Friday, July 19

चपरासी और नलकूप आपरेटरों को निगम ने बना दिया पटवारी

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मेरठ 09 जुलाई (प्र)। नगर निगम की अरबों रुपये कीमत की जमीन पटवारी न होने से लावारिस हालत में है। पटवारी के नाम पर चपरासी व नलकूप आॅपरेटर सरीखों को निगम की बेशकीमती जमीन की जिम्मेदारी सौंप दी हैं। इन्हें खुद नहीं पता कि निगम की कहां और कितनी जमीन है। कौन-सा रकबा है, क्या खसरा व उसका नंबर क्या है। जिन पार्षदों व पूर्व पार्षदों के पास निगम की जमीनों की पूरी कुंडली है, जब भी किसी जमीन के कागज की जरूरत होती है तो डमी पटवारी उनके पास भागते हैं। ज्यादातर जमीनों पर भूमियाओं ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। जिन जमीनों पर अवैध कब्जे कर लिए गए या करा दिए गए हैं, उन्हें खुर्द-बुर्द किया जा रहा है।

हालात कितने नाजुक हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद निगम अफसरों को नहीं पता कि कौन-सी जमीन उनकी है, जब जमीन की शिनाख्त ही नहीं है तो फिर अवैध कब्जों को हटाने की बात और दावे करना बेमाने है। नगर निगम अफसरों ने अरबों रुपये की कीमत की बेशकीमती जमीन डमी पटवारियों के भरोसे छोड़ी हुई है। आरोप है कि डमी पटवारियों ने निगम की जमीनों को खुर्द-बुर्द करने के अलावा कुछ नहीं किया। निगम अफसरों से जब उनकी जमीनों को लेकर सवाल किया तो वो बंगले झांकते नजर आए। निगम की सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को लेकर अनेक बार नगर निगम बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठकों में हो-हल्ला हो चुका है।

जब भी निगम की जमीनों पर अवैध कब्जों का मामला सदन में उठा, तब दो चार दिन तो अफसरों में हलचल देखी गई उसके बाद जमीनों का मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। आमतौर पर निगम अफसरों द्वारा प्रशासन से फोर्स न मिलने के नाम पर पल्ला झाड़ लिया जाता है। दरअसल, यह सारा काम पटवारी करते हैं और डिग्री धारक पटवारी के नाम पर स्टाफ तो नगर निगम में एक अरसे से नहीं है। यहां तक कि नगर पालिका जब से नगर निगम में कनवर्ट हुई है उससे पहले से डिग्री होल्डर पटवारी नहीं हैं। वहीं, इस संबंध में नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि डमी पटवारियों से काम लिया जा रहा है। डिग्री होल्डर पटवारी नहीं हैं। तहसील से कई बार पटवारी मांगे जा चुके हैं। शासन यदि नगर निगम को पूर्णकालिक पटवारी दे तो हालात काफी हद तक सुधर सकते हैं।

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