22 मई से खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट, पहला जत्था 19 मई को होगा रवाना

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देहरादून. भारतीय सेना और गुरुद्वारा ट्रस्ट हेमकुंड साहिब के द्वारा हेमकुंड साहिब तक बर्फ हटाने का काम पूरा कर दिया गया है. भारतीय सेना के जवानों ने गत दिवस गढ़वाल हिमालय में 15,200 फुट पर स्थित विश्व के सर्वाधिक ऊंचे गुरुद्वारे हेमकुंड साहिब तक बर्फ हटाकर आवागमन के लिए रास्ता साफ कर दिया. 2 वर्ष तक कोरोना काल में हेमकुंड साहिब की यात्रा भी ठप रही, लेकिन इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू कराए जाने की पूरी तैयारियां की जा रही हैं. यहां पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के साथ-साथ विदेशों से भी सिख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है. यात्रा में कोई परेशानी यात्रियों को ना उठानी पड़े इसके लिए गुरुद्वारा कमेटी ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. सेना की मदद से लगभग 4 किलोमीटर तक पैदल रास्ते से 7 से 8 फीट तक बर्फ को साफ कर दिया गया है. भारतीय सेना के जवानों ने 8 से 9 फीट बड़े-बड़े ग्लेशियरों को काटकर उनके बीचों-बीच रास्ता तैयार कर दिया है. हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा की 18 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा गोविंदघाट से शुरू होती है. हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए पहला जत्था 19 मई को ऋषिकेश से रवाना होगा. बताते चले कि गुरुद्वारा ट्रस्ट और भारतीय सेना के जवान हेमकुंड साहिब के पवित्र गुरुद्वारे तक पहुंच गए हैं. भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि अभी भी धाम में 7 से 8 फीट बर्फ जमी हुई है. पवित्र झील बर्फ के कारण जमी हुई है, लेकिन मई तक बर्फ पिघलने की पूरी संभावना है.

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