सकतें हैं।
आश्चर्य की बात तो यह है कि जो उंगलियों पर गिने जाने वाले कुछ निवासी विभिन्न मुददों को लेकर बुराईयां करते है या नए आने वाले लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं उनमे से कुछ ने खुद यहां एक से ज्यादा मकान या प्लाट ले रखे हैं।
उसके बावजूद विभिन्न माध्यमों से कालोनी को बदनाम किये जाने की कोशिश के पीछे इनका उददेश्य क्या है अथवा उन्हे कोैन उकसाता है यह तो यही जानते होंगे। मगर यह किसी से छुपा नहीं की इनके ही मकानों की कीमत इनके इस हताश से घटती है इनका सम्मान शीलकुंज जैसी कालोनी में निवास करने के नाम पर प्राप्त होता वो भी खत्म हो जाता है।
पिछले लगभग 95 साल से कुछ लोग ऐसे हैं जो भी कालोनी के हित मे बात करता है तो उससे मारपीट करने को तैयार हो जाता है और यह भी दर्शाते हैं जैसे पूरी कालोनी के मालिक वही हो गए। और इनका प्रयास रहता है कि जो भी काम यहां हो इनकी मर्जी से या अनुमति लेकर हों। यह लोग ऐसा करते हुए भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति की अपनी एक अलग पहचान है और व्यवस्था हैं। वो जो करना चाहता है अपनी मर्जी से करेगें। इनकी अनुमति की उनको क्यों आवश्यकता पड़ेगी ?
बीते दिनों कुछ लोगों की कालोनी को बदनाम करने की मुहिम के खिलाफ मेरठ मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार और फिर एमडीए वीसी साहब सिंह, से कालोनी निर्माण कर्ता इंडस वैली प्रोमोटर लिमिटेड तथा रखरखाव करने वाली कंपनी बीएनबी कम्यूनिकेशन का एक प्रतिनिधि मंडल मिला और प्रयोजित तरीके से शिकायत करने वालों की असलीयत बताई तथा यह भी अवगत कराया कि कुछ लोग रख रखाव शुल्क देने को तैयार नहीं हैं। और वो उनसे मांगा न जाए इसलिये वह दबंगई दिखाते हैं। प्रतिनिधि मंडल ने इनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठायी है। जिससे कालोनी के अन्य निवासी शांतिपूर्ण माहौल में जीवन यापन कर सकें।
मेरठ मंडलायुक्त जी इस कालोनी में निवास करने के लिये जमीन व भूखंड खरीदने हेतु हर व्यक्ति प्रयत्नशील रहता है क्योंकि यहां महिलाओं के लिये पूर्ण सुरक्षा, बच्चों के खेलने की व्यापक व्यवस्था के साथ साथ पर्यावरण की शुद्धता इतनी है कि कुछ निवासियों का कहना है कि अगले 25 साल तक यहां का पर्यावरण दूषित नहीं हो सकता। ऐसी सर्वगुण संपन्न कालोनी को बदनाम करने से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का जो एक सपना है कि हर व्यक्ति को रहने और सांस लेने के लिये स्वच्छ व प्रदूषित माहौल उपलब्ध हो वो भी आहत होता है कि यहां सरकार की निर्माण का भी पूर्ण पालन तो हो रहा है और माननीय प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जी की भी भावना को सकार कराने का प्रयास बिल्डर द्वारा किया जाता है मौखिक सूत्रों की माने तो इस कालोनी में कई उच्च स्तर के
प्रशासनिक स्तर के सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में सरकारी सेवा में उच्च पदों पर आसिन अधिकारी भी यहां रहते हैं। और मजे की बात तो यह है कि कुछ को छोड़कर सबसके द्वारा कालोनी को पूर्ण रूप से अच्छा बताया जाता है। यहां के रख रखाव और विल्डर की व्यवस्था की सब तारीफ करते हैं।
इसलिये अगर कोई शिकायत करता है तो पहले उसकी जांच करायी जाए कि उसकी मंशा क्या है और जो आरोप वो लगा रहे हैं उसमे कितनी सत्यता है और अगर शिकायत करता की मंशा गलत हो तो बद अमनी फैलाने के लिये उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए और यह भी देखा जाए कि जितना विकास शुल्क शीलकुंज के निर्माणकर्ता इंडसवैली गुु्रप के द्वारा जमा किया गया है वो अपने आप में उल्लेखनीय है।

रिटायर्ड वन अधिकारी के कार्यकाल की हो उच्च स्तरीय जांच
7 जून को मिलने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल ने कुछ नाम उच्चाधिकारियों को लिखित में दिये मौखिक चर्चा से यह भी पता चला है कि इस दौरान किसी भी रिटायर्ड वन अधिकारी का नाम प्रकाश में आया जो न तो शीलकुंज का निवासी है और न हीं उसका कोई इस कालोनी से नाता बताया जा रहा है। लेकिन वो अपने पूर्व कार्यकाल का नाम लेकर उच्चाधिकारियों से संपर्क कर इस कालोनी को बदनाम करने और कोलोनाईजर पर दबाव बनाने के लिये काफी प्रयास करता नजर आता है।
मौखिक जानकारी के अनुसार जो कालोनी निवासी रखरखाव का हर्जाना नहीं दे रहे और कालोनी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं अब यहां की देखरेख करने वाली कंपनी और बिल्डर ऐसे लोगों के लिये न्यायालय में जाने की सोच रहे बताए जाते हैं। यह भी पता चला है कि उक्त रिटायर्ड वन अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती हैं। जिसके तहत उसके पुराने कार्यकाल में हुए वृक्षारोपण व अन्य कार्याें की जांच के लिये भी मामला न्यायालय में दायर की जा सकती है।
जब से यमुना विकास प्राधिकरण के अधिकारी पीसी गुप्ता के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी गिरफ्तारी होने के साथ ही उनके पूर्व के कार्यकाल की जांच शुरू हुई तब से अब आम आदमी के लिये एक रास्ता खुल गया कि वो भी अगर चाहते किसी भी सेवानिवृत्त अधिकारी के कार्यकाल की जांच आसानी से करा सकते हैं। पिछले दिनों कुछ ऐसे आदेश उच्च स्तर पर भी हुए बताए जाते हैं कि अगर कोई अधिकारी रिटायर्ड हो जाता है तो भी उसकी फाईल खुल सकती है।

यह है शीलकुंज की व्यवस्था
*अंतराष्ट्रीय स्तर की स्वच्छ जलापूर्ति
*हर समय सैक्योरिटी उपलब्ध
*पथ प्रकाश की सराहनीय व्यवस्था
*बडे़ बड़े पार्क और हरियाली का सम्राज्य
*चैड़ी चैड़ी सड़कें
*अंतराष्ट्रीय स्तर के फुव्वारे
*बच्चों के खेलने हेतु सुविधाओं से युक्त पार्क
*बच्चों के लिये खुला जिम
*सुंदर बने भवन,
*हर समय सेवा के लिये उपलब्ध बीएनबी कंपनी
*ऐसी व्यवस्था और कहां?

शीलकुंज काॅलोनी के निवासियों सें हुए मौखिक संवाद पर आधारित

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here